बरसाती दिन, सूर्यवत दिन 

    आदर्श: आशावाद 

    उप आदर्श: दृष्टिकोण 

    एक समय एक वृद्ध महिला थी जो हर समय रोती रहती थी. महिला की ज्येष्ठ बेटी छाते के व्यापारी से विवाहित थी जबकि उसकी कनिष्ठ बेटी की शादी सेवईं बेचने वाले से हुई थी.

     सूर्यवत दिनों में चिंताग्रस्त होकर वह महिला शोक प्रकट करती, “हे भगवान! आज तो मौसम बहुत ही अच्छा व गरम है. ऐसे day3मौसम में कोई भी छाता नहीं खरीदेगा. क्या होगा अगर मेरी बेटी को दुकान बंद करनी पड़ जाएगी? ” इस प्रकार के विचार उसे दुखी व उदासीन कर देते थे और वह रोए बिना रह नहीं पाती थी. 

   

जब बारिश होती थी तब वह अपनी छोटी बेटी के लिए रोती थी. “मेरी छोटी बेटी की शादी तो एक सेवईं बेचने वाले से हुई है. बारिश के इस मौसम में सूरज के बिना वह सेवईं सूखा नहीं पाएगी. उनके पास बेचने के लिए सेवईं ही नहीं होगी. अब क्या होगा?”

day4

     इस प्रकार लगातार चिंता करने के कारण वह महिला प्रतिदिन दुखी रहती थी. मौसम चाहे कैसा भी हो वह अपनी किसी एक बेटी के लिए शोक मना रही होती थी. उसके पड़ोसी उसे सांत्वना देने में असमर्थ थे और मज़ाक में उसे “रोंदू’ बुलाते थे.  

     एक दिन महिला की मुलाक़ात एक साधु से हुई. वह यह जानने के लिए बहुत उत्सुक थे कि वह महिला हमेशा रोती क्यों रहती थी. महिला ने साधु से अपनी समस्या बतलाई. साधु धीरे से मुस्कुराए और बोले, “महोदया! आप चिंता न करें. मैं आपको खुश रहने का रास्ता दिखाऊँगा. आपको दुखित होने की कोई आवश्यकता नहीं है.”

    सन्यासी की बात सुनकर रोंदू महिला बहुत खुश हुई. उसने तुरंत सन्यासी से पूछा कि उसे क्या करना चाहिए. साधु बोले, “यह बहुत ही सहज है. आपको केवल अपना दृष्टिकोण बदलने की ज़रुरत है. सूर्यवत दिनों में अपनी जयेष्ठ बेटी के छाते बेचने की असमर्थता के विषय में मत सोचो. इसके बदले अपनी छोटी बेटी के सेवईं सूखाने की समर्थता के बारे में सोचो. इतनी अच्छी व तेज़ धूप में वह ढेर सारी सेवईं बना सकती है और इससे उसके कारोबार में बढ़ोतरी होगी. बारिश होने पर अपनी जयेष्ठ पुत्री की छाते की दुकान के बारे में सोचो. बारिश के मौसम में हर कोई छाता खरीद रहा होगा. वह बहुत सारे छाते बेच पाएगी और उसकी दुकान खूब फले-फूलेगी.” 

   महिला को ज्ञान का बोध हुआ. उसने साधु की हिदायत का अनुसरण किया. कुछ समय के बाद उसका रोना बंद हो गया और अब वह सदा मुस्कुराती रहती थी. उस दिन के बाद से उसका नाम “हँसमुख महिला” पड़ गया.

     सीख:

    जब हम किसी परिस्थिति का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण से करते हैं, हम उसे बेहतर संभाल सकते हैं और हमेशा ख़ुशी का अहसास करते हैं.

Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

     अनुवादक- अर्चना 

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s