Archive | August 2018

संत ज्ञानेश्वर का नामदेव से मिलने जाना 

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नामदेव

  आदर्श: शाश्वत सत्य 

  उप आदर्श: सब एक हैं

   नामदेव एक भक्तिपरक व्यक्ति थे और सदैव प्रभु के गुणगान में मग्न रहते थे. इस कारण वह अपने पारिवारिक कर्त्तव्यों की ओर ध्यान नहीं देते थे. उनकी बहन जनाबाई ने उन्हें सलाह दी कि वह किसी धनवान व्यक्ति से पैसे उधार लेकर कपड़े बेचने का व्यापार करें और उससे जीविका कमाएं. 

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   नामदेव सहमत हो गए और कपड़े बेचने एक गाँव से दूसरे गाँव जाने लगे. अपने सफ़र के दौरान एक गाँव में सभी ग्रामवासियों को रोते देखकर वह उनसे उनकी वेदना का कारण पूछने लगे. गाँववालों ने नामदेव को बतलाया कि डाकुओं ने उनके गाँव को लूट लिया था और वह सब अन्न, धन व कपड़ों से वंचित थे.

  ग्रामवासियों की दयनीय अवस्था देखकर नामदेव सारे कपड़े मुफ़्त में वितरित कर देते हैं. नामदेव को खाली हाथ घर लौटते देखकर उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर अपने मायके चली जाती है. नामदेव को अपनी पत्नी व बच्चों से अलग देखकर जनाबाई पीड़ायुक्त होकर विलाप करती है और कृष्ण से प्रार्थना करती है. 

   नामदेव को अपने साथ उत्तरी भारत की तीर्थयात्रा कराने के इरादे से संत ज्ञानेश्वर नामदेव से मिलने आए हुए थे. जनाबाई को रोते देखकर उन्होंने पूछा, “क्या बात है, जनाबाई? “naam1

   जनाबाई बोली, “भइया, अपने बच्चों को दुखी देखकर क्या भगवान् को ख़ुशी मिलती है?”

   ज्ञानेश्वर पूछते हैं, “क्या यह तुम बोल रही हो?”

   जनाबाई बोली, “आपने देखा नहीं नामदेव के साथ प्रभु कितनी बेरहमी से पेश आए हैं?”

“बहन, तुम भूल रही हो कि यह सब मात्र एक स्वप्न है. एक केवल ईश्वर ही है जो देता है. जना, यह सब विट्ठल की माया है- जिसने लूटा है वह विट्ठल है; जिसको लूटा है वह विट्ठल है; नामदेव, जिसने मदद की है वह भी विट्ठल है; तुम, जो रो रही हो वह भी विट्ठल है; समस्त संसार विट्ठल है. जब तुम्हें इसका अहसास हो जाएगा तब तुम कभी परेशान नहीं होगी.”

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   सीख:

   शाश्वत सत्य यह है कि ईश्वर सर्वव्यापी है और समस्त संसार ही ईश्वर है. कहीं भी द्वैतवाद नहीं है. हम जो भी देखते या अनुभव करते हैं, सब एक ही है.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

    अनुवादक- अर्चना 

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    बरसाती दिन, सूर्यवत दिन 

    आदर्श: आशावाद 

    उप आदर्श: दृष्टिकोण 

    एक समय एक वृद्ध महिला थी जो हर समय रोती रहती थी. महिला की ज्येष्ठ बेटी छाते के व्यापारी से विवाहित थी जबकि उसकी कनिष्ठ बेटी की शादी सेवईं बेचने वाले से हुई थी.

     सूर्यवत दिनों में चिंताग्रस्त होकर वह महिला शोक प्रकट करती, “हे भगवान! आज तो मौसम बहुत ही अच्छा व गरम है. ऐसे day3मौसम में कोई भी छाता नहीं खरीदेगा. क्या होगा अगर मेरी बेटी को दुकान बंद करनी पड़ जाएगी? ” इस प्रकार के विचार उसे दुखी व उदासीन कर देते थे और वह रोए बिना रह नहीं पाती थी. 

   

जब बारिश होती थी तब वह अपनी छोटी बेटी के लिए रोती थी. “मेरी छोटी बेटी की शादी तो एक सेवईं बेचने वाले से हुई है. बारिश के इस मौसम में सूरज के बिना वह सेवईं सूखा नहीं पाएगी. उनके पास बेचने के लिए सेवईं ही नहीं होगी. अब क्या होगा?”

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     इस प्रकार लगातार चिंता करने के कारण वह महिला प्रतिदिन दुखी रहती थी. मौसम चाहे कैसा भी हो वह अपनी किसी एक बेटी के लिए शोक मना रही होती थी. उसके पड़ोसी उसे सांत्वना देने में असमर्थ थे और मज़ाक में उसे “रोंदू’ बुलाते थे.  

     एक दिन महिला की मुलाक़ात एक साधु से हुई. वह यह जानने के लिए बहुत उत्सुक थे कि वह महिला हमेशा रोती क्यों रहती थी. महिला ने साधु से अपनी समस्या बतलाई. साधु धीरे से मुस्कुराए और बोले, “महोदया! आप चिंता न करें. मैं आपको खुश रहने का रास्ता दिखाऊँगा. आपको दुखित होने की कोई आवश्यकता नहीं है.”

    सन्यासी की बात सुनकर रोंदू महिला बहुत खुश हुई. उसने तुरंत सन्यासी से पूछा कि उसे क्या करना चाहिए. साधु बोले, “यह बहुत ही सहज है. आपको केवल अपना दृष्टिकोण बदलने की ज़रुरत है. सूर्यवत दिनों में अपनी जयेष्ठ बेटी के छाते बेचने की असमर्थता के विषय में मत सोचो. इसके बदले अपनी छोटी बेटी के सेवईं सूखाने की समर्थता के बारे में सोचो. इतनी अच्छी व तेज़ धूप में वह ढेर सारी सेवईं बना सकती है और इससे उसके कारोबार में बढ़ोतरी होगी. बारिश होने पर अपनी जयेष्ठ पुत्री की छाते की दुकान के बारे में सोचो. बारिश के मौसम में हर कोई छाता खरीद रहा होगा. वह बहुत सारे छाते बेच पाएगी और उसकी दुकान खूब फले-फूलेगी.” 

   महिला को ज्ञान का बोध हुआ. उसने साधु की हिदायत का अनुसरण किया. कुछ समय के बाद उसका रोना बंद हो गया और अब वह सदा मुस्कुराती रहती थी. उस दिन के बाद से उसका नाम “हँसमुख महिला” पड़ गया.

     सीख:

    जब हम किसी परिस्थिति का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण से करते हैं, हम उसे बेहतर संभाल सकते हैं और हमेशा ख़ुशी का अहसास करते हैं.

Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

     अनुवादक- अर्चना