गुरु और शेर 

     

    आदर्श: शान्ति 

   उप आदर्श: धीरज, एकाग्रता

   एक शिक्षक और उनका छात्र एक गाँव से दूसरे गाँव जा रहे थे. अचानक उन्होंने एक दहाड़ सुनी. उन्होंने पीछे मुड़कर गौर से देखा और पाया कि एक विशाल शेर उनका पीछा कर रहा था. 

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छात्र झटपट वहाँ से भागने को तैयार था पर तभी उसे अपनी आत्मसंयम की शिक्षा और अभ्यास का ध्यान आया. उसने स्वयं को संभाला, शांत किया और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करने लगा कि उसके शिक्षक क्या करेंगे.

   शिष्य ने पूछा, “हम क्या करें, गुरूजी? ”

   शिष्य की ओर देखकर शिक्षक शांत स्वर में बोले, “हमारे पास अनेकों विकल्प हैं. अपने मन में ख़ौफ़नाक डर भर कर हम स्वयं को शक्तिहीन बना सकते हैं ताकि शेर जैसे चाहे वैसे पेश आ सकता है. हम बेहोश होकर गिर सकते हैं. हम भाग सकते हैं पर शेर भी हमारे पीछे भागेगा. हम शेर के साथ संघर्ष कर सकते हैं  पर शेर शारीरिक रूप से हमसे अधिक शक्तिमान हैं.” 

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   “हम भगवान् से अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर सकते हैं. यदि हमारी एकाग्रता यथेष्ट सुदृढ़ है तो हम अपने मन की ताकत से शेर को प्रभावित कर सकते हैं. हम शेर को प्रेम प्रेषित कर सकते हैं. हम अपनी भीतरी शक्ति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. हम इस सत्य पर मनन कर सकते हैं कि शेर सहित हम और सम्पूर्ण जगत एक ही इकाई हैं और इस प्रकार हम शेर की अंतरात्मा को प्रभावित कर सकते हैं.”

    “तुम किस विकल्प का चयन करना पसंद करोगे?”

    “आप गुरु हैं. आप मुझे बताएं कि हमें क्या करना चाहिए. हमारे पास ज़्यादा समय नहीं है, “छात्र ने उत्तर दिया.

    शिक्षक ने निडर होकर शेर की तरफ देखा, अपने मन से सारे विचार निकाले और गहरे ध्यान की स्थिति में चले गए. उन्होंने अपनी चेतना में शेर सहित समस्त जगत को समाविष्ट कर लिया. इस अवस्था में शिक्षक और शेर की चेतना मिलकर एक हो गई.

    इस दौरान छात्र डर कर काँप रहा था क्योंकि शेर उनके काफी नज़दीक था और उनपर छलांग लगाने के लिए तैयार था. छात्र अपने शिक्षक को देखकर हैरान था कि ऐसी खतरनाक परिस्थिति में भी वह कैसे इतने शांत व निर्लिप्त थे.

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    शिक्षक निरंतर निडरतापूर्वक ध्यानमग्न थे.

    कुछ समय के बाद शेर ने अपना सर और पूँछ नीचे की और वहाँ से चला गया. 

  अचम्भित शिष्य ने शिक्षक से पूछा, “आपने क्या किया?” 

    “कुछ नहीं. मैंने केवल अपने मन से सारे विचार निकालकर, शेर की आत्मा को अपने आप में संयुक्त कर लिया था. इससे guruji4आध्यात्मिक स्तर पर हम दोनों में शान्ति का रिश्ता जुड़ गया और इसके परिणाम स्वरूप शेर ने भीतरी शान्ति, शीतलता और एकता भाँप ली. उसे किसी खतरे का आभास या उग्र व्यवहार करने की ज़रुरत महसूस नहीं हुई और वह वहाँ से चुपचाप चला गया.”

    शिक्षक ने अंत में कहा, “जब मन शांत व स्थिर होता है, उसकी शांति स्वतः ही आसपास के वातावरण व व्यक्तियों में संचारित हो जाती है और उन्हें अत्यंत प्रभावित करती है.”

    सीख:

  यदि हमारा मन शांत व विचार केंद्रित होंगे तो सब कुछ सरलता से सुलझ जाता है और हम सफलता हासिल कर सकते हैं.

 

source: saibalsanskaar.wordpress.com

 अनुवादक- अर्चना 

 

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