केवल समय ही प्रेम की कदर करेगा

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आदर्श: प्रेम

कई वर्ष पूर्व सभी भावनाएँ व जज़्बाद छुट्टी मनाने एक तटीय टापू पर एकत्रित हुए. सभी आनंदमय समय व्यतीत कर रहे थे. एक दिन अचानक आने वाले तूफ़ान की घोषणा हुई. मौसम विभाग से घोषणा सुनकर सभी जल्द से जल्द टापू से निकलने की चेष्टा करने लगे.

हर तरफ यथेष्ट तहलका मच गया और सभी टापू से बाहर निकलने के लिए अपनी नौकाओं की ओर भागने लगे; सारे कोलाहल के बावजूद विचित्र बात यह थी कि केवल प्रेम को कोई जल्दी नहीं थी. बहुत सारा अधूरा काम शेष बचा हुआ था. सारा काम समाप्त होने पर जब प्रेम के जाने का समय हुआ तब उसे अहसास हुआ कि उसके लिए कोई भी नाव नहीं बची थी. फिर भी आश्वासन रखकर उसने अपने चारों ओर देखा.

तभी सफलता अपनी उत्कृष्ट नाव में वहाँ से गुज़री. प्रेम ने उससे निवेदन किया, “कृपया मुझे अपनी नाव में ले लो.” परन्तु सफलता बोली, “मेरी नाव सोने और अन्य बेशकीमती जवाहरतों से भरी हुई है, तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है.”

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फिर अभिमान अपनी ख़ूबसूरत नाव में आया. प्रेम ने उससे पूछा, “अभिमान, क्या तुम मुझे अपनी नाव में लोगे? कृपया मेरी मदद करो.” अभिमान बोला, “नहीं, तुम्हारे पैर मैले हैं और मैं अपनी नाव गन्दी नहीं करना चाहता.”

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कुछ समय बाद शोक वहाँ से गुज़रा. प्रेम ने उसे भी मदद के लिए पुकारा पर शोक ने जवाब दिया, “मैं बहुत उदास हूँ. मैं एकांत में रहना चाहता हूँ.”

शोक की नाव वहाँ से गुजरने के जल्द बाद ख़ुशी वहाँ से गुज़री. प्रेम ने उसे भी मदद के लिए पूछा पर ख़ुशी अपने आप में इतनी प्रसन्न थी कि उसे किसी और की परवाह ही नहीं थी.

तभी अचानक कहीं से किसी ने आवाज़ दी, “प्रेम आओ, मैं तुम्हें अपने साथ लेकर चलूँगा.” प्रेम ने अपने इस रक्षक को पहचाना नहीं पर फिर भी कृतज्ञतापूर्वक झटपट नाव में बैठ गया.

सभी के सकुशल किनारे पर पहुँच जाने पर प्रेम भी अंत में नदी तट पर पहुँचा. नाव से उतरने के बाद वह ज्ञान से मिला. प्रेम ने पूछा, “ज्ञान, क्या तुम्हें पता है कि अन्य सभी द्वारा ठुकराए जाने पर किसने मेरी मदद की थी?” ज्ञान मुस्कुराया, “वह समय था क्योंकि केवल समय को ही तुम्हारा असली मोल और क्षमता मालूम है. प्रिय प्रेम, केवल तुम ही शान्ति व ख़ुशी ला सकते हो.”

सीख:
इस कहानी का सन्देश यह है कि जब हम संपन्न होते हैं तब हम प्रेम को नाकाबिल समझते हैं. जब हम स्वयं को महत्त्वपूर्ण समझते हैं तो हम प्रेम को सराहते नहीं हैं. सुख और दुःख में हम प्रेम पर ध्यान नहीं देते हैं. परन्तु समय के साथ हम प्रेम का वास्तविक महत्त्व समझते हैं. हमें अपने जीवन में प्रतिदिन प्रेम संजोकर सबके साथ बाँटना चाहिए.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

 

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