कांटेदार जंगली चूहे

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आदर्श: शान्ति
उप आदर्श: एकता, धैर्य

उस साल शीतऋतु का प्रकोप कुछ ज़्यादा ही था और अत्यधिक जाड़े के कारण बहुत सारे पशुओं की मृत्यु हो गई थी.

परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वयं को गरम रखने के लिए सभी चूहों ने एक साथ समूह बनाकर रहने का निश्चय किया. एक जुट होकर रहने से उन्होंने स्वयं को संरक्षित तो कर लिया परन्तु उनके शरीर के कांटों से उनके करीबी साथी घायल होने लगे.

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कुछ समय बाद चूहों ने स्वयं को एक दूसरे से दूर करने का फैसला किया. ऐसा करने से प्रचंड सर्दी का उन्हें अकेले ही सामना पड़ा. उनका शरीर अकड़ने लगा और धीरे-धीरे चूहे मरने लगे. अब उन्हें बहुत ही सावधानी से फैसला लेना था: या तो वह अपने मित्रों के कांटों को स्वीकार करते या फिर धरती से ओझल होते.

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सभी चूहों ने आपस में विचार-विमर्श किया और एक बार पुनः एक जुट होकर रहने का फैसला किया. दूसरों से गर्माहट ग्रहण करने के लिए उन्होंने अपने साथियों से करीबी सम्बन्ध के कारण होने वाले घावों के साथ जीना सीख लिया. इस प्रकार वह जीवित रह पाए.

सीख:

सर्वश्रेष्ठ सम्बन्ध वह नहीं है जो परिपूर्ण व्यक्तियों को साथ लेकर आता है. एक सामंजस्यपूर्ण रिश्ते में प्रत्येक व्यक्ति दूसरों की त्रुटियों के साथ जीना सीखता है और दूसरों के विशिष्ट गुणों की सराहना करता है. सहनशीलता और एक दूसरे के स्वीकरण से हम किसी भी रिश्ते में सामंजस्य ला सकते हैं.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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