Archive | May 2017

जीवन के संघर्ष

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      आदर्श: आशावाद
 उप आदर्श: रवैया

एक दिन एक बेटी ने अपने पिता से शिकायत करते हुए कहा कि उसकी ज़िन्दगी बहुत तकलीफ़देह थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किस प्रकार सफल हो पाएगी. हर पल जूझते और संघर्ष करते-करते वह पूरी तरह से थक चुकी थी. जैसे ही एक परेशानी का समाधान निकलता था तभी दूसरी परेशानी सामने आ खड़ी होती थी. उसके पिता जो व्यवसाय से एक रसोइया थे, उसे रसोई में ले गए. उन्होंने ३ बर्तनों में पानी भरा और उन्हें तेज आँच पर रख दिया.

जब तीनों बर्तनों में पानी उबलने लगा तब उन्होंने एक में आलू डाले, दूसरे में अंडे और तीसरे में कॉफ़ी के बीज डाल दिए. अपनी बेटी से बिना कुछ बोले एक बार पुनः वह तीनों बर्तनो में उबाल आने का इंतज़ार करने लगे.

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बेटी हैरान थी कि उसके पिता क्या कर रहे थे परन्तु नाखुश होने के बावजूद वह बेताबी से इंतज़ार करने लगी. २० मिनट के बाद पिता ने तीनों चूल्हे बंद कर दिए. फिर उन्होंने पहले बर्तन में से आलू निकालकर एक कटोरे में रख दिए. इसी प्रकार दूसरे बर्तन में से अंडे निकालकर एक अन्य कटोरे में रख दिए और फिर एक कड़छी से कॉफ़ी निकालकर एक कप में डाल दी.

इस के बाद अपनी बेटी को देखकर उन्होंने पूछा, ” तुम्हें क्या दिख रहा है?”
उसने फौरन जवाब दिया, ” आलू, अंडे और कॉफ़ी.”

पिता बोले, ध्यान से देखो और आलूओं को छूकर महसूस करो. आलूओं को छूने पर उसने पाया कि आलू नरम थे.

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फिर उन्होंने एक अंडे को लेकर उसे फोड़ने को कहा. अंडे का छिलका छिलने पर बेटी ने पाया कि अंडा पूर्णतया उबलकर अब कठोर था.

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अंत में उन्होंने उसे कॉफ़ी का एक घूँट लेने को कहा. कॉफ़ी की लुभावनी महक सूँघते ही उसका चेहरा खिल उठा.

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उसने अपने पिता से पूछा, “इसका क्या मतलब है?”

तब पिता ने समझाया कि सभी- आलू, अंडे व कॉफ़ी के बीज- ने ही उबलते हुए पानी नामक कठिनाई का सामना किया था. परन्तु फिर भी सभी की प्रतिक्रिया भिन्न थी. उबलते पानी में जाने से पहले आलू सशक्त, सख्त व कठोर था पर उबलते पानी में कुछ देर रहने के बाद वह नरम व कमजोर हो गया. इसी प्रकार उबलते पानी में जाने से पहले अंडे नाज़ुक थे और उनके अंदर के द्रव्य की रक्षा उनका ठोस बाहरी छिलका कर रहा था. परन्तु उबलते पानी में रहने के बाद अंडे भीतर से सख्त हो गए. इन दोनों की अपेक्षा कॉफ़ी के पिसे हुए बीज बिलकुल अनोखे थे. उन्हें उबलते पानी में डालने से पानी ही बदल गया और सबका पसंदीदा एक नया पेय बनकर तैयार हो गया.

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फिर उन्होंने अपनी बेटी से पूछा, “तुम इन सब में से कौन सी हो?” “विपत्ति का सामना करने पर तुम्हारी अनुक्रिया क्या होती है? क्या तुम आलू हो, अंडा हो या फिर कॉफ़ी का बीज हो?”

सीख:
जीवन में हमारे आस-पास और हमारे साथ बहुत सी घटनाएँ होतीं हैं. परन्तु महत्वपूर्ण बात यह है कि हम किस भाव से उनका सामना करते हैं और उससे क्या सबक सीखते हैं. जीवन निरंतर सीखने व परिस्थिति के अनुकूल स्वयं को अपनाने के साथ-साथ प्रत्येक कठिनाई को सकारात्मकता में परिवर्तित करने का नाम है.

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Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

नामस्मरण की ताकत

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आदर्श: प्रेम
उप आदर्श: विश्वास, प्रार्थना की शक्ति

एक बार नारद मुनि भगवान् नारायण से मिलने गए.
भगवान ने नारद से पूछा …..nm1

नारायण: नारद, कैसे हो?
नारद : मैं ठीक हूँ, भगवन और हमेशा की तरह तीनो लोकों का भ्रमण कर रहा हूँ.
नारायण: तो तुम किस इरादे से भ्रमण करते हो?
नारद : भगवन मैं सिर्फ आपका ही ध्यान करता हूँ. मैं सतत नारायण, नारायण का गुणगान करता रहता हूँ. पर भगवन मुझे समझ में नहीं आता कि आपके नाम का भजन करने का क्या इनाम है.nm2
नारायण: नारद! तुम लगातार नामस्मरण करते हो पर फिर भी तुम्हें उसकी शक्ति की समझ नहीं है. जाओ और उस पेड़ पर बैठे कौए से पूछो.

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नारद उस कौए के पास गए और बोले, “नारायण के नाम का भजन करने का क्या इनाम है?”
यह सुनते ही कौआ पेड़ से गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई. नारद भगवान् नारायण के पास गए और बोले,

नारद: भगवन, मैंने कौए से पूछा पर वह तो मुझे सुनते ही पेड़ से गिरकर मर गया. क्या नामस्मरण का यही इनाम है? नारायण: सत्य तक पहुँचने के लिए समय का सदुपयोग बहुत आवश्यक है. नारद, तुम उस गरीब ब्राह्मण के घर जाओ. वहाँ पिंजरे में एक ख़ूबसूरत तोता है. उसका शरीर हरे रंग का है और चोंच लाल रंग की है. तुम जाकर उससे पूछो.”

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नारद ने तोते के पास जाकर उससे पूछा, “भगवान् नारायण के नाम का भजन करने का क्या इनाम है?”
यह सुनते ही तोता तुरंत गिरकर मर गया.
नारद एक बार फिर भगवान् नारायण के पास गए.

नारद : मैंने तोते से पूछा. पर वह तुरंत गिरकर मर गया. क्या यही इनाम है?
नारायण : नारद, सत्य जानने के लिए सदा दृढ़ रहना चाहिए. तुम ब्राह्मण के घर जाओ. वहाँ कल ही एक बछड़े का जन्म हुआ है. जाकर उससे पूछो.

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नारद बछड़े के पास गए और बोले, “भगवान् नारायण के नाम का भजन करने का क्या इनाम है?”
बछड़े ने सिर उठाया, नारद को देखा और गिरकर मर गया.
नारद पुनः नारायण के पास गए.

नारद: मैं सत्य जाने बिना अब यहाँ से नहीं जाऊँगा. हे भगवन! क्या यही इनाम है?
नारायण : नारद, तुम जल्दबाज़ी मत करो. जल्दबाज़ी से काम खराब हो जाता है. हानि दुःख का कारण होती है. इस कारण तुम हड़बड़ी मत करो और धैर्य रखो. पृथवी पर राजा के घर कल ही एक पुत्र का जन्म हुआ है. राजा बहुत ही प्रसन्न है. जाकर उस नवजात से पूछो.
नारद भयभीत थे. उन्होंने सोचा, “यदि वह नवजात भी मर गया तो सिपाही मुझे गिरफ्तार कर लेंगें. मेरी भी मृत्यु हो जाएगी. क्या यही इनाम है?”

नारायण: नारद, उतावले मत हो. जाकर बच्चे से पूछो.

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नारद राजा के पास गए. जब नारद ने बच्चे को देखने की इच्छा प्रकट की तब बच्चे को सोने की थाल में लाया गया.
नारद ने राजा से पूछा,”महाराज! क्या मैं इस बच्चे से एक प्रश्न पूछ सकता हूँ?”
राजा की सहमत मिलने पर नारद ने बच्चे से पूछा, “भगवान् नारायण के नाम का भजन करने का क्या इनाम है?”
नारद का प्रश्न सुनकर नन्हा राजकुमार बोला:

“नारद, क्या आपने अब तक यही सीखा है? यद्यपि आप रात-दिन प्रभु के नाम का गुणगान करते रहते हैं फिर भी आपको समझ नहीं है. सबसे पहले मैं एक कौआ था. आप आए और मुझसे नामस्मरण के इनाम के बारे में पूछा. नारायण का नाम सुनते ही मेरा जीवन परिपूर्ण हो गया और मैंने जीवन त्याग दिया. फिर मेरा जन्म एक तोते के रूप में हुआ. कहाँ एक कौआ और कहाँ एक तोता? एक तोते का पोषण पिंजरे में होता है. आपने पुनः आकर मुझसे वही सवाल एक बार फिर किया. इसके बाद मेरा जन्म एक बछड़े के रूप में हुआ. यह और भी अधिक श्रेष्ठ और बेहतर जीवन है. भारतीय गाय की पूजा करते हैं. मैंने आपके माध्यम से भगवान् का नाम सुना और मर गया. और अब मेरा जन्म एक राजकुमार के रूप में हुआ है. कहाँ एक कौआ, तोता, बछड़ा और कहाँ एक राजकुमार? नामस्मरण से हमारी जागृति व सुगति होती है और इस कारण इस जन्म में मैं एक राजकुमार हूँ. नारायण के नाम का भजन करने का यही इनाम है.”
सीख:
जब हममें प्रेम, विश्वास व श्रद्धा होती है तब हमारी चेतना का विकास अवश्य होता है. भगवान् का नाम सुनने मात्र से एक कौआ तोता बना और फिर बछड़ा और अंततः राजकुमार. नारायण के नाम के श्रवण से ही उसे मनुष्य जीवन मिला जो सबसे अधिक दुर्लभ है. यदि भगवान् का नाम सुनना इतना चमत्कारिक है तो भगवान् के नाम का उच्चारण कितना शक्तिशाली होगा? इसलिए हमें अपने पूरे होशो-हवास में भरपूर श्रद्धा से नामस्मरण करना चाहिए.

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अनुवादक- अर्चना

अपने मालिक के प्रति प्रेम

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आदर्श: प्रेम
उप आदर्श : श्रद्धा, सम्मान

हज़रत अमीर खुसरो के बारे में एक अनोखी कहानी विख्यात है जो अपने पीर के प्रति उनकी असीम श्रद्धा व प्रेम को स्पष्ट करती है.

हज़रत निज़ामुद्दीन की उदारता के बारे में सुनकर एक बार भारत के दूर-दराज़ इलाके से एक गरीब व्यक्ति उनसे मिलने दिल्ली आया. वह व्यक्ति अपनी आर्थिक समस्याओं के समाधान में उनकी सहायता चाहता था. संयोग से उस दिन उनके पास देने के लिए उनके पुराने जूतों के सिवाय और कुछ नहीं था. यद्यपि गरीब व्यक्ति बहुत निराश हुआ पर फिर भी पीर का शुक्रिया अदा कर के वह वहाँ से चला गया.

वापस लौटते समय रात बिताने के लिए उसने एक सराय में आश्रय लिया. संयोगवश उसी रात हज़रत अमीर खुसरो, जो बंगाल से व्यापारिक यात्रा से लौट रहा था, भी उसी सराय में ठहरा. हज़रत अमीर खुसरो उस समय हीरे-जवाहरात में व्यापार करता था और दिल्ली का सबसे अधिक अमीर नागरिक माना जाता था. अगली सुबह जब हज़रत अमीर खुसरो उठा तब उसने . टिप्पणी की: यहाँ मुझे अपने पीर की खुशबू आ रही है.”

खुशबू का स्त्रोत ढूँढ़ते-ढूँढ़ते वह उस व्यक्ति तक पहुँचा और उससे पूछा यदि वह दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया से मिला था. उसने हाँ में जवाब देते हुए हज़रत अमीर खुसरो को हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया से अपनी मुलाक़ात की सारी कहानी सुनाई. फिर हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया द्वारा दिए जूतों को दिखाकर उसने शोक प्रकट किया कि वह कितने पुराने और मूल्यहीन थे.

हज़रत अमीर खुसरो ने तुरंत अपनी सारी दौलत के बदले में उस व्यक्ति से अपने पीर के जूते माँगे. अपनी इस आकस्मिक खुशकिस्मती पर वह व्यक्ति अत्यधिक खुश हुआ. उसने हज़रत अमीर खुसरो को जूते दिए, उसका बार-बार शुक्रिया अदा किया और आनंदित होकर घर लौट गया. अमीर खुसरो आखिरकार अपने गुरु के पास पहुँचा और जूते उनके चरणों में रख दिए. जब उसने पीर को बताया कि उन जूतों के बदले में उसने अपनी समस्त दौलत प्रतिदान की है तब हज़रत निज़ामुद्दीन बोले, “खुसरो, तुम तो इन्हें बहुत सस्ते में ले आए.”

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सीख:
एक शिष्य का अपने गुरु के प्रति प्रेम का यह एक अति उत्तम उदाहरण है. शिष्य के लिए उसके गुरु की पादुका सबसे अधिक पूजनीय होती है. यह हमें अपने अहम् पर पकड़ ढीली कर के आत्मसमर्पण करना सिखाती हैं.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना