क्षमा करना अच्छा है

 

आदर्श: उचित आचरण
उप आदर्श: क्षमा

रमेश ने बहुत ही बड़ा और उत्कृष्ट घर खरीदा. घर के चारों ओर एक विशाल बगीचा था जिसमें कई तरह के फलों के वृक्ष थे. रमेश के घर के पास एक पुराने से घर में एक ईर्ष्यालु व्यक्ति रहता था जो सदा रमेश को तंग करने की योजना तैयार करता रहता था. कभी वह दरवाज़े के नीचे से कूड़ा करकट फेंकता था तो कभी कोई अन्य गन्दी हरकत करता था.

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एक दिन सुबह उठकर जब रमेश अपने घर के बरामदे में गया तब उसे वहाँ गंदे, मैले और बदबूदार पानी से भरी एक बाल्टी मिली.

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रमेश ने बाल्टी उठाई, उसका गन्दा पानी फेंककर बाल्टी को साफ़ किया, उसमें सबसे बड़े स्वादिष्ट व पके हुए सेब भरे और बाल्टी लेकर उस ईर्ष्यालु व्यक्ति के घर गया.

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दरवाज़े पर दस्तक सुनकर ईर्ष्यालु व्यक्ति मन ही मन मुस्कुराया और बोला, “आहा! अब मज़ा आएगा!” अपवाद और झगड़े की उम्मीद में जब उसने दरवाज़ा खोला तब सेब से भरी बाल्टी हाथ में लिए रमेश बोला, “जो अमीर होता है वह ही दूसरों में बाँटता है.”

सीख:

हमें अपना सही आचरण व आदर्श बदलने नहीं चाहिए. हमारे आदर्श ही हमें दूसरों से अलग व बेहतर बनाते हैं. हमें चोट पहुँचाने वालों को भी क्षमा करके यदि हम उनके साथ प्रेम बांटेंगें तो हमें दूसरों से और अधिक प्रेम मिलेगा.

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http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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