असली मोती का हार

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       आदर्श: सत्य
  उप आदर्श: भीतरी शक्ति के अस्तित्व का ज्ञान, बहुमूल्य वस्तु की क़दर करना

जया, बड़ी आँखों वाली पाँच वर्षीय, एक प्यारी सी लड़की थी. एक दिन वह अपनी माँ के साथ एक जनरल स्टोर में गई. वहाँ उसे नकली मोती का एक हार दिखा जिसकी कीमत १० रूपए थी.

जया को वह हार बहुत ही पसंद आया. उसने अपनी माँ से पूछा यदि वह जया के लिए वह हार खरीद सकतीं थीं. pearl1उसकी माँ ने कहा, “हार सुन्दर तो है पर बहुत ज़्यादा कीमती है. ऐसा करते हैं- मैं तुम्हें यह हार खरीद देती हूँ और घर पहुँचकर हम उन सभी कामों की सूची बनाएगें जिन्हें करके तुम इस हार की कीमत चुका सकती हो. और वैसे भी तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारी दादी शायद तुम्हें इस साल भी कुछ पैसे दें.”

जया सहमत हो गई और उसकी माँ ने उसे मोती का हार खरीद दिया. जया हर रोज़ पूरी लगन और मेहनत से घर के कामों में मदद करती थी. उसकी दादी ने उसके जन्मदिन पर उसे कुछ पैसे दिए, जिसकी मदद से जल्द ही जया ने मोती के हार की कीमत चुकता कर दी.

जया को मोती का हार बहुत ही पसंद था. उस हार को जया हर जगह पहनती थी- स्कूल में और माँ के साथ रोज़मरहा के काम करवाते समय भी. यहाँ तक की वह हार पहनकर ही सोती भी थी. केवल स्नान करने के समय ही जया हार को उतारती थी क्योंकि उसकी माँ ने कहा था कि  नहाते समय पहनने से मोती ख़राब हो जायेंगें.

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जया के पिता उससे बहुत प्यार करते थे. हर रोज़ जब जया सोने जाती थी तब उसके पिता अपनी प्रिय कुर्सी से उठकर उसके लिए उसकी पसंदीदा कहानी पढ़ते थे. एक रात कहानी पढ़ने के बाद पिता ने जया से पूछा, “जया, क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?”

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“बिलकुल पिताजी. आपको पता है कि मैं आपसे प्यार करती हूँ.”

“अच्छा, तो फिर तुम मुझे अपने मोती दे दो.”
“अरे पिताजी! मेरे मोती नहीं.!” जया बोली. “पर आप मेरी मनभावन गुड़िया, रोज़ी, ले सकते हैं. पिछले साल मेरे जन्मदिन पर रोज़ी आपने मुझे उपहार में दी थी. और रोज़ी के साथ आप उसकी पोशाक भी ले सकते हैं.”pearl4
“कोई बात नहीं, मेरी लाडली.” अपनी बेटी के गाल को चूमते हुए पिता ने उसे शुभ रात्रि कहा और चले गए.

एक हफ्ते बाद जया को कहानी सुनाने के बाद पिता ने एक बार फिर पूछा, “क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?”
“हाँ पिताजी. आपको पता है कि मैं आपसे प्यार करती हूँ.”
“अच्छा, तो फिर मुझे अपने मोती दे दो.”
“नहीं पिताजी, मेरे मोती नहीं. पर आप मेरे खिलौने के घोड़े, रिबन्स, को ले सकते हैं. आपको याद है न? रिबन्स मेरा सबसे प्यार खिलौना है. उसके बाल इतने कोमल हैं कि आप उनसे खेल भी सकते हैं. अगर आप चाहें तो रिबन्स को ले सकते हैं, पिताजी,” नन्हीं बच्ची अपने पिता से बोली.

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“कोई बात नहीं, लाडली, “पिता ने कहा और पुनः उसके गाल को चूमा. “ईश्वर तुम्हें सदा खुश रखे.”

कई दिन बीत जाने पर जब एक दिन जया के पिता उसे कहानी सुनाने आए तो उन्होंने जया को अपने बिस्तरे पर बैठा पाया. उसके होंठ काँप रहे थे. पिता को आते देखकर अपने हाथ आगे करते हुए वह बोली, “यह लो, पिताजी.”

जया के हाथों में उसका अतिप्रिय मोती का हार था. हिचकिचाते हुए उसने हार पिता के हाथ में दे दिया. जया के पिता ने एक हाथ में उसके प्लास्टिक के मोती लिए और दूसरे हाथ से अपनी जेब से एक नीला मखमली डिब्बा निकाला. डिब्बे के अंदर असली, वास्तविक, बेहद ख़ूबसूरत मोती थे.

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यह मोती पिता के पास सदा से ही थे. वह तो केवल जया का घटिया व सस्ते वस्तु का त्याग करने का इंतज़ार कर रहे थे ताकि वह उसे असली वस्तु दे सकते.

सीख:

अक्सर हम वास्तविकता से अपरिचित होते हैं और बहुत सी महत्वहीन बातों को पकड़ लेते हैं. हम एक आरामदायक जीवन व्यतीत करते हैं और हमारी सोच सीमित रहती है. संभव है कि जीवन में कई बेहतरीन चीज़ें हमारा इंतज़ार कर रहीं हैं. हम कब तक अपनी विचारधाराओं को पकड़े रहेंगें? हमें जीवन में विशालतर प्रयोजनों के लिए तुच्छ वस्तुओं पर अपनी पकड़ ढीली करनी ही पड़ेगी. हमें सत्य को समझकर इस बात की जानकारी हासिल करनी चाहिए कि हमारे लिए क्या हितकारी हैं. हम आश्वासन, खुशी तथा ताकत बाह्य संसार में ढूँढ़ते हैं जबकि वास्तव में यह सब हमारे भीतर ही है. हमें स्वयं के भीतर खोज करने की चेष्टा करनी चाहिए.

Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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