छड़ियों की गठरी

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आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श: एकता

एक पिता के तीन बेटे थे जो हमेशा आपस में झगड़ते रहते थे. पिता के लाख समझाने पर भी उन तीनों में कोई परिवर्तन नहीं आया. अपने बेटों को यह सिखाने के लिए कि आपसी मतभेद सदा दुर्भाग्य में परिणत होता है, चिंतित पिता ने एक बहुत ही अद्भुत उदाहरण सोचा.

एक दिन जब तीनों बेटे बहुत हिंसक व असभ्य रूप से झगड़ रहे थे तब उन्होंने एक बेटे से छड़ियों की एक गठरी लाने को कहा.stick2 फिर पिता ने वह गठरी एक-एक करके प्रत्येक पुत्र को सौंपी और उसे तोड़ने को कहा. हालाँकि हर एक ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया पर कोई भी उस गठरी को तोड़ नहीं पाया.

फिर पिता ने गठरी खोली और बेटों को एक-एक छड़ी देकर उसे तोड़ने को कहा. ऐसा उन सभी ने बहुत ही आसानी से कर दिया.

 

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“मेरे बच्चों” , पिता ने कहा, “इस गठरी को देखकर तुम्हें नहीं लगता कि अगर तुम एक साथ मिल जुलकर, आपसी सहयोग से रहोगे तो तुम्हारे शत्रु तुम्हें कभी चोट नहीं पहुँचा पायेंगें? परंतु अगर तुम अलग-अलग रहोगे तो तुम इस गठरी की एक छड़ी के समान कमज़ोर रहोगे.”

सीख:

एकता ही बल है. एक टोली आपसी सहयोग से एक अकेले व्यक्ति की अपेक्षा कहीं अधिक उपार्जित कर सकती है.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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