दो भेड़िये

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आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श : सही व गलत में भेदभाव

एक शाम एक वृद्ध दादाजी ने बातचीत के दौरान अपने पोते को लोगों के अंदर चलने वाले संघर्ष के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “बेटा, यह युद्ध हम सब के अंदर छुपे २ भेड़ियों का है.”

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“एक बुराई है. यह हमारे अंदर क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या, संताप, पछतावा, लालच, अभिमान, आत्मदया, पाप, अप्रसन्नता, हीनभाव, मिथ्यागर्व, झूठ, उत्कृष्टता तथा अहंकार के रूप में होता है.”fox3

“दूसरा बुराई है. यह हमारे अंदर आनंद, शान्ति, प्रेम, आशा, प्रशांति, विनम्रता, दयालुता, उदारता, सहानुभूति, दानशीलता, सत्य, अनुकंपा तथा विश्वास के रूप में होता है.”

बच्चे ने इस विषय में क्षणभर सोचा और फिर अपने दादाजी से पूछा, “कौन सा भेड़िया जीतता है? ”

दादाजी ने उत्तर दिया, “तुम जिसे बढ़ावा देते हो.”

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सीख:

जीत सदा उन विशेषताओं की होती है जिनको हम बढ़ावा देते हैं और जिनका अभ्यास करते हैं. हमारे पास अच्छी या बुरी आदतों का विकास करने का विकल्प रहता है. इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चों को बचपन से ही सही आदर्श सीखाए जाएँ ताकि वह अच्छे मनुष्य व संसार के बेहतर नागरिक बन सकें.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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