स्टारफिश की कहानी

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    आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श: जीवन में अंतर लाना

एक विद्वान व्यक्ति अपने लेखन के लिए समुद्र के किनारे जाया करता था. उसकी आदत थी कि अपना काम शुरू करने से पहले वह कुछ देर समुद्र के तट पर टहलता था.

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एक दिन समुद्र के तट पर टहलते हुए जब उसने एक मनुष्य देखा जो एक नर्तक की तरह चल रहा था. वह इस अनोखे दृश्य को देखकर मन ही मन मुस्कुराया और उसे पकड़ने के लिए और तेज़ चलने लगा.

जब वह उसके करीब पहुँचा तो उसने पाया कि वह एक युवक था. पर वह युवक नाच नहीं रहा था. fish11वास्तव में वह झुककर तट पर से कुछ छोटे-छोटे पदार्थ उठा रहा था और उन्हें समुद्र में फेक रहा था.

वह व्यक्ति उस युवक के और निकट गया और पुकारकर बोला, “नमस्कार! क्या मैं तुमसे पूछ सकता हूँ कि तुम यह क्या कर रहे हो?”

वह युवक रूका और उसने ऊपर देखकर जवाब दिया, “समुद्र में स्टारफिश फेक रहा हूँ.”
“अरे! पर तुम इन्हें समुद्र में क्यों फेक रहे हो? ” लेखक ने चौंककर पूछा.

इस पर युवक ने उत्तर दिया, “सूरज ऊपर चढ़ चुका है और ज्वार का प्रभाव घटने लगा है. अगर मैं इन्हें समुद्र में नहीं फेकूँगा तो यह सब मर जाएंगीं.”

युवक की बात सुनकर लेखक ने टिप्पणी की, “पर क्या तुम जानते हो कि यह तट मीलों दूर तक फैला हुआ है और इस छोर से तट के उस छोर तक ऐसी कई स्टारफिश तट पर पड़ी हुई हैं? सम्भवतः तुम अकेले ज्यादा अंतर नहीं ला पाओगे! ”

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इस पर वह युवक झुका और उसने एक और स्टारफिश उठाई और उसे समुद्र में फेक दिया.fish10 जैसे ही उस स्टारफिश ने पानी को छूआ, उसने कहा, “उसके जीवन में अंतर आ गया.”

 

 

सीख:

जब भी अवसर मिले तो हमें दूसरों के जीवन में अंतर लाने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए, फिर चाहे वह केवल एक व्यक्ति ही क्यों न हो. दूसरों को खुश करने के लिए एक मुस्कराहट या मधुर शब्द भी पर्याप्त होता है. कुछ नहीं से थोड़ा प्रयास सदा बेहतर होता है.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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