निःस्वार्थ प्रेम

 

          आदर्श: प्रेम
    उप आदर्श : स्वीकरण, निःस्वार्थ प्रेम

शुक्रवार की एक सुबह जब पीटर दफ्तर जाने के लिए तैयार हुआ तब उसने अपनी पत्नी को बताया कि आखिरकार उसने अपने मालिक से वेतन वृद्धि के बारे में बात करने का फैसला कर किया है. अपने मालिक से शीघ्र होने वाले मुठभेड़job1 के बारे में सोचकर पीटर दिनभर घबराया हुआ तथा भयभीत था. क्या होगा अगर श्री लारचमोंट(मालिक) उसका निवेदन नहीं मानेंगें? पिछले १८ महीनों में कठिन परिश्रम करके पीटर ने अपनी कंपनी को बहुत सारा काम दिलवाया था. उसके हिसाब से वह अवश्य ही वेतन वृद्धि का अधिकारी था.

अपने मालिक के दफ्तर में जाने के विचार से ही पीटर का दिल घबरा रहा था. काफी सोचने व योजना बनाने के बाद पीटर ने अंततः दोपहर में अपने वरिष्ठ के पास जाने का साहस इकट्ठा किया. job2पीटर का मालिक सदा बहुत सावधानी से खर्च करने वालों में से था. इसलिए जब वह पीटर की वेतन वृद्धि के लिए राजी हो गया तो पीटर को बेहद खुशी हुई और साथ ही आश्चर्य भी हुआ.

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उस शाम अपने शहर के ट्रैफिक नियमों तथा गति सीमाओं की परवाह किए बिना तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाकर पीटर घर पहुँचा.job5 घर आकर उसने देखा कि खाने की मेज़, उनके घर के सर्वोत्तम चीनी मिट्टी के बर्तन तथा जलती हुई मोमबत्तियों से, सजी हुई थी. उसकी पत्नी, टीना, ने पीटर के मनपसंद व्यंजनों से अत्युत्तम भोजन बनाया हुआ था. वह तुरंत ही समझ गया कि दफ्तर से किसी ने उसे आगाह कर दिया है.

 

 

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अपनी प्लेट के पास पीटर को अपनी पत्नी द्वारा लिखा एक प्यार सा नोट मिला. उसमें लिखा था, “बधाई हो, प्रियतम! मुझे मालूम था कि तुम्हें वेतन वृद्धि अवश्य मिलेगी. मैंने तुम्हारा मनपसंद भोजन सिर्फ यह जाहिर करने के लिए बनाया है कि मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ. मुझे तुम्हारी उपलब्धियों पर बहुत गर्व है.” नोट पढ़कर पीटर कुछ पल रूककर सोचने लगा कि उसकी पत्नी टीना कितनी भावुक व उसकी परवाह करने वाली थी.

खाने के बाद जब पीटर मिठाई लेने के लिए रसोई में जाने लगा तो उसने देखा कि टीना की जेब से एक दूसरा कार्ड ज़मीन पर गिरा हुआ था. उसने झुककर वह कार्ड उठाया.job8 उसमें लिखा था, “वेतन में वृद्धि न मिलने से तुम परेशान मत हो. तुम निस्संदेह ही इसके योग्य हो. तुम एक प्रशंसनीय पोषणकर्ता हो. मैंने तुम्हारा मनपसंद खाना केवल यह जताने के लिए बनाया है कि भले ही तुम्हें वेतन वृद्धि नहीं मिली है पर फिर भी मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.”

टीना का लिखा कार्ड पड़कर एकाएक पीटर की आँखें भर आईं. सम्पूर्ण स्वीकरण! पीटर को यह जानकार बहुत ही अच्छा लगा कि टीना का प्रेम निस्स्वार्थ था और उसके काम की सफलता पर आधारित नहीं था.

           सीख:

हमें जब इस बात का विश्वास रहता है कि कोई हमें हमारी सफलता या विफलता की परवाह किए बिना हमसे प्यार करता है तो अस्वीकरण का भय अक्सर कम हो जाता है. अगर हम किसी को बिना किसी शर्त के प्यार कर सकते हैं तो हम उनके तथा अपने जीवन में अंतर ला सकते हैं.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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