Archive | June 2016

स्टारफिश की कहानी

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    आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श: जीवन में अंतर लाना

एक विद्वान व्यक्ति अपने लेखन के लिए समुद्र के किनारे जाया करता था. उसकी आदत थी कि अपना काम शुरू करने से पहले वह कुछ देर समुद्र के तट पर टहलता था.

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एक दिन समुद्र के तट पर टहलते हुए जब उसने एक मनुष्य देखा जो एक नर्तक की तरह चल रहा था. वह इस अनोखे दृश्य को देखकर मन ही मन मुस्कुराया और उसे पकड़ने के लिए और तेज़ चलने लगा.

जब वह उसके करीब पहुँचा तो उसने पाया कि वह एक युवक था. पर वह युवक नाच नहीं रहा था. fish11वास्तव में वह झुककर तट पर से कुछ छोटे-छोटे पदार्थ उठा रहा था और उन्हें समुद्र में फेक रहा था.

वह व्यक्ति उस युवक के और निकट गया और पुकारकर बोला, “नमस्कार! क्या मैं तुमसे पूछ सकता हूँ कि तुम यह क्या कर रहे हो?”

वह युवक रूका और उसने ऊपर देखकर जवाब दिया, “समुद्र में स्टारफिश फेक रहा हूँ.”
“अरे! पर तुम इन्हें समुद्र में क्यों फेक रहे हो? ” लेखक ने चौंककर पूछा.

इस पर युवक ने उत्तर दिया, “सूरज ऊपर चढ़ चुका है और ज्वार का प्रभाव घटने लगा है. अगर मैं इन्हें समुद्र में नहीं फेकूँगा तो यह सब मर जाएंगीं.”

युवक की बात सुनकर लेखक ने टिप्पणी की, “पर क्या तुम जानते हो कि यह तट मीलों दूर तक फैला हुआ है और इस छोर से तट के उस छोर तक ऐसी कई स्टारफिश तट पर पड़ी हुई हैं? सम्भवतः तुम अकेले ज्यादा अंतर नहीं ला पाओगे! ”

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इस पर वह युवक झुका और उसने एक और स्टारफिश उठाई और उसे समुद्र में फेक दिया.fish10 जैसे ही उस स्टारफिश ने पानी को छूआ, उसने कहा, “उसके जीवन में अंतर आ गया.”

 

 

सीख:

जब भी अवसर मिले तो हमें दूसरों के जीवन में अंतर लाने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए, फिर चाहे वह केवल एक व्यक्ति ही क्यों न हो. दूसरों को खुश करने के लिए एक मुस्कराहट या मधुर शब्द भी पर्याप्त होता है. कुछ नहीं से थोड़ा प्रयास सदा बेहतर होता है.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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निःस्वार्थ प्रेम

 

          आदर्श: प्रेम
    उप आदर्श : स्वीकरण, निःस्वार्थ प्रेम

शुक्रवार की एक सुबह जब पीटर दफ्तर जाने के लिए तैयार हुआ तब उसने अपनी पत्नी को बताया कि आखिरकार उसने अपने मालिक से वेतन वृद्धि के बारे में बात करने का फैसला कर किया है. अपने मालिक से शीघ्र होने वाले मुठभेड़job1 के बारे में सोचकर पीटर दिनभर घबराया हुआ तथा भयभीत था. क्या होगा अगर श्री लारचमोंट(मालिक) उसका निवेदन नहीं मानेंगें? पिछले १८ महीनों में कठिन परिश्रम करके पीटर ने अपनी कंपनी को बहुत सारा काम दिलवाया था. उसके हिसाब से वह अवश्य ही वेतन वृद्धि का अधिकारी था.

अपने मालिक के दफ्तर में जाने के विचार से ही पीटर का दिल घबरा रहा था. काफी सोचने व योजना बनाने के बाद पीटर ने अंततः दोपहर में अपने वरिष्ठ के पास जाने का साहस इकट्ठा किया. job2पीटर का मालिक सदा बहुत सावधानी से खर्च करने वालों में से था. इसलिए जब वह पीटर की वेतन वृद्धि के लिए राजी हो गया तो पीटर को बेहद खुशी हुई और साथ ही आश्चर्य भी हुआ.

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उस शाम अपने शहर के ट्रैफिक नियमों तथा गति सीमाओं की परवाह किए बिना तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाकर पीटर घर पहुँचा.job5 घर आकर उसने देखा कि खाने की मेज़, उनके घर के सर्वोत्तम चीनी मिट्टी के बर्तन तथा जलती हुई मोमबत्तियों से, सजी हुई थी. उसकी पत्नी, टीना, ने पीटर के मनपसंद व्यंजनों से अत्युत्तम भोजन बनाया हुआ था. वह तुरंत ही समझ गया कि दफ्तर से किसी ने उसे आगाह कर दिया है.

 

 

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अपनी प्लेट के पास पीटर को अपनी पत्नी द्वारा लिखा एक प्यार सा नोट मिला. उसमें लिखा था, “बधाई हो, प्रियतम! मुझे मालूम था कि तुम्हें वेतन वृद्धि अवश्य मिलेगी. मैंने तुम्हारा मनपसंद भोजन सिर्फ यह जाहिर करने के लिए बनाया है कि मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ. मुझे तुम्हारी उपलब्धियों पर बहुत गर्व है.” नोट पढ़कर पीटर कुछ पल रूककर सोचने लगा कि उसकी पत्नी टीना कितनी भावुक व उसकी परवाह करने वाली थी.

खाने के बाद जब पीटर मिठाई लेने के लिए रसोई में जाने लगा तो उसने देखा कि टीना की जेब से एक दूसरा कार्ड ज़मीन पर गिरा हुआ था. उसने झुककर वह कार्ड उठाया.job8 उसमें लिखा था, “वेतन में वृद्धि न मिलने से तुम परेशान मत हो. तुम निस्संदेह ही इसके योग्य हो. तुम एक प्रशंसनीय पोषणकर्ता हो. मैंने तुम्हारा मनपसंद खाना केवल यह जताने के लिए बनाया है कि भले ही तुम्हें वेतन वृद्धि नहीं मिली है पर फिर भी मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.”

टीना का लिखा कार्ड पड़कर एकाएक पीटर की आँखें भर आईं. सम्पूर्ण स्वीकरण! पीटर को यह जानकार बहुत ही अच्छा लगा कि टीना का प्रेम निस्स्वार्थ था और उसके काम की सफलता पर आधारित नहीं था.

           सीख:

हमें जब इस बात का विश्वास रहता है कि कोई हमें हमारी सफलता या विफलता की परवाह किए बिना हमसे प्यार करता है तो अस्वीकरण का भय अक्सर कम हो जाता है. अगर हम किसी को बिना किसी शर्त के प्यार कर सकते हैं तो हम उनके तथा अपने जीवन में अंतर ला सकते हैं.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

कौआ और मोर

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   आदर्श : सत्य
उप आदर्श : संतुष्टि

जंगल में एक कौआ रहता था जो अपने जीवन से पूर्णतया संतुष्ट था. लेकिन एक दिन उसने बत्तख देखी mor3और सोचा, “यह बत्तख कितनी सफ़ेद है और मैं कितना काला हूँ. यह बत्तख तो संसार की सबसे ज़्यादा खुश पक्षी होगी.” उसने अपने विचार बत्तख से बतलाए. बत्तख ने उत्तर दिया, “दरसल मुझे भी ऐसा ही लगता था कि मैं सबसे अधिक खुश पक्षी हूँ जब तक मैंने दो रंगों वाले तोते को नहीं देखा था. अब मेरा ऐसा मानना है कि तोता सृष्टि का सबसे अधिक खुश पक्षी है.”

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फिर कौआ तोते के पास गया. mor4तोते ने उसे समझाया, “मोर को मिलने से पहले तक मैं भी एक अत्यधिक खुशहाल ज़िन्दगी जीता था. परन्तु मोर को देखने के बाद मैंने जाना कि मुझमें तो केवल दो रंग हैं जबकि मोर में विविध रंग हैं.” तोते को मिलने के बाद वह कौआ चिड़ियाघर में मोर से मिलने गया. वहाँ उसने देखा कि उस मोर को देखने के लिए हज़ारों लोग एकत्रित थे.mor5

सब लोगों के चले जाने के बाद कौआ मोर के पास गया और बोला, “प्रिय मोर, तुम तो बहुत ही खूबसूरत हो. तुम्हें देखने प्रतिदिन हज़ारों लोग आते हैं. पर जब लोग मुझे देखते हैं तो तुरंत ही मुझे भगा देते हैं. मेरे अनुमान से तुम भूमण्डल के सबसे अधिक खुश पक्षी हो.”

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मोर ने जवाब दिया, “मैं हमेशा सोचता था कि मैं भूमण्डल का सबसे खूबसूरत और खुश पक्षी हूँ. परन्तु मेरी इस सुंदरता के कारण ही मैं इस चिड़ियाघर में फंसा हुआ हूँ. मैंने चिड़ियाघर का बहुत ध्यान से परीक्षण किया है और तब मुझे यह अहसास हुआ कि इस पिंजरे में केवल कौए को ही नहीं रखा गया है. इसलिए पिछले कुछ दिनों से मैं इस सोच में हूँ कि अगर मैं कौआ होता तो मैं भी खुशी से हर जगह घूम सकता था.”

यह कहानी इस संसार में हमारी परेशानियों का सार प्रस्तुत करती है: कौआ सोचता है कि बत्तख खुश है, बत्तख को लगता है कि तोता खुश है, तोता सोचता है कि मोर खुश है जबकि मोर को लगता है कि कौआ सबसे खुश है.
                       सीख :

दूसरों से तुलना हमें सदा दुखी करती है. हमें दूसरों के लिए खुश होना चाहिए, तभी हमें भी खुशी मिलेगी. हमारे पास जो है उसके लिए हमें सदा आभारी रहना चाहिए. खुशी हमारे मन में होती है. हमें जो दिया गया है उसका हमें सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए. हम दूसरों की ज़िन्दगी का अनुमान नहीं लगा सकते. हमें सदा कृतज्ञ रहना चाहिए. जब हम जीवन के इस तथ्य को समझ लेंगें तो सदा प्रसन्न रहेंगें.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना