दो खरगोश

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       आदर्श : उचित आचरण
  उप आदर्श : अपने ज्ञान को दूसरों के साथ बाँटना

फ्रेडरिक और वांडा नाम के दो खरगोश थे जिन्हें इधर-उधर एक साथ घूमने में मज़ा आता था. एक बार ऐसे ही घूमते-घूमते उन्हें दो गाजरें दिखीं. पहली गाजर पर बड़े-बड़े पत्ते उग रहे थे और दूसरी ऊपर से बहुत छोटी दिखाई दे रही थी.

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गाजरें देखकर फेड्रिक उत्तेजित हो गया और भागकर बड़े पत्तों वाली गाजर के पास गया.
“मैं यह लूँगा, ” उसने गर्व से कहा और ज़मीन से गाजर उखाड़ने के लिए आगे बढ़ा.
वांडा ने अपने कंधे उचकाए और उसने दूसरी वाली गाजर उखाड़ी. वह गाजर फ्रेडरिक की गाजर से कहीं अधिक बड़ी निकली.

फ्रेडरिक चकित था और उसने वांडा से पूछा कि ऐसा कैसे संभव था. वांडा ने अपने दोस्त की ओर देखकर उत्तर दिया, “गाजर के पत्तों को देखकर तुम उनके आकार का अनुमान नहीं लगा सकते.”

दोनों दोस्त आगे बढ़े और उन्हें गाजरों का एक और जोड़ा मिला. इस बार भी दोनों के पत्तों का आकार भिन्न था. फ्रेडरिक ने अपनी दोस्त से पहले चयन करने को कहा.
वांडा कूदते हुए दोनों गाजरों के पास एक-एक करके गई, उनका निरीक्षण किया और उन्हें ध्यानपूर्वक सूंघा. फ्रेडरिक को यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि वांडा ने बड़े पत्तों वाली गाजर चुनी. जब दोनों ने अपनी गाजर ज़मीन से उखाड़ी तो फ्रेडरिक चकित था कि उसकी गाजर वांडा की गाजर से छोटी थी.

उसने कहा, “मुझे लगा कि तुम कह रही थी कि छोटे पत्तों का अर्थ होता है कि वह गाजर बड़ी होगी.”
“नहीं, ” वांडा ने उत्तर दिया, “मैंने कहा था कि एक गाजर के आकार का अनुमान उसके पत्तों से नहीं लगाना चाहिए.”
फ्रेडरिक ने सर हिलाया और आगे बढ़ने से पहले दोनों दोस्तों ने अपनी गाजर खाई.

दोनों दोस्तों को एक बार पुनः अलग-अलग आकार के पत्तों वाली दो गाजरें मिलीं. फ्रेडरिक काफ़ी उलझन में था और समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या करना चाहिए. वांडा ने उसे गाजर पहले चुनने का संकेत दिया.rab6

बेचारे नासमझ खरगोश ने दोनों गाजरों का सविस्तार निरिक्षण करने का ढोंग किया परन्तु उसे बिलकुल पता नहीं था कि वह क्या करे. उसे मालूम था कि वह अपनी दोस्त के समान होशियार नहीं था और उसने वांडा की ओर अस्पष्ट भाव से देखा. वांडा मुस्कुराई और कूदती हुई गाजरों के पास गई. उसने गाजरों की जांच की और फिर एक गाजर उखाड़ी. फ्रेडरिक ने अपने कंधे उचकाए और वह दूसरी गाजर के पास जाने ही वाला था जब उसकी चतुर दोस्त ने उसे रोका.
वांडा बोली, “नहीं फ्रेडरिक, यह गाजर तुम्हारे लिए है.”rab5
“पर यह गाजर तुमने चुनी है और मुझे यकीन है कि यह गाजर बड़ी वाली है. मुझे पता नहीं कि तुम गाजर का चयन कैसे करती हो पर तुम निस्संदेह मुझसे अधिक होशियार हो.”

“फ्रेडरिक, ऐसे ज्ञान का कोई लाभ नहीं है जो तुम दूसरों के साथ बाँट नहीं सकते. तुम मेरे अच्छे दोस्त हो और मैं चाहती हूँ कि तुम यह गाजर रखो. एक चतुर खरगोश, जिसका पेट तो भरा हो पर जिसका कोई मित्र न हो, बुद्धिमान कैसे कहला सकता है?”

सीख :
यह कहानी इस बात की चेतावनी है कि बुद्धिमानी की खोज में हमें दूसरों को नहीं भूलना चाहिए. अपने ज्ञान के माध्यम से हमें अपने आस-पास के लोगों की सहायता करने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए. हमें समझदार बनना चाहिए, दूसरों के साथ अपना ज्ञान बाँटना चाहिए और अपने आस-पास के लोगों के लिए विश्व को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए.

source: saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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