उड़ने की क्षमता होते हुए चलने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए

 

  आदर्श : उचित आचरण
   उप आचरण : लगातार कोशिश, संकल्प, अपने सामर्थ्य का अहसास

एक समय एक अति दयालु व दरियादिल राजा था. falconउसे पशु-पक्षी बहुत प्रिय थे और इस कारण उसके राज्य में एक विशाल पक्षीशाला थी. उसे पशु-पक्षियों को हानि पहुँचाना बिलकुल पसंद नहीं था और इस कारण वह मांस भी नहीं खाता था.

पशु-पक्षियों के प्रति राजा की करुणा व उदारता के कारण एक व्यापारी ने उसे २ खूबसूरत बाज तोहफ़े में दिए. दोनों बाज अलग-अलग देशों से लाए गए थे और इसलिए दोनों अलग-अलग जलवायु के अभ्यस्त थे.falcon4

राजा ने व्यापारी का धन्यवाद अदा किया और पक्षियों के प्रशिक्षक को आदेश दिया कि वह दोनों बाजों को सभी सुविधाएँ प्रदान करेfalcon5 और उन्हें उनके नए देश में आरामदेह महसूस कराए. प्रशिक्षक दोनों बाजों को ले गया और उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए उसने उन्हें सभी आवश्यक वस्तुएँ दीं. धीर-धीरे दोनों बाज उस देश के वातावरण के अनुकूल बन गए.

एक दिन राजा दोनों पक्षियों की उड़ान देखने आया क्योंकि उसने सुना था कि उनमें से एक बाज बहुत तेज़ रफ़्तार से बहुत ऊँचा उड़ सकता था. falcon3पहले बाज को इतना ऊँचा उड़ते देखकर राजा आश्चर्यचकित था और उसने प्रशिक्षक को सोने के सिक्कों से भरे एक बोरे से पुरस्कृत किया. पहले बाज को देखने के बाद राजा ने दूसरे बाज के बारे में पूछ-ताछ की. राजा के पूछने पर प्रशिशक ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि दूसरा बाज पहले दिन से एक ही शाखा पर बैठा है falcon2और उसने एक कदम भी नहीं उठाया है. प्रशिक्षक ने राजा को बताया कि उसकी हर संभव कोशिश के बावजूद वह बाज को उड़ाने में असफल रहा है.

राजा ने प्रशिक्षक को दिलासा देते हुए कहा कि वह उससे अधिक अनुभवी व्यक्ति या किसी बूढ़े विद्वान को लेकर आएगा जिसे बाज के बारे में अच्छी जानकारी हो.
राजा ने एक ऐसे व्यक्ति की खोज शुरू कर दी जो उस पक्षी को उड़ा पाने में सफल हो सकता था. राजा के संदेशवाहकों की घोषणा सुनकर एक बूढ़ा आदमी राजमहल आया. उसने राजा को आश्वासन दिलाया कि पहले पक्षी की तरह वह इस पक्षी को भी उड़ाएगा.

राजा ने प्रशिक्षक से कहा कि बाज का प्रशिक्षण करने के लिए वह उस वृद्ध पुरुष को पक्षीशाला ले जाए. राजा ने कहा कि अगले दिन वह देखना चाहेगा कि उस वृद्ध व्यक्ति के प्रशिक्षण से कितनी प्रगति हुई है.

अगले दिन दूसरे बाज को पहले बाज की तरह तेज़ रफ़्तार से ऊँचाई पर उड़ते देखकर राजा चकित रह गया. राजा अत्यधिक खुश हुआ और उसने वृद्ध व्यक्ति को उचित रूप से पुरस्कृत किया.

falcon6
राजा यह जानने के लिए बहुत उत्सुक था कि जी पक्षी इतने लम्बे समय से अपनी टहनी से हिला भी नहीं था वह एक दिन में इतना ऊँचा कैसे उड़ पाया. वृद्ध व्यक्ति ने बहुत ही सरलता से उत्तर दिया, “मैंने केवल वह टहनी काट दी जिसपर वह बाज बैठा हुआ था.”

falcon7

 

   सीख :
हममें से बहुत से लोग ऐसे ही हैं. हममें उड़ने की क्षमता है, हमें मालूम है कि हमें कैसे और कहाँ उड़ना है परन्तु फिर भी हम निष्क्रिय रहते हैं. हम अपने हालात में इतने संतुष्ट व खुश रहते हैं कि हम कोई भी अतिरिक्त प्रयत्न करना नहीं चाहते. हम कार्य तभी करते हैं जब हमें किसी परिस्थिति में ज़बरदस्ती धकेला जाता है. अगर हम परिवर्त्तन के अनुसार स्वयं में बदलाव लायेंगें, अवसरों का प्रयोग करेंगें और पर्याप्त चेष्टा करेंगें तो हम अवश्य सफल होंगें. यदि हम ऐसा नहीं करेंगें तो बिना कुछ सार्थक किए और अपने स्वाभाविक सामर्थ्य का अहसास किए बिना ही हमारी ज़िन्दगी बीत जाएगी.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s