विश्वास व दृढ़ता

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      आदर्श : उचित आचरण

उप आदर्श : विश्वास व दृढ़ता

वह एक अंधकारपूर्ण भयानक रात थी. तेज़ हवा चलने के कारण हर तरफ सांय-सांय की डरावनी आवाज़ थी मानो आने वाले तूफ़ान का संकेत दे रही हो. खादिजा और उसके तीन छोटे बच्चे अपने कमरे की पुरानी घिसी हुई कालीन पर बैठे हुए थे. खादिजा बार-बार खिड़की से बाहर झाँकती थी क्योंकि उसे डर था कि तूफ़ान कहीं उसके पति के घर लौटने से पहले न शुरू हो जाए. अंततः गाड़ी के रूकने की आहट सुनकर वह झटपट उठी और उसने बच्चों से उनके पिता का स्वागत करने को कहा.

सबसे छोटे बच्चे ने पूछा, “माँ, क्या वह हमारे लिए खाना लेकर आएं हैं ?” खादिजा ने बच्चे को हलके से झिड़का, “यह महत्त्वपूर्ण नहीं है. तुम उनसे यह प्रश्न मत करना.” बच्चे अपने पिता की ओर दौड़े और परेशान होने के बावजूद, खादिजा ने अपने पति का मुस्कुराकर स्वागत किया. खादिजा के पति ने उसे ब्रेड व पनीर के कुछ टुकड़े पकड़ाए. उसने जल्दी से खाना प्लेट में परोसा, जो लम्बे समय से इस्तेमाल के कारण बिरंगी हो चुकीं थीं.

खाना खाते समय खादिजा ने सबसे हँसकर बातें की.faith5 कुछ समय बाद बच्चे मिठाइयों व खिलौनों की कल्पना करते-करते सो गए. तब ख़दीजा और उसका पति कुछ देर चुपचाप बैठकर अपने जीवन के बारे में सोचने लगे.
“अब यह साल भी खत्म होने को है, “खादिजा के पति, हसन, ने कटुता से कहा, “और मुझे अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली है. हमने अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी है और जो भी फर्नीचर बेच सकते थे, उसे बेच चुके हैं. अब हमारे पास अपनी भूख व गरीबी से लड़ने के लिए कुछ भी बाकी नहीं बचा है.”

खादिजा बोली, “हमारे पास अभी भी विश्वास व निष्ठा है जो सभी अच्छाई व खुशियों की कुंजी है. ”

“हमारा विश्वास हमारे लिए क्या खुशियाँ लेकर आया है? हमारे बच्चे भूखे हैं और फटे हुए कपड़े पहन रहे हैं. इस निष्ठा ने तो हमारा जीवन मुश्किल बना दिया है और हमें गरीब व लाचार बना दिया है. इससे पहले तो हम बेहद सुख और आनंद से रह रहे थे…..”

खादिजा ने अपने पति को टोकते हुए कहा, “वह किस प्रकार का सुख था? जुआ कबसे अपने परिवार के लिए आजीविका कमाने का साधन बन गया है! अल्लाह ने कहा है कि मुसलमानों को जुआ नहीं खेलना चाहिए. यह जानते हुए कि हम जो खाना खा रहे थे और कपड़े पहन रहे थे वह हमें नरक में भेज सकते थे, हम कैसे खुश रह सकते थे? हमारे अभिलाभ ने दूसरों को भूखा व नंगा कर दिया था.”

“हाँ, खादिजा, ” हसन बोल, “तुम ठीक कह रही हो. इसी वजह से मैंने जूए का परित्याग किया था. उस दलदल से मुझे बाहर निकालने के लिए मैं तुम्हारा आभारी हूँ. मेरा पथप्रदर्शन करने के लिए मैं अल्लाह का भी अति आभारी हूँ. लेकिन अच्छा बनने की कोशिश में हमने सब कुछ गवां दिया है. यह गरीबी बहुत ही पीड़ाकर है और दरिद्रता से होने वाला अपमान असहनीय है.”

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हसन के शब्द सुनकर उसे दिलासा देते हुए खादिजा बोली, “हसन, यह केवल कुछ समय की बात है. अल्लाह कहते हैं कि हर कठिनाई राहत लेकर आती है. मुझे अभी भी उम्मीद है. वास्तव में मरनोपरांत का जीवन ही सत्य व अनन्त है. हमें अपने भविष्य के चिरस्थायी जीवन के लिए अच्छे कार्यों द्वारा पूरी तैयारी करनी चाहिए. जो बीत चुका है, उसपर अफ़सोस मत करो. खुशियाँ उन लोगों को मिलतीं हैं जो कठिनाईओं का सामना करते समय सहनशील रहते हैं और अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते हैं.”

“खादिजा मुझे डर है कि ऐसी कष्टपूर्ण और तनावपूर्ण परिस्थितियों में मेरे अंदर का बदमाश कहीं मुझे अपराध करने पर विवश न करे. अगर मैंने ऐसा किया तो मैं सब कुछ खो दूँगा.”
“मेरे पास अभी भी मेरी शादी की सोने की अंगूठी है, ” उसकी पत्नी बोली. “मैं कल इसे बेच दूँगी और फिर हमारे पास कुछ समय के लिए पैसे आ जाएंगें. मेरा विश्वास करो, अल्लाह की मदद से तुम्हें नौकरी ज़रूर मिलेगी. जो अल्लाह की अनुकम्पा की उम्मीद में उन्हें पूजते हैं, उन्हें अल्लाह कभी निराश नहीं करते हैं. तुम देखना तुम्हारा भविष्य जल्द ही उज्जवल होगा. जो अल्लाह में विश्वास रखते हैं, अल्लाह उनके प्रति सदा उदार रहते हैं.”

गहरी सांस लेते हुए उसके पति ने उत्तर दिया, “अगर तुम्हें ऐसा लगता है तो मैं तुम्हारा विश्वास करूँगा. पर हमारे इस कष्ट का कारण मुझे समझ नहीं आता है.”
ख़दीजा बोली, “हसन! क्या आपको क़ुरान का पंक्ति मालूम नहीं है : तुम जिस चीज़ से डरते हो, भूख व संपत्ति तथा जान की हानि से हम तुम्हारी परीक्षा अवश्य लेंगें. अतः सहनशील को यह शुभ समाचार दे दो.”

“पर हमारी तकलीफ़ों का कब अंत होगा?”
“जैसे ही हम अपनी इस परीक्षा में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होंगें, ” खादिजा ने उत्तर दिया. “सहनशीलता, प्रार्थना तथा पैसे कमाने के अधर्मी तरीकों से दूर रहकर हम अवश्य सफल होंगें.”

ऐसा कहकर दोनों ने अल्लाह को याद किया और उनमें सम्पूर्ण विश्वास रखकर सो गए. सवेरे उठकर उन्होंने नमाज़ पढ़ी. उसके बाद खादिजा नाश्ते की तैयारी करने लगी और हसन कुरान के कुछ अध्याय पढ़ने बैठ गया. जब बच्चे सो कर उठे तो खादिजा ने उन्हें चाय दी. एक बच्चे ने ब्रेड की माँग करते हुए कहा, “मेरा दोस्त और उसके भाई रोज़ सुबह अंडा और मक्खन खाते हैं.”
बच्चे की बात सुनकर खादिजा को बेहद कष्ट हुआ पर फिर भी उसने मुस्कुराकर बच्चे को चूमाfaith3 और कहा, “अल्लाह ने चाहा तो कल तुम्हारे पास वह सब कुछ होगा जो तुम्हें अच्छा लगता है.”
बच्चे ने भोलेपन से पूछा, “आप ऐसे क्यों बोल रहीं हैं: अगर अल्लाह ने चाहा? ”
माँ ने उत्तर दिया, “क्योंकि अल्लाह ही हमें सब कुछ देते हैं और हर कार्य करने में हमारी मदद करते हैं. उनकी इच्छा के बिना तो हम सांस भी नहीं ले सकते हैं.”
“माँ, इसका मतलब है कि हमें नाश्ते के लिए अंडा और ब्रेड अल्लाह देंगें? ”
“हाँ, मेरे बच्चे. अल्लाह की इच्छा से ऐसा अवश्य होगा.”

अपनी पत्नी की बात सुनकर हसन को उसके दृढ़ विश्वास पर बहुत आश्चर्य हुआ. पत्नी की सांत्वना सुनकर वह भी आशान्वित व विश्वस्त महसूस करने लगा. वह बच्चों से आने वाले अच्छे दिनों के बारे में और अल्लाह की मदद से एक अच्छी नौकरी ढूँढ़ने के बारे में बातें करने लगा. उसने बच्चों से कहा कि उनके हालात ठीक होने पर वह उनके लिए उनकी मनपसंद मिठाइयाँ और फल लेकर आएगा.

उसी समय दरवाज़े पर दस्तक हुई. हैरान कि इतने सवेरे दरवाज़े पर कौन होगा, हसन देखने गया. जब वह वापस आया तो उसका चेहरा खुशी से खिला हुआ था. हसन को खुश देखकर उसकी पत्नी ने कहा, “हसन, लगता है हमारी परीक्षा ख़त्म हो गई है.”
हसन ने भावुकता से भरी आवाज़ में उत्तर दिया, “हाँ, मेरी प्रिय पत्नी. अल्लाह महान हैं. उन्होंने हमारी परीक्षा समाप्त कर दी है. यह सब तुम्हारे धैर्य, प्रयास व निष्ठा के कारण संभव हुआ है. कहा जाता है: ‘एक भली महिला १००० पुरुषों से बेहतर होती है.’ अल्लाह की मेहरबानी और तुम्हारे अटल विश्वास के कारण हमारी कठिनाइयाँ समाप्त हुई हैं.”
“क्या वह हज साहिब का संदेशवाहक था? ”
“नहीं, स्वयं हज साहिब थे. उन्होंने कहा कि वह अपना कारोबार संभालने के लिए किसी को ढूँढ़ रहे थे. उन्होंने हमारी परिस्थिति व मेरे पिछले अनुभव के बारे में सुना. अपने धैर्यशील उपासकों को दिए वादे के अनुसार, अल्लाह ने हज साहिब के माध्यम से हमें निराशा से बचाकर उम्मीद दी है. हज साहिब ने मुझसे कहा, “अब तुम हम सब से अधिक साफ़ व पवित्र हो. अब तुम एक नवजात के समान हो.”
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 सीख:

विश्वास और दृढ़ता सदा सफलता की ओर ले जाते हैं. हमें सदा अपना सर्वश्रेष्ठ करना चाहिए और बाकी परमात्मा पर छोड़ देना चाहिए. परमात्मा को मालूम है कि हमारे लिए क्या सर्वोत्तम है.

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source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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