तुम्हारे समय के लिए धन्यवाद

 

     आदर्श : प्रेम
उप आदर्श : ध्यान रखने वाला, दूसरों के लिए चिंता

जैक ने उस वृद्ध व्यक्ति को काफ़ी समय से नहीं देखा था. पहले वह कॉलेज, फिर लड़कियों, उसके बाद व्यवसाय तथा अपने जीवन में पूरी तरह से संलग्न था. jack1अपने सपनों को साकार करने के लिए जैक हर संभव प्रयास में लगा हुआ था. अपने व्यस्त जीवन की दौड़ में जैक को अपने अतीत के बारे में सोचने का बिलकुल समय नहीं था. अक्सर अपनी पत्नी व बेटे के लिए भी उसके पास समय नहीं होता था. वह पूरे ज़ोर-शोर से अपना भविष्य बनाने में लगा हुआ था.

जैक की माँ ने उसे फ़ोन पर बताया, “कल रात श्री बेलसर का देहांत हो गया है और उनका अंतिम संस्कार बुधवार को है.”jack2
माँ की बात सुनकर जैक ख़ामोश रहा और अपने बचपन के दिनों को याद करने लगा. किसी पुरानी समाचार फिल्म के समान समस्त यादें उसके मन में स्फुरित होने लगीं.

“जैक, तुम सुन रहे हो न?”
“ओह! क्षमा कीजिए, माँ. हाँ, मैं सुन रहा हूँ. मैंने तो बहुत समय से उन्हें याद भी नहीं किया है. मुझे क्षमा कीजिए पर मुझे लगा था कि उनकी मृत्यु काफी वर्ष पहले ही हो गई थी” ,जैक बोला.
“पर वह तुम्हें कभी नहीं भूले. मैं जब भी उन्हें देखती थी, वह हर बार तुम्हारे बारे में अवश्य पूछते थे. वह अक्सर उन दिनों को याद करते थे जो तुमने उनके साथ गुज़ारे थे” ,माँ ने जैक से कहा.
“मुझे उनका वह पुराना घर, जिसमें वह रहते थे, बहुत प्रिय था” ,जैक बोला.

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“तुम्हें पता है, जैक, तुम्हारे पिता की मृत्यु के बाद, श्री बेलसर ने सदा इस बात का ध्यान रखा कि तुम्हारी ज़िन्दगी में एक पुरुष का प्रभाव रहे” ,माँ ने कहा.
जैक बोला,”उन्होंने ही मुझे बढ़ईगिरी सिखाई थी. अगर वह नहीं होते तो आज मैं इस व्यापार में नहीं होता. उन्होंने अपना कीमती समय लगाकर मुझे वह सब सिखाया जो उनके अनुसार महत्त्वपूर्ण था…..माँ, मैं उनके अंतिम संस्कार के लिए अवश्य आऊँगा” .jack3

व्यस्त होने के बावजूद अपने कथनानुसार, अगला विमान लेकर जैक अपनी माँ के घर के लिए रवाना हो गया. श्री बेलसर का अंतिम संस्कार लघु व शांतिपूर्ण था. उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी और उनके अधिकतर रिश्तेदारों का देहांत हो चुका था.

घर वापस लौटने से एक रात पहले जैक और उसकी माँ एक बार पुनः पड़ोस के उस पुराने घर को देखने गए. दरवाज़े पर खड़े होकर जैक क्षणभर के लिए रूका- मानो पुराने समय में वापस जाकर वह उन यादों को पुनः महसूस कर रहा हो. घर बिलकुल वैसा ही था जैसा उसे याद था. हर कदम यादों से भरा हुआ था. हर तस्वीर, हर वस्तु…… अचानक जैक रूका.

jack6            “क्या बात है, जैक? ” उसकी माँ ने पूछा.
“संदूक गायब है” , उसने कहा.
“कौन-सा संदूक? “माँ ने पूछा.
 

“एक सोने का छोटा-सा संदूक था जिसे श्री बेलसर सदा अपने मेज़ पर रखते थे. मैंने उनसे कितनी ही बार पूछा होगा कि उसके अंदर क्या है. पर वह हमेशा इतना ही बताते थे कि, “इसके अंदर वह है जिसकी वह सबसे अधिक कदर करते हैं” ,जैक ने कहा.

वह संदूक गायब था. उसके अलावा बाकी सब कुछ वैसे ही था जैसा जैक को याद था. उसने अनुमान लगाया कि बेलसर परिवार में से किसी ने वह संदूक लिया होगा.

श्री बेलसर के देहांत को लगभग २ हफ्ते हुए थे. कारोबार से घर लौटते समय एक दिन जैक ने अपनी डाक पेटी में एक नोट पाया- “पार्सल पर हस्ताक्षर की आवश्यकता है. घर पर कोई नहीं था. अगले ३ दिनों के भीतर कृपया मुख्य डाकघर आएँ.”
अगले दिन सुबह डाकघर जाकर जैक पार्सल लेकर आया. पार्सल का छोटा सा बक्सा काफी पुराना था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी ने उसे १०० वर्ष पहले भेजा हो. लिखावट बहुत मुश्किल से पढ़ने में आ रही थी पर तभी जैक का ध्यान भेजने वाले के पते पर गया.
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लिखा था, “श्री हैरोल्ड बेलसर. ”

जैक ने पार्सल गाड़ी से बाहर निकाला और उसे खोलकर देखा. उसके अंदर सोने का संदूक व एक लिफ़ाफ़ा था. जैसे उसने लिफ़ाफ़ा खोलकर पत्र पढ़ना शुरू किया, उसके हाथों में कम्पन थी.
“मेरी मृत्यु के उपरान्त, कृपया इस संदूक तथा उसमें रखी वस्तुओं को जैक बेन्नेट को भेजा जाए. यही वह वस्तु है जिसकी मैंने अपने जीवन में सबसे अधिक कदर की है.’

चिट्ठी पर एक छोटी-सी चाबी चिपकाई हुई थी. चाबी हाथ में लेकर जब जैक संदूक खोल रहा था तब उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था और उसकी आँखें भरी हुईं थीं. संदूक को सप्रेम सराहते हुए जैक ने उसे सावधानी से खोला और उसके अंदर उसे एक अति ख़ूबसूरत सोने की घड़ी मिली जिसपर लिखा था:

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“जैक, तुम्हारे समय के लिए शुक्रिया! -हैरोल्ड बेलसर. “

“जिस चीज़ का उन्हें सबसे ज़्यादा मोल था- वह……. मेरा समय था.”

जैक ने कुछ समय के लिए घड़ी को पकड़े रखा और फिर दफ्तर फ़ोन करके अगले २ दिनों की अपनी सारी आयोजित भेटें रद्द कर दीं. उनकी सहायक, जेनेट, ने पूछा, “क्यों? ”
जैक ने कहा, “मुझे अपने बेटे के साथ कुछ समय व्यतीत करना है. ”
“ओह, जेनेट….. तुम्हारे समय के लिए शुक्रिया! ”

सीख:

अक्सर लोग चाहते हैं कि कोई उनकी बात धैर्यपूर्वक सुने, उनका ध्यान रखे, उनकी ओर मुस्कुराकर देखे या उनके साथ कुछ समय व्यतीत करे. आज के व्यस्त जीवन में हमारे पास अपने बुजुर्गों तथा बच्चों के साथ समय बिताने का समय नहीं होता है. परन्तु हम उनके साथ कुछ समय व्यतीत करके उन्हें खुश कर सकते हैं. हमारे जीवन का कुछ समय किसी और के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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