लापता घड़ी

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आदर्श : शांति
 उप आदर्श : ख़ामोशी, धीरज

एक किसान को अहसास हुआ कि उसकी घड़ी बाड़े में गुम गई है. watchयद्यपि घड़ी मामूली थी पर वह घड़ी किसान के लिए अत्यधिक भावनात्मक महत्ता रखती थी.

 

 

 

हर जगह ढूँढ़ने के बाद जब उसे घड़ी नहीं मिली

watch2तब किसान ने स्वयं ढूँढ़ने के बजाय बाड़े के बाहर खेल रहे बच्चों की टोली को इस कार्य पर लगा दिया. किसान ने बच्चों से वादा किया कि जो बच्चा उसे घड़ी ढूँढ़कर देगा उसे प्रचुर मात्रा में पुरस्कार दिया जाएगा.

 

watch1इनाम के बारे में सुनकर सारे बच्चे जोश में आ गए और सबने  जल्दी से बाड़े के भीतर जाकर, भूसे के ढेर की भली भाँति जाँच शुरू कर दी. पर हर जगह ढूँढ़ने के बाद भी उन्हें घड़ी नहीं मिली. किसान अपनी लापता घड़ी के लिए खोज से हार मानने ही वाला था कि एक नन्हा बालक उसके पास आया. घड़ी ढूँढ़ने के लिए उसने किसान से एक और मौके का निवेदन किया.

किसान ने बच्चे की ओर देखा और सोचा, “यह बच्चा लगता तो नेक है. इसे एक और मौका देने में कोई नुकसान नहीं है.”
अतः किसान ने बच्चे को पुनः बाड़े में भेजा. कुछ समय पश्चात वह नन्हा बालक हाथ में घड़ी लेकर बाहर आया.watch4 घड़ी देखकर किसान को ख़ुशी तो हुई पर वह आश्चर्यचकित था. उसने लड़के से पूछा कि जहाँ बाकी सब विफल रहे वहाँ वह कैसे सफल रहा.

 

 

लड़के ने उत्तर दिया, “मैंने कुछ नहीं किया. केवल ज़मीन पर बैठकर ध्यानपूर्वक सुना.

watch5 ख़ामोशी में मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनी और उस दिशा में जाकर मैंने घड़ी ढूँढ़ ली.”

 

 

 सीख:

एक शांत मन उत्तेजित मन से कहीं बेहतर सोच सकता है. अगर हम हर रोज़ अपने मन को ख़ामोशी के कुछ पल देंगें तो पायेंगें कि अपनी अपेक्षा के अनुसार हम अपने जीवन को बहुत आसानी से सँवार सकते हैं.

Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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