Archive | December 2015

लकड़ी के कटोरे

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आदर्श : उचित आचरण, सत्य
  उप आदर्श : बड़ों का सम्मान

एक निर्बल व वृद्ध व्यक्ति अपने बेटे, बहु और ४ वर्षीय पोते के साथ रहते थे. wood1उनकी दृष्टि धुँधली थी, हाथों में कम्पन था और उनके कदम अस्थिर थे. हर रोज़ रात का खाना, परिवार के सभी सदस्य मेज़ पर एक साथ बैठकर खाते थे. पर कांपते हुए हाथ और कमज़ोर दृष्टि के कारण दादाजी के लिए ठीक से भोजन करना थोड़ा मुश्किल था. अक्सर मटर के दाने उनके चम्मच से लुढ़क कर ज़मीन पर गिर जाते थे. जब वह दूध का गिलास पकड़ते थे तो प्रायः दूध मेजपोश पर छलक जाता था.

लगभग हर रोज़ ऐसा होने से उनका बेटा और बहु बहुत परेशान थे. “हमें पिताजी के बारे में कुछ करना चाहिए,” बेटे ने कहा. “मैं भी उनके दूध गिराने, खाने की गन्दी आदतों और फर्श पर खाना बार-बार गिराने से तंग आ चुकी हूँ,” बहु ने सहमति भरते हुए कहा. अगले दिन, दम्पति ने भोजन कक्ष के कोने में एक छोटी सी टेबल रख दी. बेचारे बूढ़े दादाजी अपनी छोटी-सी टेबल पर खाना खाते थे wood2जबकि परिवार के अन्य सभी सदस्य खाने के टेबल पर एक साथ खाने का आनंद लेते थे. चूंकि दादाजी १-२ बर्तन तोड़ चूके थे, उनका खाना लकड़ी के कटोरों में परोसा जाता था. खाने के दौरान अगर कभी परिवार के लोग उनपर सरसरी निगाह डालते थे तो अकेले एक कोने में खाना खाने के कारण उनकी आँखों में आँसू होते थे. इसके बावजूद अगर उनसे ज़रा सा खाना गिर जाता तो उन्हें दम्पति से उच्च स्वर में डांट-फटकार ही मिलती थी.

४ वर्षीय बच्चे ने यह सब चुपचाप देखा. एक शाम भोजन से पहले पिता ने अपने बेटे को ज़मीन पर लकड़ी के टुकड़ों से खेलते हुए देखा. उसने बच्चे से प्यार से पूछा, “तुम क्या बना रहे हो?” लड़के ने उतने ही प्यार से उत्तर दिया, “ओह, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा तो आपके और मम्मी के खाना खाने के लिए एक छोटा कटोरा बना रहा हूँ.” ४ वर्षीय बच्चा मुस्कुराया और वापस अपने काम में जुट गया.

बच्चे के मासूम शब्द सुनकर उसके माता-पिता हक्के-बक्के और अवाक रह गए.

wood3 उनकी आँखों से आँसू बहने लगे. यद्यपि पति-पत्नी में कोई बात नहीं हुई पर दोनों को समझ में आ गया कि उन्हें क्या करना है. उस शाम पति ने अपने पिता का हाथ पकड़ा और उन्हें कोमलता से पारिवारिक टेबल पर लेकर आया. अपने जीवन के शेष दिनों में दादाजी ने सदा अपने परिवार के साथ ही भोजन किया. wood4अब न तो पति और न ही उसकी पत्नी को चम्मच गिरने, दूध गिरने या मेजपोश के गंदे होने की परवाह थी.

 

 

सीख:
पुरानी कहावत, “जैसी करनी, वैसी भरनी” , वास्तव में बिलकुल सही है. हम दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, हमें वही वापस मिलता है. इसलिए सदा अच्छे रहें, अच्छा करें और अच्छा देखें. बच्चों द्वारा अनुसरण करने के लिए माता-पिता, बड़ों तथा शिक्षकों को खासकर सटीक उदाहरण स्थापित करना चाहिए. यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी है.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

उदार पड़ोसी

 

आदर्श : प्रेम
 उप आदर्श : सहानुभूति, सही कार्य करना

एक समय तुआन नामक एक किसान था जिसके पास छोटी सी ज़मीन थी. वह अपनी ज़मीन पर एक झोपड़ी में अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहता था.farmer तुआन बहुत ही उदार व नेकदिल व्यक्ति था और उसकी ज़मीन पर जो भी फसल उगती थी उसे बेचकर अपनी जीविका कमाता था.

तुआन को दूसरों की मदद करना बहुत अच्छा लगता था. गाँव में जब कोई बीमार पड़ जाता था या जब किसी को किसी चीज़ की बहुत अधिक ज़रुरत होती थी तब तुआन उस व्यक्ति की मदद के लिए अवश्य हाज़िर होता था. गाँव में किसी का देहांत हो जाने पर, तुआन मृत व्यक्ति के परिवारजनों की हर संभव सहायता करता था. अगर कोई रात में बीमार पड़ जाता था तो तुआन गाँव के वैद्य को दवाइयाँ तैयार करने में मदद करता था तथा रोगी की देखभाल करता था. ऐसा प्रतीत होता था कि वह सभी का प्रिय है और उससे कोई भी नफरत नहीं कर सकता है.

परन्तु एक ऐसा व्यक्ति था जो तुआन से दिलो-जान से नफ़रत करता था. वह तुआन का पड़ोसी जुआन था जो तुआन की साथ वाली ज़मीन पर रहता था. जुआन स्वभाव से आलसी था farmer1और अपनी ज़मीन जोतने तथा उसमें फसल उपजाने में बिलकुल भी मेहनत नहीं करता था. अतः प्रतिवर्ष फसल कटाई के समय जुआन को अहसास होता था कि बिक्री के लिए उसकी फसल बहुत कम है. दूसरी ओर, तुआन अपनी पैदावार बेचकर अच्छा मुनाफ़ा कमाता था.

एक वर्ष जुआन अपनी नफरत को और नहीं रोक पाया. तुआन के फसल काटने से कुछ दिन पहले जुआन ने रात के अँधेरे में तुआन की फसल को आग लगा दी.farmer6 तुआन उस समय सो रहा था. परन्तु तुआन के एक अन्य पड़ोसी की सतर्कता के कारण तुआन की फसल का अधिकतर भाग नष्ट होने से बच गया.

जब आग की लपटें बुझाई गईं तब तुआन को समझ में आया कि आग किस दिशा से शुरू हुई थी. अपने प्रति जुआन की दुश्मनी की भावना से तुआन अब तक बिलकुल अनजान था. पर सच जानने के बाद उसने बात को वहीँ छोड़ दिया. उसने निश्चय किया कि अगर जुआन इस नीच करतूत को दोहराएगा तो वह जुआन के खिलाफ कार्यवाही करेगा.

उस वर्ष यद्यपि तुआन अपनी फसल अच्छे दाम पर बेच पाया पर वह ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं कमा पाया क्योंकि उसकी बहुत सारी फसल जुआन द्वारा लगाई भयंकर आग में जल चुकी थी. उदास होने के बावजूद उसने इस विषय में किसी से कोई चर्चा नहीं की.

कुछ दिनों के बाद रोने की आवाज़ से तुआन की नींद खुली. जब वह बाहर गया तो उसने जुआन की झोपड़ी के पास भीड़ एकत्रित पाई. farmer3

लोगों से उसे मालूम पड़ा कि जुआन का पुत्र बीमार था और गाँव का farmer4वैद्य उसका इलाज करने में असमर्थ था. तुआन ने झटपट घुड़साल से अपना घोड़ा निकाला और १० मील दूर शहर जाकर एक अधिक अनुभवी डॉक्टर को लेकर आया.
इस डॉक्टर ने जुआन के पुत्र की बीमारी को ठीक पहचानकर उसे बिलकुल सही दवाई दी. शीघ्र ही वह लड़का गहरी नींद में सो गया और तब तुआन डॉक्टर को वापस उसके शहर छोड़ने गया.
इस घटना के एक दिन बाद, जुआन तुआन के घर गया और फूट-फूटकर रोने लगा. उसने अपने सारे अपराध स्वीकार किए पर उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब तुआन ने उसे बताया कि उसे इन अपराधों के बारे में पहले से ही मालूम था.
“तुम्हें मालूम था कि मैंने तुम्हारी फसल को आग लगाई थी? और फिर भी तुम मेरे बेटे के लिए डॉक्टर को लाने गए?” ,हैरान जुआन ने पूछा.

तुआन ने सर हिलाया और कहा, “मैंने वही किया जो मुझे सही लगा. केवल इसलिए कि तुमने मेरे साथ गलत किया था, मैं तुम्हारे साथ गलत नहीं कर सकता था.”
जुआन खड़ा हुआ और उसने तुआन को गले से लगा लिया. यह दृश्य देखकर वहाँ उपस्थित सभी की आँखों में पानी आ गया.farmer8

उस दिन से जुआन ने स्वयं को पूरी तरह से बदल लिया. जब लोग उससे पूछते थे वह कैसे इतना बदल गया है तो वह जवाब में केवल इतना ही कहता था, “तुआन की अच्छाई व प्यार ने मुझमें इतना परिवर्तन लाया है.”

 

सीख:

अपने मित्रों के प्रति विनम्र रहें. अपने दुश्मनों के प्रति और अधिक विनम्र रहें. प्रायः ऐसा लगता है कि ऐसा कहना आसान है पर करना कठिन है. एक दोस्त से प्रेम करना हमेशा बहुत आसान होता है परन्तु अपने प्रति अच्छा व्यवहार नहीं करने वाले से प्रेम करना बहुत मुश्किल होता है. परन्तु अगर हम इस बात पर गौर करेंगें तो पायेंगें कि जब हम अपने प्रति अच्छा व्यवहार न करने वाले व्यक्ति की मदद करते हैं तो दूसरे व्यक्ति में बदलाव से पहले हम अपने भीतर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करते हैं. अगर हम द्वेषपूर्ण रहने के बजाय सही कार्य करने पर अटल रहेंगें तो हम भीतर से खुश रहेंगें. इस आचरण का विकास करने के लिए बहुत ताकत की आवयश्कता है पर एक बार इस विशेषता को हासिल कर लेने पर हम सदा खुश रहेंगें और अपने आसपास सदा प्रेम व आनंद फैलायेंगें. हम स्वयं को सदा आनंद से घिरा पायेंगें.

source: saibalsanskaar.wordpress.com
अनुवादक- अर्चना

लापता घड़ी

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आदर्श : शांति
 उप आदर्श : ख़ामोशी, धीरज

एक किसान को अहसास हुआ कि उसकी घड़ी बाड़े में गुम गई है. watchयद्यपि घड़ी मामूली थी पर वह घड़ी किसान के लिए अत्यधिक भावनात्मक महत्ता रखती थी.

 

 

 

हर जगह ढूँढ़ने के बाद जब उसे घड़ी नहीं मिली

watch2तब किसान ने स्वयं ढूँढ़ने के बजाय बाड़े के बाहर खेल रहे बच्चों की टोली को इस कार्य पर लगा दिया. किसान ने बच्चों से वादा किया कि जो बच्चा उसे घड़ी ढूँढ़कर देगा उसे प्रचुर मात्रा में पुरस्कार दिया जाएगा.

 

watch1इनाम के बारे में सुनकर सारे बच्चे जोश में आ गए और सबने  जल्दी से बाड़े के भीतर जाकर, भूसे के ढेर की भली भाँति जाँच शुरू कर दी. पर हर जगह ढूँढ़ने के बाद भी उन्हें घड़ी नहीं मिली. किसान अपनी लापता घड़ी के लिए खोज से हार मानने ही वाला था कि एक नन्हा बालक उसके पास आया. घड़ी ढूँढ़ने के लिए उसने किसान से एक और मौके का निवेदन किया.

किसान ने बच्चे की ओर देखा और सोचा, “यह बच्चा लगता तो नेक है. इसे एक और मौका देने में कोई नुकसान नहीं है.”
अतः किसान ने बच्चे को पुनः बाड़े में भेजा. कुछ समय पश्चात वह नन्हा बालक हाथ में घड़ी लेकर बाहर आया.watch4 घड़ी देखकर किसान को ख़ुशी तो हुई पर वह आश्चर्यचकित था. उसने लड़के से पूछा कि जहाँ बाकी सब विफल रहे वहाँ वह कैसे सफल रहा.

 

 

लड़के ने उत्तर दिया, “मैंने कुछ नहीं किया. केवल ज़मीन पर बैठकर ध्यानपूर्वक सुना.

watch5 ख़ामोशी में मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनी और उस दिशा में जाकर मैंने घड़ी ढूँढ़ ली.”

 

 

 सीख:

एक शांत मन उत्तेजित मन से कहीं बेहतर सोच सकता है. अगर हम हर रोज़ अपने मन को ख़ामोशी के कुछ पल देंगें तो पायेंगें कि अपनी अपेक्षा के अनुसार हम अपने जीवन को बहुत आसानी से सँवार सकते हैं.

Source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना