ईश्वर हर जगह हैं

 आदर्श : सत्य
उप आदर्श : बुद्धिमत्ता

वह एक नन्हा बालक था. वह रविवार के विद्यालय से घर जा रहा थाGod और रास्ते में इधर-उधर टहलते हुए समय बिता रहा था.

घास पर जूते घिसते हुए उसे एक कीड़ा मिला. उसे काकाटुंडी फूल की रोयेंदार गठिया भी मिलीGod1 और उसने गठिया हाथ में लेकर उसपर फूँक मारी.God2 उसकी अधीर आँखों ने एक और अद्भुत दृश्य देखा- एक पेड़ की टहनी पर चिड़िया का घोंसला. God3और घोंसला बहुत ही बुद्धिमानी व समझदारी से काफ़ी उँचाई पर रखा हुआ था.

एक पड़ोसी ने उस बालक को इधर-उधर घूमते हुए देखा और अपने बगीचे से उसे बुलाया. पड़ोसी ने बालक से पूछा कि वह उस दिन कहाँ गया था और वहाँ क्या कर रहा था.
बालक ने कहा, “मैं बाइबिल स्कूल गया था.”
बालक ने घास के एक ढेले को हटाया और एक कुलबुलाते हुए कीड़े God4को उठाते हुए बोला, “मैंने भगवान के बारे में बहुत कुछ सीखा है.”
पड़ोसी ने कहा, “समय बिताने का तुम्हारा यह बहुत बढ़िया तरीका है. अगर तुम मुझे बताओगे कि भगवान कहाँ हैं तो मैं तुम्हें दस सेंट दूँगा.”

बालक ने बहुत ही स्फूर्ति से उत्तर दिया, “महाशय मैं आपको एक डॉलर दूँगा अगर आप मुझे यह बतायेंगें कि भगवान कहाँ नहीं हैं.”

God5

                          सीख:

सब संसार को देखने के ढ़ंग पर निर्भर करता है. अगर हम संसार को सम्पूर्ण पवित्रता से परिपूर्ण हृदय से देखना सीख लें तो हमें भगवान हर जगह दिखाई देंगें.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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