सिद्धार्थ और पूजा- एक लघु कहानी

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आदर्श : सत्य
उप आदर्श : सच्चाई/ भरोसा/ निष्ठा

सिद्धार्थ और पूजा अच्छे दोस्त थे और एक दिन वे दोनों एक साथ खेल रहे थे. सिद्धार्थ के पास बहुत सारे कंचों थेpuja जब कि पूजा के पास टॉफियाँ थीं.puja3 खेल के दौरान सिद्धार्थ ने पूजा से कहा कि उसकी टॉफियों के बदले में वह उसे अपने सारे कंचे दे देगा. पूजा सरलता से सहमत हो गई. सिद्धार्थ ने सबसे बड़ा और सबसे आकर्षक कंचा अपने लिए एक ओर छुपाया और बाकी के सारे कंचे पूजा को दे दिए. परन्तु पूजा ने, वादे के अनुसार, सिद्धार्थ को अपनी सारी टॉफियाँ दे दीं.

उस रात पूजा शान्ति से सोई जबकि सिद्धार्थ को नींद नहीं आई. वह रातभर यही सोचता रहा कि जिस प्रकार उसने पूजा से अपना सबसे सुन्दर कंचा छुपाया था, उसी प्रकार क्या पूजा ने भी उससे कुछ टॉफियाँ छुपायीं थीं.puja4

सीख:

हमें अपने रिश्तों में ईमानदार रहना चाहिए. किसी रिश्ते में यदि हम अपना शत-प्रतिशत नहीं देंगें तो हम सदा संदेह में रहेंगें कि दूसरे व्यक्ति ने हमें शत-प्रतिशत दिया है या नहीं. ऐसा प्रत्येक रिश्ते के लिए लागू होता है. अतः हमें ईमानदार रहना चाहिए और सदा सर्वोत्तम प्रयास करना चाहिए.

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Source:  www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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