Archive | October 2015

पंडित और दूधवाली

एक गाँव में एक अति विद्वान पंडित रहता था. हर रोज़ सवेरे पंडित के घर एक दूधवाली दूध पहुँचाने आती थी.brahmin एक सुबह उसे दूध पहुँचाने में देर हो गई. इस कारण पंडित उससे नाराज़ था और उसने दूधवाली से उसकी देरी का कारण पूछा. उसने पंडित से कहा कि नाविक उसे देर से नदी के इस पार ले कर आया और इसी कारण उसे आने में विलम्भ हुआ. brahmin1पंडित ने दूधवाली से कहा कि वह नाविक की मदद के बिना भी नदी पार कर सकती है. पंडित ने कहा, “यदि कोई हरी नाम का जाप करे तो यह छोटी सी नदी तो क्या, संसार रुपी नदी भी पार कर सकता है.”

दूधवाली ने पंडित की बात ध्यानपूर्वक सुनी.

अगली सुबह वह दूध पहुँचाने जल्दी आ गई और पंडित ने पुनः उससे प्रश्न किया. दूधवाली ने बताया कि उनकी शिक्षा के अनुसार, उसने नाविक का इंतज़ार नहीं किया और प्रभु के नाम का जाप करते हुए नदी पर चल कर आ गई.brahmin2 पंडित भौंचक्का था. उसे विश्वास नहीं हुआ और उसने दूधवाली को नदी पर चलकर अपनी बात साबित करने को कहा. वह पंडित को नदी पर ले गई और प्रभु के नाम का जाप करते-करते नदी पर चलने लगी.brahmin3

उसने पंडित से भी ऐसे ही करने को कहा. पर पंडित अपने कपड़ों के गीले होने को लेकर अत्यधिक चौकस था. अतः जैसे ही पंडित ने पानी में पावँ रखा, वह नदी में गिर पड़ा. उसका ध्यान ईश्वर से अधिक अपने कपड़ों पर था. श्रद्धा का अभाव होने के कारण, उसे अपने ही शब्दों पर विश्वास नहीं था.

सीख:
शास्त्रों के अध्ययन मात्र से अधिक महत्त्वपूर्ण श्रद्धा व विश्वास है. हमें दूसरों को सलाह तभी देनी चाहिए जब हमें स्वयं के कथन पर पूरा विश्वास हो. हम जो दूसरों को उपदेश देते हैं उस पर हमें दृढ़ विश्वास व भरोसा होना चाहिए.

source: saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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विनम्रता के प्रमाण चिन्ह

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आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श : विनम्रता

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर एक अत्यधिक विनम्र व्यक्ति थे और उनका यह स्वभाव अक्सर दूसरों को प्रेरित करता था. उनके जीवन से सम्बंधित अनेकों कहानियाँ उनकी सादगी व नम्रता को दर्शाती हैं. उनके इसी स्वभाव तथा समाज के प्रति योगदान ने उन्हें भारत भर में मशहूर व आदरणीय व्यक्ति बना दिया था.

यह घटना उस समय की है जब ईश्वर चन्द्र विद्यासागर अपने कुछ मित्रों के साथ कोलकता विश्वविद्यालय शुरू करने की दिशा में कार्य कर रहे थे. वह इसके लिए चन्दा इकट्ठा कर रहे थे. अपने साथियों के मना करने के बावजूद भी, वह इस सिलसिले में अयोध्या के नवाब की हवेली में गए. saagar4नवाब एक उदार व्यक्ति नहीं था.saagar1 अतः जब विद्यासागर नवाब से मिले और उसे पूरी स्थिति से अवगत कराया तो नवाब ने बहुत ही निरादर और तिरस्कार भाव से विद्यासागर के चंदे वाली थैली में अपने जूते डाल दिए.saagar2 विद्यासागर ने बिलकुल भी विरोध नहीं किया और उनका धन्यवाद करके वहाँ से चले आए.

अगले दिन नवाब की हवेली के सामने विद्यासागर ने नवाब के जूतों की नीलामी आयोजित की.saagar3 नवाब को प्रसन्न करने के लिए नवाब के जागीरदार तथा दरबारियों सहित, बहुत सारे लोग आगे आए और बोली लगाने लगे. जूतों की बिक्री १००० रुपयों में हुई. यह सुनकर नवाब बहुत खुश हुआ और उसने भी १००० रुपयों की रकम दान में दी.

यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि जब नवाब ने दान-पात्र में अपने जूते डाले थे तब विद्यासागर विरोध कर सकते थे. वह इसे अपना अपमान समझ कर उदास हो सकते थे. इसके विपरीत उन्होंने उन जूतों का प्रयोग अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए किया. उन्हें न केवल पैसे मिले बल्कि वह नवाब को भी प्रसन्न करने में सफल हो पाए. उन्होंने सदा अपनी व्यक्तिगत भावनाओं से उपर उठकर अपने लक्ष्य की दिशा में काम किया. और अंततः कोलकता विश्वविद्यालय खोलने का उनका सपना साकार हुआ.

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 सीख :

प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने पर हमें शांत रहकर धैर्यता से काम लेना चाहिए. हमें अपने लक्ष्य को अपने अहम से ऊँचा रखना चाहिए. जीवन के उच्च उद्देश्य हेतु हमें अपनी पसंद व नापसंद को वश में रखना चाहिए. जब हम ईश्वर चन्द्र के विनम्र भाव जैसा गुण का विकास कर पायेंगें तब हम अपनी व्यक्तिगत भावनाओं पर नियंत्रण रखकर, अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में सफल हो सकते हैं.

source: http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

दो कुत्तों की कहानी

आदर्श: उचित आचरण
  उप आदर्श : आशापूर्ण दृष्टि

दो कुत्ते साथ-साथ चल रहे थे. पहला कुत्ता एक कमरे में घुसा और अपनी पूंछ हिलाते हुए कमरे से बाहर निकला. dog

कुछ देर के बाद दूसरा कुत्ता भी उसी कमरे में घुसा और गुर्राते हुए बाहर निकला.dog2

इन दोनों कुत्तों का व्यवहार देखकर एक महिला उसी कमरे में यह देखने गई कि एक कुत्ते के खुश होने और दूसरे कुत्ते के उत्तेजित होने का क्या संभव कारण हो सकता है. उसने देखा कि वह कमरा शीशों से भरा हुआ था.dog5

प्रसन्न कुत्ते को एक हज़ार खुश कुत्ते उसकी ओरदेखते हुए मिले dog3जबकि क्रोधित कुत्ते को केवल क्रोधित कुत्ते उसकी ओर गुर्राते हुए दिखे.dog4

सीख:
इस संसार में हम जो अपने आस-पास देखते हैं वह हमारा प्रतिबम्ब होता है. अतः अगर हम अपने आप में शांत और स्थिर रहेंगें, हम समस्त विश्व को भी शांतिपूर्ण पायेंगें.

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अनुवादक – अर्चना

ईश्वर हर जगह हैं

 आदर्श : सत्य
उप आदर्श : बुद्धिमत्ता

वह एक नन्हा बालक था. वह रविवार के विद्यालय से घर जा रहा थाGod और रास्ते में इधर-उधर टहलते हुए समय बिता रहा था.

घास पर जूते घिसते हुए उसे एक कीड़ा मिला. उसे काकाटुंडी फूल की रोयेंदार गठिया भी मिलीGod1 और उसने गठिया हाथ में लेकर उसपर फूँक मारी.God2 उसकी अधीर आँखों ने एक और अद्भुत दृश्य देखा- एक पेड़ की टहनी पर चिड़िया का घोंसला. God3और घोंसला बहुत ही बुद्धिमानी व समझदारी से काफ़ी उँचाई पर रखा हुआ था.

एक पड़ोसी ने उस बालक को इधर-उधर घूमते हुए देखा और अपने बगीचे से उसे बुलाया. पड़ोसी ने बालक से पूछा कि वह उस दिन कहाँ गया था और वहाँ क्या कर रहा था.
बालक ने कहा, “मैं बाइबिल स्कूल गया था.”
बालक ने घास के एक ढेले को हटाया और एक कुलबुलाते हुए कीड़े God4को उठाते हुए बोला, “मैंने भगवान के बारे में बहुत कुछ सीखा है.”
पड़ोसी ने कहा, “समय बिताने का तुम्हारा यह बहुत बढ़िया तरीका है. अगर तुम मुझे बताओगे कि भगवान कहाँ हैं तो मैं तुम्हें दस सेंट दूँगा.”

बालक ने बहुत ही स्फूर्ति से उत्तर दिया, “महाशय मैं आपको एक डॉलर दूँगा अगर आप मुझे यह बतायेंगें कि भगवान कहाँ नहीं हैं.”

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                          सीख:

सब संसार को देखने के ढ़ंग पर निर्भर करता है. अगर हम संसार को सम्पूर्ण पवित्रता से परिपूर्ण हृदय से देखना सीख लें तो हमें भगवान हर जगह दिखाई देंगें.

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अनुवादक- अर्चना

सिद्धार्थ और पूजा- एक लघु कहानी

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आदर्श : सत्य
उप आदर्श : सच्चाई/ भरोसा/ निष्ठा

सिद्धार्थ और पूजा अच्छे दोस्त थे और एक दिन वे दोनों एक साथ खेल रहे थे. सिद्धार्थ के पास बहुत सारे कंचों थेpuja जब कि पूजा के पास टॉफियाँ थीं.puja3 खेल के दौरान सिद्धार्थ ने पूजा से कहा कि उसकी टॉफियों के बदले में वह उसे अपने सारे कंचे दे देगा. पूजा सरलता से सहमत हो गई. सिद्धार्थ ने सबसे बड़ा और सबसे आकर्षक कंचा अपने लिए एक ओर छुपाया और बाकी के सारे कंचे पूजा को दे दिए. परन्तु पूजा ने, वादे के अनुसार, सिद्धार्थ को अपनी सारी टॉफियाँ दे दीं.

उस रात पूजा शान्ति से सोई जबकि सिद्धार्थ को नींद नहीं आई. वह रातभर यही सोचता रहा कि जिस प्रकार उसने पूजा से अपना सबसे सुन्दर कंचा छुपाया था, उसी प्रकार क्या पूजा ने भी उससे कुछ टॉफियाँ छुपायीं थीं.puja4

सीख:

हमें अपने रिश्तों में ईमानदार रहना चाहिए. किसी रिश्ते में यदि हम अपना शत-प्रतिशत नहीं देंगें तो हम सदा संदेह में रहेंगें कि दूसरे व्यक्ति ने हमें शत-प्रतिशत दिया है या नहीं. ऐसा प्रत्येक रिश्ते के लिए लागू होता है. अतः हमें ईमानदार रहना चाहिए और सदा सर्वोत्तम प्रयास करना चाहिए.

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Source:  www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना