Archive | August 2015

पंडित और मूर्ख

आदर्श : प्रेम
उप आदर्श : श्रद्धा

एक समय एक अत्यंत ज्ञानी व बुद्धिमान पंडित थे.priest वह सभी शास्त्रों में निपुण थे तथा बहुत ही आध्यात्मिक व प्रेरणाप्रद व्यक्ति थे. वह विभिन्न समुदायों में जाकर लोगों को शिक्षित करते थे.

एक बार वह एक गाँव में गए जहाँ उन्हें एक सरोवर दिखाने ले जाया गया. सरोवर के बीच एक टापू था जिसपर एक आदमी रहता था. priest2वह आदमी बहुत ही भोला-भाला था और इस कारण बहुत से लोग उसे मूर्ख समझते थे. जब पंडित सरोवर के करीब पहुँचे, तो उन्होंने उस आदमी को भजन गाते सुना, “भज गोविन्दम, भज गोविन्दम, मूढ़मते …..” लेकिन उस मूर्ख का उच्चारण बहुत ही बेकार था. स्पष्ट था कि उसे कुछ ज़्यादा ज्ञान नहीं था.

कुछ देर भजन सुनने के बाद, पुजारी ने सोचा, “हरे राम! इसके भजन से तो मेरे कान दुख रहे हैं. यह तो बहुत सारी गलतियाँ कर रहा है. मुझे इस आदमी की मदद करनी ही होगी.” अतः सहानुभूतिपूर्वक पंडित नाव में बैठे और उस आदमी को सिखाने, उस छोटे से टापू की ओर चल पड़े. टापू पर पहुँचकर पंडित ने उस व्यक्ति से कहा, “नमस्ते जी, मैं आपको भजन सिखाने के लिए आया हूँ.” व्यक्ति ने जवाब दिया, “यह मेरा अहोभाग्य है, श्रीमान! कृप्या मुझे आपको पानी व भोजन परोसने का अवसर दें.”

पूरे तीन दिनों तक पंडित उस व्यक्ति को शिक्षित करते रहे. पंडित ने उसे शास्त्रों का ज्ञान दिया, विभिन्न प्रार्थनाओं का सही उच्चारण सिखाया और उसे आध्यात्मिक तथा सत्य पर आधारित कई कहानियाँ सुनाईं.

तीन दिनों तक इतना सब कुछ सीखने के बाद वह व्यक्ति बहुत खुश था. उसने पंडित से कहा, “श्रीमान, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! भगवान आपको सदा सुखी रखे! मैं आपसे प्रेम करता हूँ.”
और फिर नाव में बैठकर पंडित टापू से रवाना हो गए. जब पंडित नाव में जा रहे थे…….

………….. वह मूर्ख पानी के ऊपर से भागा.priest1

वह भागकर पंडित की नाव में आया और बोला, “श्रीमान, पंडित जी !! मैं एक चीज़ भूल गया. उस एक पंक्ति का क्या उच्चारण था???” हालाँकि पंडित स्तंभित थे कि वह व्यक्ति पानी पर चलकर आया था पर फिर भी किसी तरह से स्वयं को संभालकल उन्होंने जवाब दिया, “आ.. म…इसे कहते हैं………….” पंडित के द्वारा संशोधन करने पर मूर्ख बोला, “अरे हाँ! सही कहा!! हा, हा, हा!!!” और फिर पानी पर चलकर वह टापू वापस लौट गया.

उस व्यक्ति के व्यवहार से पंडित विनम्रता से भर गए. यधपि पंडित बहुत ज्ञानी थे परन्तु टापू पर यह उत्कृष्ट व्यक्ति ……और भी अधिक ज्ञानी था. उसके पास न केवल अशारीरिक शक्तियाँ थीं, बल्कि बहुत ही मधुर निष्ठा भी थी. पंडित ने सोचा, “यह व्यक्ति किसी भी तरह से मूर्ख नहीं है. इस व्यक्ति के समान सच्चे भक्त की तुलना में मैं एक मूर्ख हूँ….

गुरु कहते हैं,

वास्तविकता जानने से ही, हम सही मायने में सच्चे पंडित बनते हैं.

  सीख:
भगवान भक्त का ज्ञान व शाश्त्रों और प्रार्थनाओं में प्रवीणता नहीं बल्कि भक्त का प्रेम, सच्चाई व विनम्रता देखते हैं. प्रार्थनाओं का अभ्यास व बुद्धि का एक मात्र उद्देश्य स्वयं को रूपांतर करना तथा एक पवित्र व करुणामय हदृय का विकास करना है.

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अनुवादक- अर्चना

पंख की कहानी

एक दिन एक लड़के ने अपने सहपाठी के बारे में झूठी व प्रतिकूल अफ़वाह फैलाई.rumor वह लड़का धर्म से ईसाई था और हर रविवार गिरजाघर जाता था. इस कारण उसे मालूम था कि गिरजाघर में अपराध-स्वीकरण के लिए एक बॉक्स होता है,rumor3 जहाँ लोग पादरी को अपनी गलतियों के बारे में बताकर भगवान से क्षमा माँग सकते थे. इस लड़के को अहसास हुआ कि उसने अपने सहपाठी के बारे में अफ़वाह फैलाकर उसे काफी दुःख पहुँचाया था.rumor1

गिरजाघर में एक दयालु पादरी थे जो बच्चों को उनकी परेशानियों में मदद करते थे.rumor4 जब इस लड़के ने पादरी के सामने अपना अपराध-स्वीकरण किया rumor2और उन्हें बताया कि उसने अपने सहपाठी का दिल दुखाया है तब पादरी ने धैर्यपूर्वक उसकी बात सुनी. लड़के के लिए ईश्वर से क्षमा की प्रार्थना करने से पहले, पादरी चाहते थे कि वह बालक अपनी करनी के प्रभाव को समझे. इसलिए पादरी ने लड़के से कहा कि एक दिन जब तेज़ हवा चल रही हो तब वह पंख से भरा थैला लेकर एक पहाड़ी की चोटी पर जाए.rumor5 पादरी ने कहा कि चोटी पर पहुँचकर वह थैला खोलकर सारे पंखों को उड़ने दे.rumor7 फिर अगले दिन पुनः वहाँ जाकर सारे पंखों को एक-एक करके उठाए. पादरी की बात सुनते ही लड़के ने तुरंत जवाब दिया कि प्रत्येक पंख को चुनना असंभव है. तब पादरी ने लड़के को समझाया कि ठीक ऐसा ही अफ़वाह के साथ भी है. एक बार अफ़वाह फ़ैल जाने पर उसे रोकना अत्यंत कठिन होता है और उसे अनकिया भी नहीं किया जा सकता है. लड़के से हानि हो चुकी थी अतः पादरी ने उसे आगाह किया कि भविष्य में उसे बहुत सावधान रहना होगा ताकि दुबारा ऐसा कभी किसी और के साथ न हो.

लड़के ने सबक सीखा और दुबारा कभी भी यह गलती नहीं दोहराई.

सीख:
हमें दूसरों के लिए बुरा नहीं बोलना चाहिए. जब हमें किसी के बारे में तथ्य मालूम नहीं हों, तो हमें झूठी ख़बर कभी नहीं फैलानी चाहिए. इससे बहुत से लोगों की भावनाओं को चोट पहुँच सकती है. ज़ुबान से निकले शब्द कभी वापस नहीं आते हैं. एक बार हुई गलती कभी संवर नहीं सकती. निशान या खरोंच सदा बरकरार रहती है. अतः हमें सदा सोच-समझकर बोलना चाहिए.

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अनुवादक- अर्चना

बिक्री के लिए पिल्ले

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आदर्श : उचित आचरण
       उप आदर्श : सहानुभूति

एक किसान के पास कुछ पिल्ले थे जिन्हें वह बेचना चाहता था. पिल्लों का प्रचार करने के लिए किसान ने एक साईन बोर्ड पर रंग लगाया और उसे अपने बाड़े की सीमा पर गाड़ने के लिए कील ठोकने लगा. जब वह आखिरी कील ठोक रहा था, उसे अपनी पोशाक पर खींचाव महसूस हुआ. किसान ने वहाँ एक नन्हें बालक को खड़ा पाया.

“महाशय,” उसने कहा, “मैं आपका एक पिल्ला खरीदना चाहता हूँ?”
अपनी गर्दन से पसीना पोंछते हुए किसान ने कहा, “आह! यह पिल्ले बहुत बेहतरीन नसल के हैं और बेशकीमती हैं.”

लड़के ने क्षणभर के लिए सिर नीचे किया. और फिर अपनी जेब में से कुछ सिक्के निकालकर किसान को दिखाते हुए बोला, “मेरे पास ३९ सेंट्स हैं. एक झलक देखने के लिए क्या इतने पैसे काफ़ी हैं?”

“अवश्य”, किसान ने उत्तर दिया.
और तब किसान ने एक सीटी बजाई, “अरे डॉली! ” उसने बुलाया.

किसान के बुलाते ही डॉली भागते हुए बाहर आई.puppy3 उसके पीछे-पीछे चार छोटे रोएँ के गोले भी आए. बाड़ की जंज़ीरों के सहारे अपना चेहरा दबाकर, नन्हा लड़का पिल्लों का इंतज़ार कर रहा था. पिल्लों को देखते ही उसकी आँखें खुशी से झूम उठीं.

जैसे ही कुत्ते घेरे तक पहुँचे,नन्हें बालक ने कुत्तों के घर के अंदर कुछ हलचल देखी. आखिरकार लड़के को एक अन्य छोटी-सी गेंद दिखाई दी; यह पिल्ला स्पष्ट रूप से कुछ अधिक छोटा था. puppy4वह रैंप पर फिसला और फिर कुछ बेढ़ंगे तरह से लंगड़ाकर अन्य पिल्लों की ओर चलने लगा.

“मुझे वह पिल्ला चाहिए” , छोटू की तरफ इशारा करते हुए नन्हें बालक ने कहा.
किसान लड़के के बगल में घुटने के बल बैठकर बोला, “बेटा, तुम वह पिल्ला मत लो. इन अन्य कुत्तों के समान वह तुम्हारे साथ कभी भी भाग व खेल नहीं पाएगा.”

किसान के ऐसा बोलते ही लड़का बाड़ से पीछे हटा, नीचे झुका और अपनी पैंट एक तरफ से ऊपर उठाने लगा. किसान ने देखा कि लड़के की दोनों टांगें एक स्टील के घेरे में थीं. यह स्टील का घेरा एक विशेष रूप से बने जूते से जूड़ा हुआ था.puppy5 किसान की तरफ देखकर नन्हा लड़का बोला,     “देखिये महाशय, मैं खुद भी बहुत अच्छे से भाग नहीं पाता हूँ. उस पिल्ले को कोई ऐसा चाहिए होगा जो उसे समझ सके.”puppy6

सीख :
हमारा रवैया हमदर्दी का होना चाहिए. संसार में बहुत सारे लोग हैं जिन्हें ऐसे लोगों की ज़रुरत है जो उन्हें समझ सकें. ऐसे लोगों के प्रति विचारशील व उदार भाव, उन्हें उनका स्वाभिमान व आत्मविश्वास पुनः हासिल करने में मदद करेगा.

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अनुवादक- अर्चना

सबके साथ अच्छा व्यवहार करो, सबसे प्रेम करो

आदर्श : प्रेम
 उप आदर्श : अनुकम्पा

बहुत समय पहले, सैमी नाम का एक छोटा लड़का था. सैमी हर तरह से एक अच्छा बच्चा था- वह पढ़ाई में अच्छा था,sammy1अपने माता-पिता का आज्ञाकारी था, अपनी कक्षा के बहुत से अन्य बच्चों से अधिक बुद्धिमान था sammy2 और सबके प्रति दयालु था. छोटे-बड़े सभी सैमी से बेहद प्यार करते थे. इस कारण कुछ अन्य लड़के, जो सैमी की तरह सबसे प्यार पाना चाहते थे, सैमी से नफरत करते थे.

सैमी की कक्षा में टिम्मी नाम का एक लड़का पढ़ता था. सैमी के विपरीतsammy3, वह पढ़ाई में अच्छा नहीं था और स्कूल के दौरान सदा खेलना पसंद करता था. वह अपने माता-पिता के साथ बुरा व्यवहार करता था, अपने सहपाठियों को धौंस दिखाता था sammy5और सैमी के साथ भी दुर्व्यवहार करता था. कक्षा में अन्य बच्चों के सामने वह हमेशा सैमी को नीचा दिखाने की       कोशिश करता था. पर उसकी हर कोशिश के बावजूद, सैमी के ग्रेड निरंतर बेहतर होते गए. सैमी को सभी तरफ- पढ़ाई, खेल-कूद sammy4तथा अपने सहपाठियों, से शाबाशी मिलनी जारी रही.

सैमी के माता-पिता ने सैमी को उसके आँठवे जन्मदिन पर एक ख़ूबसूरत कलम तोहफ़े में दीsammy6. सैमी अपनी नई कलम स्कूल लेकर आया ताकि वह कक्षा में उससे लिख सके.यह एक अत्यंत सुन्दर कलम थी और बहुत तेज़ लिखने में मदद करती थी. जब टिम्मी ने कलम देखी तो उसे सैमी से और अधिक ईर्ष्या हुई.

उसने सैमी से पूछा, “अरे! तुम्हें यह कहाँ से मिली? तुमने यह कलम खरीदी है?”
“मेरे माता-पिता ने मुझे यह मेरे जन्मदिन पर उपहार में दी है,” सैमी ने उत्तर दिया.

टिम्मी भीषण गुस्से व जलन से बेहाल हो गया.sammy7 चूँकि वह एक शरारती बच्चा था, उसे अपने माता-पिता से उपहार कभी-कभार ही मिलते थे. उसने सैमी की कलम चुराने का निश्चय किया. मध्यावकाश के दौरान जब सारे बच्चे कक्षा से बाहर गए तब टिम्मी ने सैमी के बस्ते में से कलम निकाल ली. कलम को अपने बस्ते में छुपाकर वह टिफ़िन खाने चला गया.

जब सैमी वापस आया और उसे अपनी कलम नहीं मिली तो उसने इस बारे में अध्यापक को बताया. लापता कलम के लिए तलाश शुरू हुई sammy8और कक्षा अध्यापक ने कक्षा के मॉनिटर को सबके बस्तों की तलाशी लेने का आदेश दिया. जल्द ही, टिम्मी के बस्ते में से लापता कलम मिल गई. क्रोधित अध्यापक ने टिम्मी से पूछा, “अब तुम्हें इस बारे में क्या कहना है?”
टिम्मी की आँखें भर आईं और उसके पास कहने को कुछ नहीं था.sammy9

टिम्मी को रोते देखकर सैमी को उसपर दया आई. सैमी एक उदार लड़का था और अपने सहपाठी के प्रति उसके मन में कोई बुरा भाव नहीं था. सैमी ने अध्यापक से आग्रह किया कि अब जब कलम मिल गई है तो वह टिम्मी को सज़ा न सुनाएँ.

टिम्मी को अहसास हुआ कि सैमी कितना अच्छा लड़का था और उसने अपने अध्यापक तथा सैमी से क्षमा माँगी. उस दिन से वह सैमी का दोस्त बन गया और धीरे-धीरे उसने स्वयं को सैमी के समान अच्छा बना लिया.sammy10 सभी टिम्मी से भी प्यार करने लगे और सैमी को अपने नए दोस्त पर गर्व था.

चोट पहुँचने के बावजूद सैमी ने बदले में केवल प्यार ही दिया. अपने दुश्मनों से भी हमें इसी प्रकार पेश आना चाहिए. क्या पता हमारे व्यवहार से किसी में अच्छे के लिए बदलाव आ जाए?

सीख :

हमें सबके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए. यदि कोई हमें हानि भी पहुँचाए तो भी हमें उन्हें हानि नहीं पहुँचानी चाहिए.

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अनुवादक- अर्चना