अपने मालिक/ गुरु/ प्रभु के चरणों में समर्पण

                आदर्श : प्रेम    

           उप आदर्श : विश्वास, श्रद्धा

एक समय की बात है कि एक तालाब में बहुत-सी मछलियाँ रहतीं थीं. fishहर सुबह मछुआरे का जाल उनका सबसे बड़ा भय होता था.fish2 मछुआरा हर सुबह नियम से जाल डालने आया करता था और लगभग हर बार, ढेर सारी मछलियाँ उसके जाल में फँस जाती थीं. fish3कुछ मछलियाँ अचानक ही पकड़ी जाती थीं. कुछ सोते हुए फँस जाती थीं. कुछ इसलिए फँस जाती थीं क्योंकि उनको छुपने की जगह नहीं मिलती थी और कुछ अन्य जानलेवा जाल से खतरे के बारे में जानने के बावजूद भी उस जाल से बचने का उपाय नहीं ढूँढ़ पाती थीं. उन मछलियों में, एक युवा मछली थी जो सदा प्रसन्न रहती थी. fish5उसे मछुआरे के जाल का कोई डर नहीं था. ऐसा प्रतीत होता था कि उसने जीवित तथा उत्साहपूर्ण रहने की कला पर निपुणता हासिल कर ली थी. सभी ज्येष्ठ मछलियों को इस छोटी मछली के रहस्य पर ताजुब होता था. सभी आश्चर्य में थे कि जहाँ उन सब का संचयी अनुभव व बुद्धिमत्ता भी जाल से बचने के लिए पर्याप्त नहीं है वहाँ वह छोटी मछली इतना ठोस और आसान तरीका कैसे निकाल लेती है. अपनी जिज्ञासा शांत करने तथा जाल से बचने का तरीका ढूँढ़ने के लिए, एक शाम, सभी मछलियाँ इस छोटी मछली के पास गईं. “अरे छोटी! हम सब यहाँ तुमसे बात करने आए हैं.” “मेरे से!? छोटी मछली ने कहा, “आप सब मुझसे क्या बात करना चाहते हैं?” “दरसल हम सब तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं. कल सुबह मछुआरा पुनः आएगा. तुम्हें जाल में पकड़े जाने का डर नहीं है?” छोटी मछली मुस्कुराई, “नहीं! मैं जाल में कभी नहीं पकड़ी जाऊँगी!” “हमें भी अपने दृढ़ विश्वास तथा सफलता का रहस्य बताओ” , सभी बड़ों ने निवेदन किया. “बहुत सरल है, ” छोटी मछली ने कहा. “जब मछुआरा अपना जाल डालने आता है तब मैं झटपट दौड़कर उसके पैरों में ठहर जाती हूँ.

fish6वही एक ऐसी जगह है जहाँ मछुआरे के लाख चाहने पर भी वह वहाँ नहीं पहुँच सकता. इसलिए मैं कभी नहीं पकड़ी जाती हूँ.” छोटी मछली के समझ की सहजता पर सभी मछलियाँ आश्चर्यचकित थीं.    

            सीख :

हमें भगवान या अपने गुरु में सम्पूर्ण विश्वास रखना चाहिए. अगर हम भगवान को अपना गुरु मानते हैं तो हमें भगवान में पूरा भरोसा व निष्ठा रखनी चाहिए. हम जो भी करते हैं उसमें हमें सर्वोत्तम कोशिश करनी चाहिए तथा शेष भगवान पर छोड़कर उनकी शरण में रहना चाहिए. तब भगवान हमारा ध्यान रखते हैं और वह करते हैं जो हमारे लिए सही है. ऐसी परिस्थिति में हम जीवन की परीक्षाओं को बेहतर सम्बोधित कर पाने में सफल रहते हैं.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s