मगरमच्छ और पुजारी

आदर्श : सत्य
उप आदर्श : एकात्मकता

यह एक मगरमच्छ की कहानी है जो हर सुबह बहुत ही विचित्र बर्ताव करता था. उसका व्यवहार अन्य मगरमच्छों से काफी अलग था. वह हर रोज़ सूर्योदय से पहले, निष्ठापूर्वक अपनी साधना का अभ्यास करता था.croc6

तुम्हें पता है कि साधना क्या होती है? साधना तुम्हारा आध्यात्मिक अभ्यास है. साधना के अंतर्गत तुम हर रोज़ भगवान को याद करते हो. भगवान का ध्यान करने के लिए तुम क्या करते हो?

यह मगरमच्छ बहुत ही होशियार था. उसे मालूम था कि सूर्योदय से पहले का समय ईश्वर का मनन करने के लिए सर्वोत्तम होता है. इसलिए हर सुबह अपने शरीर का व्यायाम करने के लिए वह काफी लंबा तैरता था.croc3 तत्पश्चात पूरी श्रद्धा से भगवान की पूजा-अर्चना करता था. वह अपना प्रत्येक दिन साधना से आरम्भ करता था. साधना के उपरान्त वह पौष्टिक भोजन करता था जिससे उसे दिनभर के लिए शक्ति मिल सके. एक सुबह एक प्रसिद्द पुजारी वहाँ से गुज़रे.

पुजारी ने मगरमच्छ को साधना करते हुए देखा. उन्होंने मगरमच्छ से पूछा, “अरे घड़ियाल!…..तुम क्या कर रहे हो??? तुम एक पशु होने पर भी प्रतिदिन पूजा-पाठ करते हो. क्यों? इसका तुम्हें क्या लाभ है?”croc1
मगरमच्छ ने उत्तर दिया, “आपने ठीक कहा कि मैं एक पशु हूँ….परन्तु…..मैं भगवान को महसूस करना चाहता हूँ; इसलिए मैं हर रोज़ साधना का अभ्यास करता हूँ.”
“पर इसका कोई फायदा नहीं है, ” पुजारी ने कहा.
“क्यों नहीं?” , मगरमच्छ ने पूछा.
पुजारी ने उत्तर दिया, “तुम भगवान को महसूस नहीं कर सकते. तुम तो केवल एक मगरमच्छ हो. तुम्हें मानव शरीर में पुनर्जन्म का इंतज़ार करना पड़ेगा! ”
मगरमच्छ ने निडरता से उत्तर दिया, ” मगर…..मेरी सोच से तो आप मूर्ख हैं. आप पुजारी की तरह दिखते ज़रूर हैं पर आपको तो मूलभूत बातें भी नहीं पता हैं. जिस भगवान ने आपको रचा है, उसी भगवान ने मुझे भी बनाया है.”

मगरमच्छ की बात सुनकर पुजारी आश्चर्यचकित थे कि वह इतना समझदार कैसे था.

मगरमच्छ ने आगे कहा, “अगर मैं प्रतिदिन भगवान को याद करूँगा और उनका ध्यान करूँगा तो संभवतः मैं भगवान को अनुभव कर सकता हूँ. पर अगर आप कोई भी साधना नहीं करेंगें तब तो भगवान को महसूस करने की ज़रा भी संभावना नहीं है. वास्तव में, आप अपने अगले जन्म में मगरमच्छ बन जायेंगें.”

पुजारी ने उत्तर दिया, “मैं? मगरमच्छ?? तुम्हें इतना मूर्खतापूर्ण विचार कहाँ से आया?” अचानक, अरे !!! पुजारी उसी क्षण मगरमच्छ में बदल गए . अब वहाँ पर दो मगरमच्छ पास-पास बैठे हुए थे.croc2
मगरमच्छ ने पुजारी से पूछा, “तो….अब आपको कैसा लग रहा है?”
पुजारी हक्के-बक्के थे.
पुजारी ने कहा, “तुम्हें कैसे मालूम था कि मैं मगरमच्छ में बदल जाऊँगा?”
मगरमच्छ ने उत्तर दिया, “हालाँकि मैं एक मगरमच्छ हूँ पर मैं धार्मिक जीवन व्यतीत करता हूँ. दूसरी ओर, यद्यपि आप पुजारी दिखते हैं पर व्यवहार मगरमच्छ के समान करते हैं.”

पुजारी ने भले ही सोचा था कि वह मगरमच्छ से बेहतर हैं पर वास्तव में, हम सब की रचना एक ही ईश्वर ने की है.
तुम जो भी हो, ऐसा कभी मत सोचो कि तुम दूसरों से अधिक श्रेष्ठ हो.

सीख:

गुरु नानक ने कहा है, “सच्चाई महान है लेकिन सच्चाई में जीना उससे भी महान है.”
साधना व रोज़ाना मनन सच्चाई से जीने में हमारी मदद करते हैं.
गहरी श्वास लेते रहें और सदा याद रखें : हम सब एक हैं.

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http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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