ख़ुशी अंदर से आती है

happiness

 आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श : सही प्रवृत्ति

एक जैन महंत एक छोटे से गाँव में गए. सभी ग्राम वासी उनके आस-पास इकट्ठे हो गए happiness1और उन्होंने महंत के समक्ष अपनी फरियादें रखीं, ‘हमें हमारी परेशानियों से छुटकारा पाने में कृपया मदद कीजिए; हमारा जीवन खुशियों से तब भरेगा जब हमारी इच्छाएँ पूर्ण होंगीं.’

महंत ने चुपचाप सबकी बातें सुनीं. अगले दिन उन्होंने चुपके से एक दिव्यवाणी के रूप में घोषणा की- ‘इस गाँव में कल दोपहर एक चमत्कार होने वाला है. सभी गाँव वासी अपनी सारी समस्याएँ एक काल्पनिक बोरी में बाँध लें और उसे नदी के उस पार ले जाकर छोड़ दें. फिर, उसी काल्पनिक बोरी में वह सब डाल लें जो आपको चाहिए….सोना, आभूषण, अन्न…और उसे अपने घर ले आयें. ऐसा करने से आपकी समस्त इच्छाएँ पूरी हो जायेंगीं.’

गाँववाले संदेह में थे कि यह आकाशवाणी सत्य है या झूठ. हालाँकि आकाशवाणी सुनकर गाँववाले हक्के-बक्के थे परन्तु…..उन्होंने सोचा कि हिदायत का पालन करने में कोई हानि नहीं है. अगर देववाणी सच है तो जो वह चाहते हैं, वह उन्हें वास्तव में मिल जाएगा और अगर देववाणी झूठी है तब भी कोई अंतर नहीं पड़ेगा. अतः उन्होंने घोषणा का पालन करने का निश्चय किया.

अगली दोपहर, सबने अपनी मुसीबतें एक काल्पनिक बोरी में बाँधीं,happiness2 उन्हें नदी के उस पार छोड़ा और वह सब ले आए जो उनकी सोच के अनुसार उन्हें ख़ुशी देने वाला था….सोना, गाड़ी, घर, आभूषण, हीरे.happiness3

गाँव वापस लौटने पर सभी भौंचक्के थे. आकाशवाणी सच साबित हुई थी. जिस व्यक्ति को गाड़ी चाहिए थी, उसके घर के आगे गाड़ी खड़ी थी.happiness4 जिसने आलीशान घर की कामना की थी, उसने देखा कि उसका घर एक शानदार घर में बदल गया था. happiness5सब अत्यंत खुश थे. उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

पर आह! हर्ष व उल्लास कुछ समय तक ही कायम रह पाया. जल्द ही सब अपनी तुलना अपने पड़ोसियों से करने लगे. सब महसूस करने लगे कि उनके बगल वाला उनसे अधिक प्रसन्न व धनी था. अतः दूसरों के बारे में और अधिक जानने के लिए सब आपस में बात करने लगे.happiness6 इस व्यवहार से सबको पछतावा होने लगा. ‘मैंने एक साधारण सोने की चेन की माँग की थी परन्तु पड़ोस की लड़की ने आकर्षक सोने के हार माँगा था और उसे वह मिल गया! मैंने केवल एक मकान की माँग की थी पर सामने के घर में रहने वाले व्यक्ति ने हवेली माँगी थी. हमें भी ऐसी वस्तुओं की माँग करनी चाहिए थी! यह एक अनोखा व सुनहरा मौक़ा था परन्तु हमने अपनी मूर्खता के कारण इसे गवाँ दिया.’

सबके मन में इस प्रकार के विचार थे. इसलिए सभी गाँववाले एक बार पुनः महंत के पास गए और उनके समक्ष अपनी परेशानियों का ढेर लगा दिया. इस तरह सारा गाँव एक बार फिर निराशा व असंतोष में डूब गया.

 सीख :

प्रायः लोगों को लगता है कि परेशानी में वह खुश नहीं रह सकते. पर हमें अपनी खुशियों को परेशानियों से नहीं जोड़ना चाहिए. समस्याऐं हर किसी के जीवन में हैं. हमें स्वयं से इस प्रकार कहना चाहिए, “समस्याओं को एक तरफ करके मैं खुश रहूँगा.’ और प्रसन्न रहना चाहिए. इसका यह अर्थ नहीं है कि हमें समस्याओं का हल नहीं सोचना चाहिए.

भगवान कृष्ण से अधिक मुसीबतों का सामना और कौन कर सकता है? कृष्ण के मामा तो उनके जन्म के पहले से ही उन्हें मारने का षड्यंत्र रच रहे थे. महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे. परन्तु कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध के ठीक पहले अर्जुन ने अपना कवच त्यागकर, लड़ने से इंकार करके कई समस्याएँ उत्पन्न कीं थीं. प्रत्येक दिन विभिन्न प्रकार की समस्याओं से भरा होता था. इसके बावजूद, कृष्ण के चेहरे पर सदा आनंदित मुस्कान रहती थी.

भगवान कृष्ण happiness8ने भगवत गीता में आगे बताया है, “दुःख व ख़ुशी को एक समान देखना सीखो. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों से सीख लेने की कोशिश करोगे तो स्पष्टता उभर कर आएगी. और यह स्पष्टता परमानंद लाएगी.”

जीवन में हमारा रवैया सबसे महत्वपूर्ण है. खुशी बाह्य वस्तुओं में नहीं है.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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