तुम जो हो उससे अंतर पड़ता है- मिसेज़ थॉम्पसन

teddy1

                 आदर्श : प्रेम
            उप आदर्श : सहानुभूति

स्कूल के प्रथम दिन जब वह अपनी पाँचवी कक्षा के सामने खड़ीं थीं तो उन्होंने एक झूठ कहा. अन्य सभी शिक्षकों के समान, उन्होंने अपने विद्यार्थियों की ओर देखा और कहा कि वह उन सबसे एक समान प्यार करतीं हैं. परन्तु यह असंभव था क्योंकि पहली पंक्ति में टेडी स्टॉलर्ड नामक नन्हा बालक कंधे झुकाए बैठा हुआ था.teddy2

टेडी की तीसरी कक्षा की अध्यापिका ने लिखा था, “इसकी माँ के निधन का इसपर गहरा असर पड़ा है. वह अपनी ओर से अच्छा करने की कोशिश करता है पर उसके पिता उसके कार्य में विशेष रुचि नहीं दिखाते हैं. अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो इसके पारिवारिक जीवन का इसपर हानिकारक असर पड़ेगा.”

टेडी की चौथी कक्षा की अध्यापिका ने लिखा था, “टेडी अकेला है और स्कूल में विशेष रुचि नहीं दिखाता है. उसके बहुत सारे दोस्त नहीं हैं और कभी-कभी वह कक्षा में सो जाता है.”teddy3

मिसेज़ थॉम्पसन अब तक समस्या समझ चुकी थीं और वह अपने आप पर शर्मिंदा थीं. टेडी के अतिरिक्त जब अन्य सभी विद्यार्थी उनके लिए चमकीले कागज़ व ख़ूबसूरत फीते से लिपटे क्रिसमस के उपहार लाते थे तो उन्हें और भी बुरा महसूस होता था. टेडी का तोहफा एक मोटे भूरे रंग के कागज़ से बेढ़ंगे तरीके से लिपटा होता था जो उसने किराने के बैग से लिया था.अन्य उपहारों के बीच मिसेज़ थॉम्पसन ने टेडी का तोहफा बहुत सावधानी से खोला. तोहफे में बिल्लौरी पत्थर का एक कंगन था जिसके कुछ पत्थर गायब थे और इत्र की एक बोतल थी जो एक-चौथाई ही भरी हुई थी. इसको देखकर कुछ छात्र हँसने लगे. पर उन्होंने बच्चों की हँसी को दबा दिया जब उन्होंने आश्चर्यता से कहा कि कंगन बहुत सुन्दर हैं और थोड़ा सा इत्र अपनी कलाई पर लगाया.

उस दिन स्कूल ख़त्म होने के बाद टेडी स्टॉलर्ड ने कहा, “मिसेज़ थॉम्पसन, आज आप बिलकुल मेरी माँ के जैसे महक रहीं थीं.” सभी बच्चों के जाने के बाद, वह कम से कम एक घंटे तक रोतीं रहीं.

उस दिन से उन्होंने पढ़ाना, लिखाना और अंकगणित पढ़ाना छोड़ दिया. इसके बदले उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. मिसेज़ थॉम्पसन ने टेडी पर विशेष ध्यान दिया. जैसे-जैसे उन्होंने टेडी के साथ काम करना शुरू किया, उसका दिमाग पुनः जागा और वह जितना उसे प्रोत्साहित करतीं, उतनी ही जल्दी वह प्रत्योत्तर देने लगा. साल के अंत तक टेडी कक्षा के सबसे चतुर छात्रों में से एक बन गया teddy5और मिसेज़ थॉम्पसन के झूठ, कि वह सबसे एक समान प्रेम करेंगीं, के बावजूद टेडी उनका ‘शिक्षक का मनपसंद’ बन गया.

एक साल बाद, उन्हें अपने दरवाज़े के नीचे टेडी से एक नोट मिला. उसमें लिखा था कि ज़िन्दगी में मिलीं सारी अध्यापिकाओं में वह सबसे अच्छी अध्यापिका थीं.

छह वर्ष बीत जाने पर उन्हें टेडी से एक और नोट मिला. उसमें लिखा था कि उसने उच्च विद्यालय ख़त्म कर लिया है, वह कक्षा में तृतीय स्थान पर रहा और मिसेज़ थॉम्पसन अभी भी उसके जीवन की सबसे अच्छी अध्यापिका थीं.

उसके चार साल बाद उन्हें एक और चिट्ठी मिली. उसमें लिखा था कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी है और शीघ्र ही वह सबसे उत्कृष्ट अॉनर्स के साथ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट बनेगा. teddy6उसने मिसेज़ थॉम्पसन को विश्वास दिलाया कि वह अभी भी उसकी सबसे अच्छी व मनपसंद अध्यापिका थीं.

फिर चार साल और बीत गए और एक बार फिर एक चिट्ठी आई. इस बार उसने बताया कि स्नातक की डिग्री हासिल करने बाद उसने आगे पढ़ाई जारी रखने का निश्चय किया. चिट्ठी में टेडी ने स्पष्ट किया कि मिसेज़ थॉम्पसन अभी भी उसकी सबसे अच्छी व मनपसंद अध्यापिका थीं. पर अब उसका नाम कुछ अधिक लम्बा था…चिट्ठी में हस्ताक्षर थे, थिओडोर ऍफ़. स्टॉलर्ड, एम. डी.

कहानी यहीं समाप्त नहीं हुई. बसंत के महीने में एक और चिट्ठी आई. टेडी ने कहा कि वह एक लड़की को मिला था और उससे शादी करने वाला है. उसने आगे लिखा कि उसके पिता की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी. अतः उसने मिसेज़ थॉम्पसन से पूछा कि शादी में जो स्थान आमतौर पर दूल्हे की माँ का होता है, वहाँ पर क्या वह बैठने के लिए सहमत होंगीं?

अवश्य ही मिसेज़ थॉम्पसन ने ऐसा ही किया. और उन्होंने वह कंगन पहना जिसके अनेकों बिल्लौरी पत्थर गायब थे. इसके अलावा, उन्होंने वह इत्र भी लगाया जो टेडी की माँ ने उनके एक साथ मनाई आखिरी क्रिसमस पर लगाया था.

दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और डॉ स्टॉलर्ड ने मिसेज़ थॉम्पसन के कान में फुसफुसाया, “मुझमें विश्वास करने के लिए धन्यवाद, मिसेज़ थॉम्पसन. मुझे महत्त्वपूर्ण महसूस कराने के लिए और यह दिखाने के लिए कि मैं बदलाव ला सकता हूँ, बहुत धन्यवाद.”

आँखों में आँसू लिए, मिसेज़ थॉम्पसन वापस फुसफुसाईं. उन्होंने कहा, “टेडी तुम गलत कह रहे हो. वो तुम थे जिसने मुझे सिखाया कि मैं अंतर ला सकती हूँ. तुमसे मिलने के पहले तो मुझे पढ़ाना आता ही नहीं था.”

  सीख :

यह कहना बहुत मुश्किल है कि तुम्हारे कार्यों का किसी और की ज़िन्दगी पर क्या असर पड़ेगा. जीवन में कृपया इस बात का ध्यान रखें और किसी अन्य के जीवन में बदलाव लाने का आज से ही प्रयास करें. फरिश्तों में विश्वास करें और फिर किसी अन्य के लिए फरिश्ता बनकर मदद लौटाएं.

“कोई भी काम छोटा नहीं होता है. मानवता के सुधार के लिए किये गए हर श्रम की प्रतिष्ठा व महत्ता होती है. अतः उसे उत्कृष्टता से निभाना चाहिए” – मार्टिन लूथर किंग, जूनियर

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s