मानवता को बचाने के लिए तीन दौड़ें

आदर्श : उचित आचरण
  उप आदर्श : दूसरों के लिए सहानुभूति

एक प्राचीन नीतिकथा हमें एक हृष्ट-पुष्ट लड़के की कहानी बताती है जो सफलता का भूखा था. raceउसके लिए जीतना ही सब कुछ था और वह सफलता को परिणामों से तोलता था.

एक दिन वह लड़का अपने निवासी गाँव में दो अन्य लड़कों के साथ भागने की प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था.race1 इस खेल सम्बन्धी नज़ारे को देखने बहुत से लोग एकत्रित हुए. इनमें ख़ास एक वृद्ध व बुद्धिमान व्यक्ति थे जो इस लड़के के बारे में सुनकर बहुत दूर से आए थे .race5

दौड़ शुरू हुई. लगभग अंतिम चरण तक तीनों प्रतियोगी बराबर थे परन्तु फिर छोटे लड़के ने अपना इरादा और पक्का किया और वह ज़्यादा दृढ़ता, ताकत एवं शक्ति से भागा. अंत में उसने प्रतियोगिता जीत ली.

जनता अति आनंदित व उत्साहित थी और सबने लड़के की तरफ हाथ से इशारा किया. परन्तु वह ज्ञानी व्यक्ति शांत व स्थिर रहे और उन्होंने कोई भी भावना व्यक्त नहीं की. वह छोटा लड़का बहुत महत्वपूर्ण व गर्वान्वित महसूस कर रहा था.

दूसरी प्रतियोगिता की घोषणा हुई और उस लड़के के साथ भागने के लिए दो अन्य जवान व दुरूस्त दावेदार आगे आए. दौड़ आरम्भ हुई और निःसंदेह वह छोटा लड़का एक बार फिर प्रथम आया. सभी लोग बहुत खुश थे और सबने उस लड़के की ओर संकेत करते हुए उसे प्रोत्साहित किया. एक बार फिर ज्ञानी व्यक्ति ने कोई भी मनोभाव व्यक्त नहीं किया और वह शांत व निश्चल थे. वह लड़का मगर महत्वपूर्ण व गर्वित महसूस कर रहा था.

“एक और दौड़, एक और दौड़” , नन्हें बालक ने निवेदन किया. वृद्ध व ज्ञानी व्यक्त आगे आए और उन्होंने दो नए दावेदार प्रस्तुत किए – एक वयोवृद्ध निर्बल महिला race3और एक अंधा आदमी. race2“यह क्या है?” नन्हें बालक ने प्रश्न किया. “यह कोई प्रतियोगिता नहीं है, ” उसने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा. “दौड़ो !” ज्ञानी व्यक्ति ने कहा. प्रतियोगिता शुरू हुई और केवल वह लड़का ही दौड़ पूरी कर पाया. दूसरे दो दावेदार शुरूआत की रेखा पर ही खड़े थे. छोटा लड़का अत्यंत प्रसन्न था और उसने खुशी से अपनी बाहें ऊपर उठाईं. एकत्रित भीड़ मगर शांत थी और लोगों ने लड़के के प्रति कोई भावना व्यक्त नहीं की.

“क्या हो गया? लोग मेरी सफलता में क्यों नहीं शामिल हो रहे हैं? उसने ज्ञानी व्यक्ति से पूछा. “दुबारा दौड़ो, ” बुद्धिमान व्यक्ति ने उत्तर दिया. “इस बार दौड़ एक साथ ख़त्म करना. तुम तीनों एक साथ दौड़ना” , ज्ञानी पुरुष ने कहा. नन्हें लड़के ने क्षणभर सोचा और अंधे व्यक्ति व कमज़ोर वृद्ध औरत के बीच खड़े होकर, दोनों दावेदारों का हाथ पकड़ लिया. दौड़ शुरू हुई और छोटा लड़का आखिरी स्थान तक धीरे-धीरे चला और तीनों ने एक साथ दौड़ पूरी की. जनता अति आनंदित थी और सबने लड़के की ओर संकेत करते हुए उसे प्रोत्साहित किया. race4ज्ञानी व्यक्ति मुस्कुराये ओर उन्होंने हल्के से सिर हिलाया. नन्हें लड़के को गर्व व शान महसूस हुई.

लड़के ने वृद्ध व्यक्ति से पूछा, “मुझे समझ नहीं आया! यह भीड़ किसके लिए जयजयकार कर रही है?” ज्ञानी व वृद्ध व्यक्ति ने नन्हें लड़के की आँखों में देखा, उसके कंधों पर अपना हाथ रखा ओर मृदुलता से जवाब दिया, “बेटा, तुमने इस दौड़ में अब तक की किसी भी अन्य दौड़ से कहीं अधिक जीता है. इस दौड़ में जनता किसी एक विजेता के लिए जयजयकार नहीं कर रही है.”

मानवता के लिए अगला विकासमूलक कदम मानव से विनम्रता है.

सीख:

       जीतना अच्छा है पर दूसरों के साथ जीतना सबसे अच्छा है.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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