बारिश में बचाना

            आदर्श : प्रेम

       उप आदर्श : निस्स्वार्थ सेवा

एक रात, ११:३० बजे, एक बुज़ुर्ग अफ़्रीकी अमरीकी महिला एक राजमार्ग के किनारे खड़ी हुईं थीं. वह प्रचूर वर्षा-तूफ़ान को सहने की कोशिश कर रहीं थीं.rain2 उनकी गाड़ी खराब हो गई थी और उन्हें मदद की सख्त ज़रुरत थी. बुरी तरह भीगे हुए, उन्होंने अगली गाड़ी को रोककर मदद माँगने का निश्चय किया. rain1एक जवान गोरा आदमी उनकी सहायता के लिए रूका.rain4 ऐसा १९६० के संघर्ष ग्रस्त ज़माने में असाधारण था. वह व्यक्ति उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया, उन्हें सहायता दिलवाने में मदद की और उन्हें एक टैक्सी में बैठा दिया.

वह महिला काफ़ी जलबाज़ी में लग रहीं थीं पर फिर भी उस व्यक्ति का ठिकाना लिखकर उन्होंने उसका धन्यवाद दिया. सात दिन बीत गए और उस व्यक्ति के दरवाज़े पर खटखटाहट हुई. उसे आश्चर्य हुआ जब एक विशाल रंगीन टेलीविज़न उसके घर पहुँचाया गया. rain5उसपर एक विशेष टिप्पणी लगी हुई थी.

उस पर लिखा था, “उस रात राजमार्ग पर मेरी सहायता करने के लिए तुम्हारा अत्यधिक धन्यवाद. बारिश ने न सिर्फ मेरे कपड़े परन्तु मेरे उत्साह को भी भिगो दिया था. फिर तुम आए. तुम्हारे कारण मैं अपने, अंतिम सासें ले रहे, पति के पास पहुँच पाई – ठीक उनकी मृत्यु से पहले…..मेरी सहायता तथा दूसरों की निस्स्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए भगवान तुम्हें सदा सुखी रखें.”

 सीख :
दूसरों की बिना किसी अपेक्षा सेवा करो. जब तुम किसी की मदद करोगे या किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट ला पाओगे तो तुम्हें अत्यंत ख़ुशी होगी.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक- अर्चना

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