महाशिवरात्रि

maha-shivaratri

महाशिवरात्रि का पर्व महादेव शिव, जो हिन्दुओं के त्रिदेवों में से एक हैं, के मान-सम्मान में भक्ति व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है. महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के सबसे प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और हिन्दू तालिका के अनुसार इसे माघ मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है. महाशिवरात्रि का यथाशब्द अर्थ है ‘शिव की महान रात’ और इसे मुख्यतः भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है.

महाशिवरात्रि से अनेक मनोरंजक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं. इनमें सर्वाधिक लोकप्रिय कहानी के अनुसार, शिवरात्रि की रात शिव व पार्वती का विवाह हुआ था. कुछ विद्वानों का मानना है कि शिवरात्रि की मांगलिक रात को भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था- यह नृत्य सृष्टि, संरक्षण तथा विनाश का मुख्य मौलिक नृत्य है. लिंग पुराण में चर्चित एक अन्य अनुश्रुति के अनुसार शिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव, लिंग के रूप में व्यक्त हुए थे.shivarati6 एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का सेवन करके भगवान शिव ने संसार को विनाश से बचाया था. विष को अपने गले में धारण करने के परिणामस्वरूप शिव का कंठ नीला पड़ गया था और इसके बाद से महादेव को “नीलकंठ” भी कहा जाता है. अतः शिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों द्वारा अत्यंत शुभ माना जाता है और वे इसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं.

शिवरात्रि के पावन अवसर पर लोग निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महादेव के दिव्य नाम का भजन करते हैंshivaratri5 तथा शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. शिवलिंग पर बेल पत्ते, पानी तथा दूध अर्पण किया जाता है क्योंकि ये महादेव के मनभावन माने जाते हैं. shivaratri3shivaratri4शिव भक्त भगवान शिव के परमपावन पंचाक्षर मन्त्र “ओम नमः शिवाय” का निरंतर जाप करते हैं. इसके अतिरिक्त, शिवरात्रि की रात ‘महा मृत्युंजय’ के सशक्त तथा प्राचीन संस्कृत मन्त्र का उच्चारण करने की विशेष महत्ता है. शिवरात्रि के अवसर पर प्रत्येक शिव मंदिर को दीपक तथा रंग-बिरंगी सजावटों से अलंकृत किया जाता है. मंदिरों में लोगों का जमघट लगा रहता है और भक्तजन रातभर पूजा करते हैं और प्रभु का ध्यान करते हैं.

महाशिवरात्रि का पर्व सबसे अधिक लोकप्रिय उज्जैन में है, जो भगवान शंकर का निवास स्थान माना जाता है. shivaratri1
भारत के इलावा, नेपाल में भी विश्वभर से हज़ारों हिन्दू प्रख्यात पशुपतिनाथ मंदिर में एकत्रित होते हैं और अत्यधिक श्रद्धा व उल्लास से भगवान शिव की आराधना करते हैं.shivaratri नेपाल के शिव शक्ति पीठम में भी इसी प्रकार से श्रद्धालु बहुत निष्ठा से महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं.

शिवरात्रि का आध्यात्मिक अभिप्राय :

मनुष्य की दस इन्द्रियाँ उसे गलत पथ पर आकर्षित करने की जिम्मेदार होती हैं. शिवरात्रि शब्द में चार अक्षर हैं- शि, व, रा, त्रि. इन चार अक्षरों के अर्थ तथा अंकविद्या में घनिष्ठ सम्बन्ध है. ‘शि’ अंक ५ का प्रतिक है, ‘व’ अंक ४ की ओर संकेत करता है तथा ‘रा’ अंक २ को दर्शाता है. ५+४+२ को जोड़ने ने ११ प्राप्त होता है. ५ कर्मेन्द्रियाँ, ५ ज्ञानेन्द्रियाँ तथा मस्तिष्क का जोड़ ११ होता है और ये ११ रूद्र हैं- एकादश रूद्र. यह एकादश रूद्र मनुष्य को सांसारिक वस्तुओं में तल्लीन करते हैं, तुच्छ इच्छाओं को बढ़ावा देते हैं और मनुष्य को सांसारिक जीवन में डुबो देते हैं. इन सभी रुद्रों के पार एक और अस्तित्व है और वह परमात्मा है. केवल जब हम इस बारहवें को पकड़ पाते हैं, हम अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण पर पाने में समर्थ हो पाते हैं.

शिवरात्रि का अर्थ है परमपवित्र रात. रात्रि मूल रूप से अन्धकार को दर्शाती है. “चन्द्रमा मनसो जातः चक्षो सूर्योSजायता”-चन्द्रमा हमारे मस्तिष्क का अधिष्ठ देवता होता है. अतः हमारे मस्तिष्क तथा चन्द्रमा में बहुत गहन सम्बन्ध होता है . चद्रमा के १६ चरण हमारे मस्तिष्क के १६ पहलुओं को दर्शाते हैँ. शिवरात्रि अमावस्या के एक दिन पहले होती है जब चाँद की केवल एक लकीर प्रत्यक्ष होती है. यह मस्तिष्क के घटते हुए प्रभाव का प्रतिक है जब १५ पहलु आत्मा में विलीन हो चुके होते हैँ तथा केवल एक अवशेष रहता है. अतः इस दिन मस्तिष्क पर नियंत्रण करके उसे ईश्वर की ओर निदेशित करना अधिक सरल होता है.

ओम नमः शिवायshivaling

http://www.mahashivratri.org

http://www.hismessagehisvoice.blogspot,sg
-अर्चना

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s