क्रियाशील प्रेम

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आदर्श : उचित आचरण

   उप आदर्श : सहानुभूति

एक रात एक व्यक्ति हमारे घर आया और मुझसे बोला, “एक आठ बच्चों वाला परिवार है. उन्होंने बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया है.” premमैंने थोड़ा खाना लिया और चली गई. आखिर में, जब मैं उस परिवार के पास पहुँची तो मैंने उन नन्हें बच्चों के भूख से बिगड़े चेहरे देखे. उनके चेहरों पर दुःख या निराशा नहीं थी, केवल भूख की गहरी पीड़ा थी. मैंने उनकी माँ को चावल दिए. उसने चावल के दो भाग किए और एक भाग लेकर बाहर चली गई. जब वह वापस आई तो मैंने उससे पूछा, “तुम कहाँ गई थी?” उसने मुझे यह साधारण सा उत्तर दिया,”अपने पड़ोसियों के पास- वे भी भूखे हैं.”

मुझे आश्चर्य नहीं हुआ कि उसने चावल दिए- क्योंकि गरीब लोग उदार होते हैं. पर मैं हैरान थी कि उसे मालूम था कि उसके पड़ोसी भी भूखे हैं. आम तौर पर जब हम कष्ट में होते हैं तो हम स्वयं पर इतने केंद्रित होते हैं कि हमारे पास दूसरों के लिए समय ही नहीं होता है.

मदर टेरेसाprem1

सीख:

सच्चा प्रेम वह है जब हम स्वयं कठिन समय से गुज़रने के बावजूद दूसरों की मुश्किलों को पहचान कर उनकी मदद करते हैं. खुद के पास सब कुछ होते हुए दूसरों की मदद करना भलाई का काम है. परन्तु सबसे उत्कृष्ट कार्य है , अपने पास अल्प होने पर भी दूसरों को विपत्ति में देखकर, उनसे अपना सब कुछ बाँटना.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com

अनुवादक – अर्चना

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