सांसारिक संपत्ति के बदले अपने जीवन में लोगों का अधिक मान करें

         आदर्श : उचित आचरण

    उप आदर्श : क्षमाशील, कृतज्ञता

एक कहानी के अनुसार दो मित्र रेगिस्तान से गुज़र रहे थे. यात्रा के दौरान दोनों में बहस हो गईfriends और एक दोस्त ने दूसरे को उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा.

जिसे थप्पड़ पड़ा था उसे ठेस पहुँची पर बिना कुछ बोले उसने रेत पर लिखा, “आज मुझे मेरे सबसे अच्छे मित्र ने थप्पड़ मारा.”friends2
बे दोनों चलते-चलते एक मरूद्या पर पहुँचे. उन्होंने उसमें स्नान करने का फैसला किया. जिस दोस्त को थप्पड़ पड़ा था वह दलदल में फ़स गया और उसमें धसने लगा.friends1 परन्तु उसके दोस्त ने उसे बचा लिया. इस घटना से संभलने के बाद उसने एक पत्थर पर लिखा, ” आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई.”friends4

जिस दोस्त ने थप्पड़ मारा था और अपने सबसे अच्छे दोस्त की जान बचाई थी, उसने दूसरे दोस्त से पूछा, “मेरे ठेस पहुँचाने पर तुमने रेत पर लिखा और अब तुमने पत्थर पर लिखा, क्यों?” दूसरे दोस्त ने उत्तर दिया, “जब कोई हमें चोट पहुँचाता है तो हमें रेट पर लिखना चाहिए जहाँ क्षमा की हवा उसे मिटा सकती है. पर जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है तो हमें पत्थर पर खोदना चाहिए जहाँ कोई हवा का झोंका उसे मिटा नहीं सकता.”

               सीख :

अपने जीवन में सांसारिक चीज़ों को महत्त्व न दें. परन्तु जो आपकी ज़िन्दगी में हैं उन्हें महत्व दें.

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com
अनुवादक- अर्चना

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