सदा सहायता करें – जैसी करनी वैसी भरनी

     आदर्श : उचित आचरण

उप आदर्श : ज़रूरतमंद की मदद करना

एक दिन एक व्यक्ति को सड़क के किनारे एक बूढ़ी औरत खड़ी दिखी.chil दिन की कम रोशिनी में भी उस आदमी ने समझ लिया कि उस औरत को मदद की ज़रुरत थी. इसलिए वह उनकी मर्सिडीज़ के पास गया और अपनी गाड़ी से बाहर निकला. जब वह महिला के पास जा रहा था उसकी गाड़ी का इंजन जारी था.

इस व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कराहट देखने के बावजूद वह महिला परेशान थीं. पिछले एक घंटे से कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं रूका था. क्या यह व्यक्ति उन्हें चोट पहुँचाने वाला था? वह सुरक्षित नहीं लग रहा था; वह गरीब व भूखा प्रतीत हो रहा था. उस व्यक्ति को मालूम चल रहा था कि ठण्ड में खड़े रहकर वह डरी हुईं थीं. उसे अंदाज़ा था कि वह कैसा महसूस कर रहीं थीं. ऐसी कंपकंपी केवल भयभीत होने पर ही होती है. उसने कहा, ” महोदया, मैं यहाँ आपकी मदद के लिए आया हूँ. आप गाड़ी में इंतज़ार क्यों नहीं करतीं जहाँ गर्मी है. वैसे, मेरा नाम ब्रायन एंडरसन है.”

उनकी गाड़ी का केवल पहिया पंक्चर हुआ था लेकिन एक वृद्ध महिला के लिए यह काफी गंभीर समस्या थी. ब्रायन गाड़ी का पहिया बदलने लगा chil1और इस दौरान उसके हाथ में चोट भी लग गई और उसके कपड़े मैले हो गए.

जब वह पहिये के पेंच कास रहा था तब महिला ने गाड़ी की खिड़की का शीशा नीचे किया और ब्रायन से बात करने लगीं. उन्होंने ब्रायन को बताया कि वह सेंट लुइस से थीं और उधर से गुज़र रहीं थीं. उनकी मदद करने के लिए वह उसका यथेष्ट धन्यवाद नहीं कर सकतीं थीं. उनका ट्रंक बंद करते हुए ब्रायन केवल मुस्कुराया. महिला ने पूछा कि वह उसे कितने पैसे दें. उनके लिए कोई भी रकम सही होती. वे पहले से ही सभी घोर घटनाओं की कल्पना कर चुकीं थीं जो उनके साथ हो सकतीं थीं अगर ब्रायन वहाँ रुका नहीं होता. ब्रायन ने पैसे के बारे में एक बार भी नहीं सोचा. यह उसके लिए काम नहीं था. यह तो केवल ज़रुरत में किसी की सहायता करना था. ब्रायन की ज़िन्दगी में भी बहुत से लोगों ने उसकी मदद की थी. वह सारी ज़िन्दगी इसी प्रकार जीया था और उसे इससे अलग तरीके से काम करने का ध्यान कभी आया भी नहीं था.

ब्रायन से महिला से कहा कि अगर वह सच में उसे पैसे देना चाहतीं थीं तो अगली बार किसी ज़रूरतमंद को देखने पर वह उसकी वह सहायता कर सकतीं हैं जो उसे चाहिए. ब्रायन ने आगे कहा, “और मेरे बारे में सोचना.”

उसने उस महिला के जाने तक इंतज़ार किया. वह एक ठंडा और निराशाजनक दिन था परन्तु घर जाने समय ब्रायन प्रसन्न था.

कुछ दूर जाने पर उस वृद्ध महिला को एक छोटा सा ढाबा दिखा. वह वहाँ कुछ खाने के लिए गईंchil2 ताकि घर तक की यात्रा का अंतिम चरण तय करने के पहले थोड़ा गरम महसूस कर सकें. भोजनालय देखने में काफी गंदा था. उसके बाहर दो पुराने पेट्रोल पंप थे. सारा दृश्य उनके लिए अंजान सा था. उनके गीले बाल पोंछने के लिए सेविका एक स्वच्छ तौलिया लेकर आई. उसके चेहरे पर एक मधुर मुस्कान थी जो दिन भर के काम के बावजूद भी बरकरार थी.chill3 महिला ने देखा कि सेविका लगभग आठ महीने गर्भवती थी पर थकान व दर्द के कारण उसने अपने रवैये में कोई बदलाव नहीं आने दिया. वृद्ध महिला को आश्चर्य हुआ कि खुद के पास इतना कम होने के बावजूद किसी अजनबी के प्रति कोई इतना उदार कैसे हो सकता है. तब उन्हें ब्रायन की याद आई.

भोजन समाप्त करने के बाद, महिला ने भुगतान १०० डॉलर से किया. सेविका तुरंत १०० डॉलर के छुट्टे लाने गई परन्तु तब तक वह वृद्ध महिला जा चुकीं थीं. सेविका को ताजुब्ब हुआ कि वह महिला कहाँ होंगीं. फिर उसने रूमाल पर कुछ लिखा हुआ पाया.

जब उसने पढ़ा कि महिला ने क्या लिखा था, उसकी आँखों में आँसू आ गए. महिला ने लिखा था, “तुम मेरी देनदार नहीं हो. मैं भी इस प्रकार की परिस्थिति में थी. जिस प्रकार से मैं तुम्हारी मदद कर रहीं हूँ, एक बार किसी ने मेरी भी मदद की थी. अगर तुम सचमुच मुझे लौटाना चाहती हो तो ऐसा करो : इस प्रेम की कड़ी को अपने पर ख़त्म मत होने देना.”

रूमाल के नीचे १०० डॉलर के चार और नोट थे.

भोजनालय का सारा काम समाप्त करने के बाद उस रात जब वह घर पहुँचकर सोने गई तो वह धन तथा महिला द्वारा लिखी पंक्तियों के बारे में सोच रही थी. महिला को कैसे मालूम चला होगा कि उसे व उसके पति को इन डॉलर्स की कितनी ज़रुरत थी? अगले महीने बच्चे के आने के बाद उन्हें दिक्कत होने वाली थी…

उसे ज्ञात था कि उसका पति कितना परेशान था. पति उसके बगल में सो रहा था. उसने पति को धीमे से चूमा और कोमलता से फुसफुसाई, “सबकुछ ठीक होने वाला है. मैं तुमसे प्रेम करती हूँ, ब्रायन एंडरसन.”

सीख:

हमें दूसरों की मदद ईनाम के लिए नहीं अपितु मदद करने हेतु करनी चाहिए. निस्स्वार्थ भाव से की गई सहायता बदले में ढेर सारी खुशियाँ व आशीर्वाद लाँएगीं. और अक्सर हमारे द्वारा की गई मदद हम तक वापस अवश्य पहुँचती है. इसके अतिरिक्त किसी को खुशी प्रदान करना अपने आप में एक उपहार है.
एक पुरानी कहावत है, “जैसी करनी, वैसी भरनी.”

http://www.saibalsanskaar.wordpress.com
translation : अर्चना

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