करनी कथनी से ताकतवर होती है

आदर्श : उचित आचरण

उप आदर्श : पहल, कार्य या क्रिया

एक दिन एक किसान को एक से छोटे शहर की गली में चलते हुए अपने रास्ते के बीच एक बड़ा-सा पत्थर दिखा. stoneकिसान ने शिकायत की: ” कौन इतना लापरवाह है कि इतना बड़ा पत्थर सड़क पर छोड़ा हुआ है? कोई इसे हटाता क्यों नहीं है?” और शिकायत करते हुए वह चला गया.

अगले दिन, वही चीज़ दूधवाले के साथ भी हुई. वह भी बड़बड़ाते हुए चला गया पर पत्थर वहीँ छोड़ दिया.

फिर एक दिन, एक विद्यार्थी को वह पत्थर दिखा. उसे चिंता हुई कि कोई उससे गिरकर ज़ख़्मी हो सकता है और उसने उसे एक तरफ धकेलने का निर्णय किया.                 वह अकेले ही बहुत कठिनाई से लम्बे समय तक पत्थर को धकेलता रहाstone1 और अंततः पत्थर को रास्ते से हटाने में सफल हो गया. वह वापस आया और उसने पत्थर के स्थान पर एक कागज़ पाया.

उसने कागज़ को उठाया और उसे खोला.stone2 उस पर लिखा था, “तुम इस देश की असली सम्पत्ति हो.”

लोग दो प्रकार के होते हैं
वक्ता और कर्ता
वक्ता केवल बात करते हैं, जबकि कर्ता कार्य करते हैं.

सीख:
अगर हम किसी कार्य में शामिल नहीं होना चाहते हैं तो हमें दोष निकालने का कोई अधिकार नहीं है. इस संसार में हम जो बदलाव देखना चाहते हैं, वह हमें स्वयं बनना चाहिए.
समाज की सेवा वह किराया है जो हम इस धरती पर जगह घेरने के लिए अदा करते हैं.

http:://www.saibalsanskaar.wordpress.com

Transaltion : अर्चना

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