भगवान काम के पीछे भाव की परवाह करते हैं

mecca1

          आदर्श : प्रेम
     उप आदर्श : सहानुभूति

अब्दुल्लाह मक्का में एक मस्जिद के एक कोने में सो रहा था,mecca जब उसकी नींद दो फरिश्तों के बीच की बातचीत से खुली. वे दोनों भाग्यशाली लोगों की सूची तैयार कर रहे थे. एक फरिश्ता दूसरे से कह रहा था कि सिकंदर शहर का कोई मेहबूब प्रथम स्थान के योग्य है, भले ही वह पवित्र शहर की तीर्थयात्रा पर नहीं आया था. यह सुनकर अब्दुल्लाह सिकंदर शहर गया और उसने पाया कि मेहबूब लोगों के जूते मरम्मत करने वाला, मोची था. mecca2वह गरीब व भूखा था क्योंकि रोज़ की ज़रूरतें पूरी करने के लिए उसकी कमाई मुश्किल से पूरी पड़ती थी. पिछले कुछ वर्षों में घोर परिश्रम और कठिनाई से उसने चंदपैसे जमा किए थे. अपनी गर्भवती पत्नी को अकस्मात् उपहार देने के लिए, एक दिन मोची ने अपनी सारी जमा पूँजी एक विशेष व्यंजन तैयार करने में खर्च कर दी. भेंट लेकर जब वह घर जा रहा था, उसे एक निराहार भिखारी की पुकार सुनी जो अत्यंत भूख से कराह रहा था. mecca3मेहबूब और आगे बढ़ नहीं पाया , उसने स्वादिष्ट पकवान वाला मटका उस आदमी को दे दिया और उसके पास बैठकर उसके मरियल चेहरे पर बढ़ती संतुष्टि का आनंद लेने लगा. उस कार्य ने मेहबूब को भाग्यवानों की पंजिका में सम्मान व गौरव का स्थान प्रदान किया. ऐसा स्थान जो मक्का के तीर्थयात्री करोड़ों दान में खर्च करने के बाद भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं. भगवान कार्य के पीछे का भाव देखते हैं नाकि धूमधाम व हंगामा.

        सीख :

हम दूसरों की जो भी मदद करते हैं, उसकी विशेषता मायने रखती है नाकि उसकी तादाद. प्रेम व सहानुभूति से की गई छोटी सी सहायता, प्रेम भाव के बिना की गई बड़ी मदद से कहीं अधिक मूल्यवान है.

http:://www.saibalsanskaar.wordpress.com

Translation : अर्चना

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