सुनहरा नियम- प्रेम बदलाव ला सकता है

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           आदर्श : प्रेम
      उप आदर्श : बड़ों से प्रेम और उनका आदर

बहुत समय पहले, ली-ली नाम की एक लड़की का विवाह हुआ और वह अपने पति व सास के साथ रहने चली गई. जल्द ही, ली-ली को लगने लगा कि वह और उसकी सास मिलजुल कर नहीं रह सकते.lili उन दोनों का व्यक्तित्व बहुत भिन्न था और अपनी सास की बहुत सी आदतों पर ली-ली को गुस्सा आता था. इसके अतिरिक्त सास ली-ली की निरंतर आलोचना करतीं थीं. li li1दिन पर दिन और हफ्ते पर हफ्ते बीतते गए . पर ली-ली और उसकी सास का बहस करना और झगड़ना समाप्त नहीं हुआ. इन सबसे के अलावा प्राचीन चीनी प्रथा के अनुसार, ली-ली को अपनी सास के आगे झुकना पड़ता था और उनकी हर इच्छा का पालन करना पड़ता था. घर में क्रोध व अप्रसन्नता के कारण बेचारा पति बहुत परेशान था.

अंततः ली-ली अपनी सास का बुरा मिज़ाज़ व तानाशाही और बर्दाश नहीं कर पाई और उसने इस विषय में कुछ करने का निश्चय किया.li li2 ली-ली अपने पिता के प्रिय मित्र, श्री हुआंग, को मिलने गई, जो जड़ी-बूटी बेचते थे.ली-ली ने उन्हें परिस्थिति से अवगत कराया और पूछा अगर वो उसे ज़हर दे सकते हैं तो वह इस समस्या का सदा के लिए हल कर सकती है. श्री हुआंग ने क्षणभर सोचा और फिर बोले, “ली-ली, मैं तुम्हारी समस्या सुलझाने में मदद करूँगा परन्तु तुम्हें मेरी बात पर ध्यान देना होगा और मेरी आज्ञा का पालन करना होगा.”

ली-ली ने कहा, “जी, श्री हुआंग, जैसा आप कहेंगें, मैं वैसा ही करूँगी.” श्री हुआंग पीछे के कमरे में गए और कुछ ही देर में जड़ी-बूटियों की गठ्ठी लेकर लौटे. उन्होंने ली-ली से कहा, ” अपनी सास से छुटकारा पाने के लिए तुम तुरंत असर करने वाला ज़हर इस्तेमाल नहीं कर सकती क्योंकि उससे लोगों को शक हो जाएगा. इसलिए मैंने तुम्हें विभिन्न जड़ी-बूटियाँ दीं हैं जो उनके शरीर में धीरे-धीरे विष बढ़ाएंगीं. जब तुम अपनी सास के लिए खाना बनाओ तब उनके खाने में थोड़ी सी जड़ी- बूटियाँ दाल दिया करो. और जब उनकी मृत्यु हो जाए तब अपने उपर लोगों के संदेह से बचने के लिए, तुम बहुत सतर्क रहकर अपनी सास के प्रति दोस्ताना सम्बन्ध का नाटक करना. उनसे बहस मत करना, उनकी हर इच्छा का पालन करना और उन्हें रानी की तरह रखना.”

ली-ली बहुत खुश थी. उसने श्री हुआंग को धन्यवाद दिया और अपनी सास की ह्त्या का षड्यंत्र शुरू करने जल्दी से घर लौटी. हफ्ते और महीने बीत गए. ली-ली हर दूसरे दिन अपनी सास को विशेष रूप से तैयार खाना परोसती थी. संदेह से बचने के लिए उसे श्री हुआंग की बात याद थी. अतः उसने अपने गुस्से पर नियंत्रण रखा, अपनी सास की आज्ञा का पालन किया और उनके साथ अपनी माँ के जैसा व्यवहार किया. छह महीने बीतने के बाद, सारे घर का वातावरण बदल गया. ली- ली अपने गुस्से पर नियंत्रण करने का इतना अभ्यास कर चुकी थी कि उसने पाया कि अब वह कभी भी अपने आपे से बाहर या क्रोधित नहीं होती थी. छह महीने में उसकी अपनी सास से बहस नहीं हुई थी. अब वह अधिक दयालु प्रतीत होती थी और उसे अपनी सास के साथ मिलजुल कर रहना अधिक आसान लगता था. ली-ली के प्रति उसकी सास का रवैया भी बदल गया और ली-ली को वह अपनी बेटी के सामान चाहने लगीं थीं. वह अपने दोस्तों व रिश्तेदारों में बोलतीं थीं कि ली-ली सर्वोत्तम बहू है. ली-ली और उसकी सास अब एक दूसरे को सगी माँ और बेटी के सामान मानने लगे थे. liयह सब देखकर ली-ली का पति बहुत खुश था.

एक दिन ली-ली श्री हुआंग से मिलने गई और उनसे पुनः एक मदद के लिए पूछा. उसने कहा, “प्रिय श्री हुआंग, मेरी सास को विष से न मारने में मेरी मदद कीजिये. वह बहुत ही अच्छी महिला में परिवर्तित हो गईं हैं और मैं उनसे अपनी माँ के सामान प्यार करतीं हूँ. मैं नहीं चाहती कि मेरे द्वारा दिए गए ज़हर से उनकी मृत्यु हो.” श्री हुआंग मुस्कुराये और उन्होंने सहमति में सर हिलाया. “ली-ली, चिंता की कोई बात नहीं है. मैंने तुम्हें ज़हर दिया ही नहीं था. वे जड़ी-बूटियाँ उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए विटामिन थीं. ज़हर केवल तुम्हारे दिमाग में और उनके प्रति तुम्हारे व्यवहार में था. पर अब उनके प्रति तुम्हारे प्यार से सारा ज़हर धुल गया है.” आदर्श : दोस्तों, क्या तुमने कभी समझा है कि दूसरे तुम्हारे साथ ठीक उसी प्रकार से व्यवहार करेंगें जैसे तुम उनके साथ व्यवहार करोगे?
चीन में कहा जाता है : जो व्यक्ति दूसरों से प्यार करता है, उसे लोग भी प्रेम करते हैं. सुनहरा नियम.

       सीख :

प्रेम एक शक्तिशाली औज़ार है जो लोगों को बदल सकता है. इसमें समय लग सकता है पर कभी भी प्रेम करना त्यागना मत. आखिरी जीत प्रेम की ही होती है. पर इसके लिए बहुत सारे धैर्य व दृढ़ता की आवश्यकता पड़ सकती है.

http:://www.saibalsanskaar.wordpress.com

translation : अर्चना

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