अहम् क्या है ?

zen

 आदर्श: अहिंसा
 उप आदर्श : भीतरी शान्ति

टंग राजवंश के प्रधानमंत्री, राजनेता तथा सैनिक नेता के रूप में अपनी सफलता के कारण, राष्ट्रीय शूरवीर थे. परन्तु अपनी कीर्ति, ताकत और धन-दौलत के बावजूद वे अपने आप को एक विनम्र व धार्मिक बौद्धधर्मी मानते थे. वे अक्सर अपने मनपसंद ज़ेन मास्टर के पास जाते थे और उन दोनों की आपस में अच्छी दोस्ती थी. उनके प्रधानमंत्री होने का उनके रिश्ते पर बिलकुल भी प्रभाव नहीं था और उनका सम्बन्ध केवल एक उपास्य गुरु एवं आदरपूर्ण शिष्य का था.

एक दिन अपनी सामान्य भेंट के दौरान, प्रधानमंत्री ने पंडित से पूछा, “माननीय, बौद्धधर्म के अनुसार अहंभाव क्या है?” मास्टर का चेहरा लाल हो गया और बहुत ही वरिष्ठता व अपमानजनक भाव से उन्होंने कहा, “यह कैसा फालतू प्रश्न है?”

इस आकस्मिक उत्तर ने प्रधानमंत्री को इतना चौंका दिया कि वे खिन्न व क्रोधित हो गए. ज़ेन मास्टर तब मुस्कुराकर बोले, “महाशय, यह अहंभाव है.”

  सीख :

किसी चीज़ को सीखने का सर्वोत्तम तरीका, किसी और के द्वारा समझाकर नहीं अपितु स्वयं अनुभव कर के है. यह ज़ेन मास्टरों का जिज्ञासुओं को सीखाने का बहुत ही दिलचस्प व साधारण तरीका है.

http:://www.saibalsanskaar.wordpress.com

Translation :  अर्चना

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