एक भी नहीं – निःस्वार्थ प्रेम

 

आदर्श : प्रेम
उप आदर्श : देखरेख, शर्त रहित प्रेम

नन्हा चाड एक शर्मिला व शांत नवयुवक था. एक दिन वह घर आया और अपनी माँ से बोला कि वह अपनी कक्षा में सबके लिए वैलेंटाइन बनाना चाहता है. उसकी माँ का दिल बैठ गया. उन्होंने सोचा, “काश यह ऐसा न करे!” क्योंकि उन्होंने बच्चों को विद्यालय से घर लौटते समय देखा था. उनका चाड हमेशा उन सब के पीछे होता था.वे एक दूसरे को पकड़कर हँसते थे और आपस में बातें करते थे पर बेचारे चाड को कभी भी शामिल नहीं करते थे. school kids फिर भी उन्हींने फैसला किया कि वह अपने बेटे का साथ देंगीं. अतः उन्होंने कागज़, गोंद और क्रेयॉन खरीदा. तीन हफ़्तों तक, रात भर कड़ी मेहनत करके चाड ने ३५ वैलेंटाइन बनाए.v cards
वैलेंटाइन दिन की सुबह आई और चाड अत्यधिक जोश में था. उसने सावधानीपूर्वक कार्डों की गड्डी उठाकर थैली में रखी v cards1और दरवाज़ा बंद करके चला गया. उसकी माँ ने निश्चय किया कि वे उसके लिए उसके मनपसंद बिस्कुट बनाएँगीं और जब वह विद्यालय से घर लौटेगा तो उसे गरम बिस्कुट के साथ ठंडा दूध परोसेंगीं. उन्हें मालूम था कि वह निराश होगा और बिस्कुट तथा दूध शायद उसके दर्द को कुछ शांत कर पाएंगें. उन्हें यह सोचकर बहुत कष्ट हो रहा था कि चाड को बहुत वैलेंटाइन नहीं मिलेंगें – शायद कोई भी नहीं.

उस दोपहर उन्होंने बिस्कुट और दूध मेज़ पर तैयार रखा था. बाहर बच्चों की आवाज़ सुनकर, उन्होंने खिड़की से बाहर देखा. निःसंदेह बच्चे आ रहे थे, हँसते और मस्ती करते हुए. और हमेशा की तरह चाड सबसे पीछे था. वह हमेशा की अपेक्षा अधिक तेज़ चल रहा था. उन्हें पूरी उम्मीद थी कि घर आते ही वह फूट-फूटकर रोने लगेगा. उन्होंने देखा कि उसके हाथ खाली थे और उन्होंने अपने आँसुओं को दबाकर दरवाज़ा खोला.

उन्होंने कहा, “मम्मी के पास तुम्हारे लिए कुछ बिस्कुट व दूध हैं.”

पर चाड ने शायद ही उनकी बात सुनी. दमकता हुआ चेहरा लेकर, वह तेज़ी से आगे बढ़ता रहा और केवल इतना ही बोल पाया, “एक भी नहीं, एक भी नहीं.”

उसकी माँ का दिल बैठ गया.
और फिर उसने आगे कहा, “मैं भूला नहीं, एक भी नहीं.”

सीख:

हमें प्रेमपूर्ण कार्य करने चाहिए क्योंकि वही सही हैं ना कि इसलिए कि उसके बदले में हमें कुछ मिलेगा. यह प्रेम का सर्वोच्च रूप है- निःस्वार्थ प्रेम, पवित्र प्रेम जो विकसित करना आसान नहीं है. निरंतर चिंतन हमें इस पथ का पालन करने में मदद करेगा.

 

source: http:://www.saibalsanskaar.wordpress.com

Translation : अर्चना

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