कछुए से सीख : समझ

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आदर्श : प्रेम, शान्ति
उप आदर्श : सहनशीलता

एक लड़के को एक बार एक कछुआ मिला. लड़के ने उसका निरिक्षण करना शुरू किया पर कछुए ने अपना सर अंदर खींचा और अपना खोल बंद कर लिया.terra close लड़के को गुस्सा आया और वह लाठी लेकर उसे बलपूर्वक खोलने की कोशिश करने लगा. लड़के के चाचा, जो यह सब देख रहे थे, ने कहा, “नहीं, वह सही तरीका नहीं है. तुम भले ही कछुए को मारो पर लाठी से ज़बरदस्ती उसे खुलवा नहीं पाओगे.”

चाचा कछुए को घर के अंदर ले गए और उसे अंगीठी के पास रख दिया. शीघ्र ही कछुए को गर्मी का अहसास होने लगा. कछुए ने अपना सर बाहर निकाला, फिर टांगें बाहर फैलाईं और रेंगना शुरू हो गया.terrapin

“कछुए ऐसे ही होते हैं” , चाचा ने कहा, “और लोग भी. तुम उन्हें कुछ करने के लिए विवश नहीं कर सकते. परन्तु अगर तुम उन्हें वास्तविक उदारता से सुरक्षित महसूस करवाओगे तो संभवतः वे वही करेंगें जो तुम उनसे करवाना चाहते हो.”

सीख :

किसी भी चीज़ से कुछ सीखने या उसका स्वीकरण करने के लिए हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते. केवल प्रेम या धैर्य से ही, दूसरों को कुछ सिखा सकते हैं या दूसरों को अपना दृष्टिकोण सुना सकते हैं.

http:://saibalsanskaarwordpress.com

transaltion:    अर्चना

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