Archive | September 2014

खच्चर और कुआँ – प्रवृत्ति

आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श : आशावादी, रवैया

यह कहानी एक किसान की है जो एक बूढ़े खच्चर का मालिक था. यह खच्चर किसान के कुएँ में गिर गया mule  और किसान ने उसके ढेंचू- ढेंचू की आवाज़ सुनी. परिस्थिति को सावधानी से आंकने के बाद किसान को खच्चर से सहानुभूति तो हुई पर एक बूढ़े खच्चर को बचाने के लिए इतनी तकलीफ़ उठाना किसान ने उपयुक्त नहीं समझा. किसान ने अपने पड़ोसियों को इकट्ठा किया, उन्हें स्तिथि से अवगत कराया और उस बूढ़े खच्चर को कुएँ में दफ़नाकर उसकी मुसीबत ख़त्म करने के लिए उनसे मिट्टी उठाने में उनकी सहायता माँगी.

शुरू में बूढ़ा खच्चर उन्मत्त था. परन्तु जैसे-जैसे किसान और उसके पड़ोसी बेलचे से खोदते गए  mule1 और खच्चर की पीठ पर मिट्टी गिरती गयी, उसे मन में एक ख़याल आया. अचानक उसे ध्यान आया कि हर बार जब बेलचा भर मिट्टी उसकी पीठ पर गिरती है, उसे मिट्टी झाड़ देनी चाहिए और एक कदम उपर उठाना चाहिए. जैसे मिट्टी भर-भरकर उसके उपर गिरती गई, उसने ऐसा ही किया. “मिट्टी झाड़ो और उपर उठो…. मिट्टी झाड़ो और उपर उठो….मिट्टी झाड़ो और उपर उठो !” , यह उसका मन्त्र बन गया और स्वयं को प्रोत्साहित करने के लिए वह इसे दोहराता रहा.

प्रहार चाहे कितने भी कष्टजनक थे और परिस्थिति कितनी भी दुखद प्रतीत हो रही थी, बूढ़े खच्चर ने घबराहट से संघर्ष किया. वह मिट्टी झाड़ता रहा और उपर उठता गया. कुछ ही समय में, क्लांत व पूर्णतः थके हुए बूढ़े खच्चर ने विजयी होकर उस कुएँ की दीवार के पार कदम रखा.mule2

जो उसे लगा था कि उसे दफ़ना देगा, वास्तव में उसके लिए वरदान साबित हुआ- सब उसके विपत्ति सँभालने के तरीके के कारण.

सीख :

अगर हम परेशानियों का बहादुरी से सामना करेंगें, उनका सकारात्मक रूप से जवाब देंगें और घबराहट, कटुता या स्वयं के प्रति हमदर्दी से हार मानने से इंकार करेंगें तो जो विपत्तियाँ हमें दफनाने आतीं हैं, उनमें इतना सामर्थ्य होता है कि वे हमें लाभान्वित करके हमें वरदान दे सकें. जब कठिनाई आती है तो हमें आभारी होना चाहिए. विपत्ति के समय हमें उससे फायदा उठाकर सीख लेनी चाहिए.

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transaltion: अर्चना

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नवरात्रि

Durga+Lakshmi+Saraswati

नवरात्रि हिन्दूओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. नवरात्रि का त्यौहार देवी माता के सभी रूपों जैसे दुर्गा, लक्ष्मी तथा सरस्वती की पूजा-अर्चना को समर्पित है. नवरात्रि का अर्थ ‘नौ रातें” होता है- ‘नव’ अर्थात नौ और “रात्रि” अर्थात रात. इन नौ रातों तथा दस दिनों के दौरान शक्ति/देवी के नौ रूपों को पूजा जाता है. दसवें दिन को ‘विजयादशमी’ या ‘दशहरा’ कहा जाता है. यह त्यौहार पूजा तथा नाच-गाने से परिपूर्ण पर्व है और इसे देश भर में हर्षोल्लास से मनाया जाता है.

नवरात्रि का अभिप्राय :

नवरात्रि के दौरान हम ईश्वर के शक्ति भाव का सर्वव्यापी माता के रूप में आह्वान करते हैं. इन्हें साधारणतः दुर्गा के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है जीवन की विपदाओं को मिटाने वाली.

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते ।।

इनका उल्लेख ‘भगवती’ या ‘शक्ति’ के रूप में भी किया जाता है. यही शक्ति ईश्वर को सृष्टि, संरक्षण तथा संहार का कार्य करने में मदद करती है. अन्य शब्दों में, ईश्वर अचल है, पूर्णतयः अपरिवर्तनशील है और माँ दुर्गा सबकुछ करतीं हैं. वास्तव में, हमारे द्वारा शक्ति की पूजा वैज्ञानिक सिद्धांत की पुनः पुष्टि करता है कि शक्ति अविनाशी है. वह सदा विद्यमान रहती है- उसकी रचना या नाश संभव नहीं है.

नवरात्रि की परम्परा:

नवरात्रि प्रतिवर्ष पाँच बार मनाई जाती है- वसंत, आषाढ़, शरद, पौष तथा माघ नवरात्रि. इनमें से वसंत नवरात्रि तथा शरद नवरात्रि सर्वाधिक महत्वपूर्ण व लोकप्रिय हैं.

१) वसंत नवरात्रि : वसंत नवरात्रि चैत्र माह( मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है. इस दौरान नौ दिन, शक्ति के नौ रूपों को समर्पित होते हैं. हिन्दू पौराणिक महीनों के अनुसार यह नवरात्रि नए वर्ष का चिन्ह है.

२) आषाढ़ नवरात्रि – आषाढ़ नवरात्रि को गुप्ता गायत्री या शाकम्भरी नवरात्रि भी कहते हैं. इसे आषाढ़ माह(जून-जुलाई) के आषाढ़ शुक्ल पक्ष में मनाते हैं.

३) शरद नवरात्रि – यह सबसे आशिक महत्वपूर्ण नवरात्रि है. इसे महा नवरात्रि कहते हैं और इसे आश्विन मास के उज्जवल पाख के प्रथम दिन से मनाया जाता है. इसे शरद नवरात्रि भी कहते हैं क्योंकि इसे शरद काल(सितम्बर-अक्टूबर) में मनाते हैं.

४) पौष नवरात्रि – पौष नवरात्रि तारशी(दिसंबर-जनवरी) माह के पौष शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है.

५) माघ नवरात्रि – माघ नवरात्रि माघ माह(जनवरी-फरवरी) के माघ शुक्ल पक्ष में मनाते हैं.

नवरात्रि के दौरान देवी के विभिन्न पहलुओं की आराधना करने के लिए इसे ३ भागों में बाँटा जाता है. पहले तीन दिनों में देवी का दुर्गा के रूप में आह्वान किया जाता है ताकि हमारी अशुद्धताओं, अवगुणों एवं त्रुटियों का नाश हो सके. अगले तीन दिन, देवी की आराधना आध्यात्मिक तथा भौतिक सम्पत्ति की दाता, लक्ष्मी के रूप में की जाती है. ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी अपने भक्तों को अनंत धन-दौलत प्रदान करने की शक्ति रखतीं हैं. आखिर के ३ दिन, देवी का ज्ञान की भण्डार, सरस्वती के रूप में पूजा की जाती है.

नवरात्रि का त्यौहार देश भर में बहुत ही आकर्षक, विशिष्ट और विभिन्न रूपों में आयोजित किया जाता है.

उत्तरी भारत में चैत्र नवरात्रि राम नवमी से समाप्त होती है तथा शरद नवरात्रि दशहरा पर खत्म होती है. नवरात्रि का पर्व सभी नौ दिन व्रत रखकर तथा देवी का भिन्न रूपों में पूजन करके बहुत ही जोश तथा श्रद्धा से मनाया जाता है. ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ प्रायः प्रत्येक घर में होता है. नवरात्रि के नौ दिन अलग-अलग जगहों पर पंडाल लगाकर “रामलीला” का औपचारिक ढ़ंग से अभिनय किया जाता है. ramlila विजय दशमी के दिन अच्छाई की बुराई पर जीत दर्शाने के लिए रावण, कुम्भकरण और मेघनाद के पुतले जलाये जाते हैं.ravan हिमाचल प्रदेश के कुल्लु क्षेत्र का दशहरा विशेष रूप से प्रख्यात है.

पश्चिम भारत में, खास तौर से गुजरात व मुंबई राज्यों में नवरात्रि का आयोजन सुप्रसिद्ध ‘गरबा’ तथा ‘डांडिया-रास’ नृत्यों से होता है. नर्तक रंग-बिरंगी पोशाकें पहनकर आभूषित छड़िया हाथ में लेकर घेरों में नाचते हैं.

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दक्षिण भारत के लोग नवरात्रि को ‘गोलू’ के रूप में मनाते हैं.

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केरल तथा कर्नाटक के कुछ भागों में शरद नवरात्रि की अष्टमी, नवमी और विजयदशमी, सरस्वती पूजा के रूप में मनाते हैं. घरों में किताबों को पूजा जाता है. बच्चों में लिखना और पढ़ना आरम्भ करने के लिए विजयदशमी का दिन अति शुभ माना जाता है तथा इसे “विध्यारम्भम” भी कहते हैं.

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कर्नाटक में “आयुध पूजा” का आयोजन विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों की पूजा से किया जाता है. रोजाना इस्तेमाल के उपकरणों को फूलों से सजाकर, उनकी पूजा की जाती है और आनेवाले समय में सफलता के लिए देवी के आशीर्वाद के आह्वान करते हैं.

पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल में शरद नवरात्रि के अंतिम पाँच दिन विशेष हर्ष, उल्लास तथा उत्तेजना से परिपूर्ण होते हैं. इन्हें ‘दुर्गा पूजा’ के रूप में मनाते हैं और यह इस राज्य का सबसे महान और प्रसिद्ध वार्षिक महोत्सव है. ऐसा माना जाता है कि इस काल के दौरान माता दुर्गा ने महिषासुर असुर के रूप में पाप का अंत किया था. D 1731
उत्कृष्ट शिल्पकार दुर्गा माता की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाते हैं और उन्हें अति सुन्दर रूप से आभूषित करते हैं. दुर्गा पूजा का आरम्भ महालय से होता है. उसके पश्चात षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी तथा महा नवमी को देवी की अत्यंत श्रद्धा, विश्वास और निष्ठा से पूजा- अर्चना होती है. दशमी के दिन भव्य जलूस निकाले जाते हैं और नाच-गाने के साथ माता की मूर्ति जल में प्रवाहित की जाती है.

शक्ति को नौ दिन पूजने का आतंरिक अर्थ:

असुर शब्द “असुषु रमन्ते इति असुरः ” से उत्पन्न हुआ है. अर्थात असुर उसे कहते हैं जो जीवन में केवल आनंद उठाने तथा भौतिक वस्तुओं के भोग-विलास में लीन रहते हैं. ऐसा महिषासुर प्रत्येक मनुष्य के हृदय में विद्यमान है और उसने मानव के भीतरी सात्विक गुणों पर नियंत्रण किया हुआ है. अतः इस महिषासुर के मायावी रूप को जानकर, इसके जाल से मुक्त होने के लिए, अपनी सही पहचान जानने के लिए तथा अपने मूल उद्देश्य पर केंद्रित रहने के लिए शक्ति की पूजा करना आवश्यक है. इसीलिए नवरात्रि के नौ दिन, अपने अंदर विद्यमान अहम् रुपी अंधकार से मुक्त होने के लिए, शक्ति की आराधना की जाती है.

sources: hinduism.about.com

en.wikipedia.org
translation : अर्चना

कछुए से सीख : समझ

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आदर्श : प्रेम, शान्ति
उप आदर्श : सहनशीलता

एक लड़के को एक बार एक कछुआ मिला. लड़के ने उसका निरिक्षण करना शुरू किया पर कछुए ने अपना सर अंदर खींचा और अपना खोल बंद कर लिया.terra close लड़के को गुस्सा आया और वह लाठी लेकर उसे बलपूर्वक खोलने की कोशिश करने लगा. लड़के के चाचा, जो यह सब देख रहे थे, ने कहा, “नहीं, वह सही तरीका नहीं है. तुम भले ही कछुए को मारो पर लाठी से ज़बरदस्ती उसे खुलवा नहीं पाओगे.”

चाचा कछुए को घर के अंदर ले गए और उसे अंगीठी के पास रख दिया. शीघ्र ही कछुए को गर्मी का अहसास होने लगा. कछुए ने अपना सर बाहर निकाला, फिर टांगें बाहर फैलाईं और रेंगना शुरू हो गया.terrapin

“कछुए ऐसे ही होते हैं” , चाचा ने कहा, “और लोग भी. तुम उन्हें कुछ करने के लिए विवश नहीं कर सकते. परन्तु अगर तुम उन्हें वास्तविक उदारता से सुरक्षित महसूस करवाओगे तो संभवतः वे वही करेंगें जो तुम उनसे करवाना चाहते हो.”

सीख :

किसी भी चीज़ से कुछ सीखने या उसका स्वीकरण करने के लिए हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते. केवल प्रेम या धैर्य से ही, दूसरों को कुछ सिखा सकते हैं या दूसरों को अपना दृष्टिकोण सुना सकते हैं.

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transaltion:    अर्चना

सही योजना

             आदर्श : सत्य
        उप आदर्श: सब कुछ अच्छे के लिए होता है, स्वीकरण

मुल्ला नसरुदीन के बारे में एक कहानी    mulla2

एक गर्म दिन, मुल्ला नसरुदीन अखरोट के पेड़ की छाया में आराम कर रहे थे. mulla resting इधर- उधर देखते हुए जल्द ही उनकी नज़र पास की छत पर गई, जहाँ एक कोमल बेल पर विशाल संतरी कद्दू उग रहे थे. mulla pumpkin फिर उन्होंने अपने ऊपर देखा और ऊपर पेड़ पर छोटे गोल अखरोट देखे.mulla1

 

“वाह! “, उन्होंने खुद से कहा. “प्रिय प्रभु, मैं इससे बेहतर योजना कर सकता था. इस विराट वृक्ष पर छोटे गोल अखरोट और इतने बड़े कद्दू उस नाज़ुक बेल पर. इसकी कोई तुक नहीं बनती. ”

उन्होंने एक लम्बी सांस ली, अपनी टाँगे फैलाई और एक छोटी सी झपकी के लिए आँखें बंद कर लीं. चंद लम्हों बाद, वे चौंककर उठे. ऊपर पेड़ से एक छोटा हरा अखरोट उनके सर पर आ गिरा था. वे सीधे होकर बैठे, अपनी दाढ़ी सहलाई और प्रार्थना के लिए अपने हाथ उठाए. “आपके तौर- तरीकों पर प्रश्न करने के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ, प्रिय भगवान! आखिरकार आपको सब मालूम है. सोचो मेरा क्या हाल होता अगर इस पेड़ पर कद्दू उग रहे होते. ”

सीख :

अक्सर हमें पता नहीं होता है कि हमारे लिए क्या सर्वश्रेष्ठ है. हमें हमेशा लगता है कि जो हमारे पास नहीं है शायद वह हमारे लिए अच्छा है. ईश्वर सर्वज्ञाता हैं. हमें सदा सर्वोत्तम कार्य करना चाहिए और बाकी उन पर छोड़ देना चाहिए. परिणाम हमारे पक्ष में हो या न हो परन्तु जिसे हम बदल नहीं सकते, उसे स्वीकार करना ही सबसे अच्छा है. सबकुछ किसी कारणवश ही होता है, जो हमें तुरंत मालूम नहीं पड़ता है. सबमें हमारे लिए सीख होती है.

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translation by : अर्चना

भगवान का अस्तित्व होता है – चाय की दुकान

 

आदर्श : सत्य
उप आदर्श: विश्वास

१५ फौजियों का एक दल अपने मेजर साहिब के नेतृत्व में हिमालय की चौकी के लिए जा रहा था, जहाँ उन्हें अगले तीन महीनों के लिए तैनात किया गया था. एक अन्य गुट, जिसको रिहाई मिल रही थी, उनके आगमन का उत्सुकता से इंतज़ार कर रहा था ताकि वह अपनी मुख्य इकाई की अधिक सुरक्षित चौकी पर जा सकता. कुछ जवान अपने परिवारों से मिलने छुट्टी पर जाने वाले थे. वे खुश थे कि वे जवानों के एक दल को रिहा कर रहे थे जिन्होंने अपना कार्य पूरा कर लिया था.

यह एक जोखिम से भरी चढ़ाई थी और यह अगले दिन शाम तक चलने वाली थी. भीषण सर्दी के साथ बीच-बीच में हिमपात यात्रा को और भी कठिन बना रहा था. soldiers1

मेजर ने सोचा काश कोई उन्हें एक प्याला चाय देता यद्यपि उन्हें भली-भाति ज्ञात था कि यह एक व्यर्थ की कामना थी.

उन्होंने एक घंटे और चढ़ाई जारी रखी और तब उन्हें एक टूटा-फूटा घर दिखा जो एक छोटी सी दुकान दिख रहा था. परन्तु वह बंद था.

रात के दो बजे थे और आस-पास कोई घर नहीं था जहाँ से उस दुकान के मालिक का पता चल सकता. वैसे भी सुरक्षा कारणों से रात को किसी का दरवाज़ा खटखटाना उचित नहीं होता.

स्थिति में अवरोध था. “चाय नहीं है लड़कों, बुरा नसीब,” मेजर ने कहा.

मेजर ने अपने आदमियों को आराम करने को कहा चूँकि वे तीन घंटों से भी अधिक से चल रहे थे.

“महाशय, यह निश्चित ही चाय की दुकान है और हम चाय बना सकते हैं. मगर हमें ताला तोड़ना पड़ेगा. ” एक जवान ने कहा.

अफ़सर इस प्रस्ताव को लेकर संदेह में थे पर चाय का एक गरम प्याला बुरा विचार नहीं था. उन्होंने क्षणभर सोचा और फिर ताला तोड़ने की अनुमति दे दी. ताला तोड़ा गया.

किस्मत ने उनका साथ दिया.

वह जगह वास्तव में एक दुकान थी और वहाँ चाय बनाने की सारी सामग्री थी, और बिस्कुट के कुछ पैकेट भी थे. चाय बनाई गई और सर्दी की रात में सबको बहुत राहत मिली. teaअब वे आगे की लम्बी तथा जोखिम चढ़ाई के लिए तैयार थे और चलने के लिए सबने कमर कस ली.

अफ़सर सोच में थे. उन्होंने दुकान के मालिक की अनुमति के बिना ताला खोला था, चाय बनाई थी और बिस्कुटों का सेवन किया था. भुगतान करने का समय था पर कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था. वे सभी चोरों की टोली नहीं थे बल्कि अनुशासित जवान थे.

जो भी करना अनिवार्य था वह किये बिना मेजर वहाँ से नहीं गए. उन्होंने अपने बटुए से १००० रुपये का नोट निकाला और काउंटर पर रख दिया. उन्होंने नोट को चीनी के डब्बे के नीचे दबाया ताकि सुबह जब मालिक आए तो पहले नोट को देखे.

अब वे अपराध से मुक्त थे और उन्हींने जवानों को चलने की आज्ञा दी.

दिन, हफ्ते और महीने बीत गए. वे निरंतर अपना काम बहादुरी से करते रहे. वे भाग्यशाली थे कि इतनी गंभीर विद्रोह soldiers की परिस्थिति में भी दल के सभी सदस्य सुरक्षित थे.

फिर एक दिन समय आया जब वीर जवानों की एक और टोली उनका स्थान लेने वाली थी. शीघ्र ही वे वहाँ से रवाना हुए और वापसी में उसी दुकान पर रुके. दुकान आज खुली थी और दुकानदार भी मौजूद था. वह बहुत ही कम साधनों वाला एक वृद्ध व्यक्ति था.teaseller वह उन सभी १५ जवानों को देखकर खुश हुआ, इस आशा में कि वह कम से कम १५ प्याले चाय बेच पाएगा.

सब ने चाय पी और उस बूढ़े व्यक्ति से उनकी ज़िन्दगी तथा इतने दूरवर्ती स्थान में चाय बेचने के अनुभवों के बारे में बातें कीं. उन्हें बताने के लिए उस गरीब बूढ़े व्यक्ति के पास भगवान में अपनी श्रद्धा से परिपूर्ण अनेक कहानियाँ थीं.

अगर भगवान का अस्तित्व वास्तव में होता है तो आपके जैसे लोग, जो भगवान का अनुकरण करते हैं, पीड़ा में क्यों होते हैं? , उनकी गरीबी तथा भगवान में विश्वास से द्रवित होकर एक ने पूछा.

“नहीं भाई! ऐसा मत सोचो क्योंकि भगवान का अस्तित्व वास्तव में होता है. मुझे कुछ महीने पूर्व प्रमाण मिला.”
वृद्ध व्यक्ति अपना अनुभव बयान करने लगे-

“मैं बहुत कठिन समय से गुज़र रहा था क्योंकि मेरे एकमात्र पुत्र को आतंकवादियों ने बहुत कठोरता से मारा था. वे उससे कुछ जानकारी जानना चाहते थे जो उसके पास नहीं थी. उस दिन मैंने दुकान जल्दी बंद कर दी थी और अपने बेटे को अस्पताल ले गया था. उसकी दवाइयाँ खरीदने वालीं थीं और मेरे पास पैसे नहीं थे. आतंकवादियों के भय से मुझे कोई भी उधार नहीं देना चाहता था. कोई भी उम्मीद नहीं थी.

और उस दिन भाई, मैंने भगवान से मदद के लिए प्रार्थना की थी. और उस दिन मेरी दुकान में आकर वे मेरे बचाव के लिए आए थे. उस दिन जब में अपनी दुकान पर लौटा तो ताला टूटा हुआ पाया. मैंने सोचा कि किसी ने घुसकर जो भी थोड़ा बहुत सामान था, ले लिया था. पर तब मैंने देखा कि चीनी के डब्बे के तले ‘भगवान’ ने १००० रुपये छोड़े थे. भाई, मैं तुम को बता नहीं सकता उस दिन उन पैसों का क्या महत्त्व था. भगवान होते है, ज़रूर होते हैं.”

“मुझे मालूम है कि प्रतिदिन लोग यहाँ मर रहे हैं पर आप सब जल्द ही अपने सगे -सम्बन्धियों, अपने बच्चों से मिलेंगें. और आप भगवान का धन्यवाद अवश्य करना क्योंकि वे हम पर निगाह रख रहे हैं. उनका अस्तित्व होता है. उस दिन उन्होंने मेरी दुकान में आकर, ताला तोड़कर उन्होंने मुझे पैसे दिए जिसकी मुझे अत्यंत आवश्यकता थी. मुझे पता है उन्होंने किया था.”

उनकी आँखों में अडिग विश्वास था. बेशुमार श्रद्धा थी. पंद्रह आँखों के जोड़ों ने अपने अफ़सर की ओर देखा और उनकी आँखों में साफ़ और सुस्पष्ट आदेश पाया, “चुप रहो.”

अफ़सर ने उठकर पैसों का भुगतान किया और बूढ़े व्यक्ति को गले लगाया.
“जी बाबा, मुझे पता है, भगवान का अस्तित्व होता है- और हाँ चाय बहुत बढ़िया थी.”

पंद्रह आँखों के जोड़ों ने मेजर की आँखों में नमी देखी, जोकि एक दुर्लभ दृश्य था.

और वास्तविक सत्य यह है कि हममें से कोई भी किसी के लिए भगवान हो सकता है.

सीख :

किसी भी चीज़ में विश्वास ज़रूरी है. कहा जाता है कि, “विश्वास पहाड़ हिला देता है” . अगर किसी को भगवान के अस्तित्व में विश्वास है तो उनके लिए भगवान अवश्य होते हैं और विभिन्न तरीकों से उनकी मदद करते हैं. ऐसे लोग भगवान के अदृश्य हाथ को अपनी ज़िन्दगी के हर पहलू में कार्यशील पाते हैं.

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translation: अर्चना