गणेश चतुर्थी

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 गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहते हैं. हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मॉस के शुक्ल चतुर्थी को हिंदूंओं का यह प्रमुख त्यौहार मनाया जाता है. गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न- बाधाओं को दूर करनेवाले, कृपा के सागर तथा भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश का जन्म हुआ था.

    भगवान विनायक के जन्मदिवस पर मनाया जानेवाला यह महापर्व महाराष्ट्र सहित भारत के सभी राज्यों में हर्षोउल्लास पूर्वक तथा भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है. उत्सव के पूर्व, कुशल शिल्पकार भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाते हैं. भक्तजन गणपति की मूर्ति घर पर लाकर उनकी प्रतिष्ठा और पूजा करने के लिए अपने घरों की सफाई करते हैं.GaneshChaturthiPoojaइस पर्व की अवधि जगह तथा परंपरा के अनुसार १-११ दिनों तक रहती है. गणेश पूजा प्रायः मध्यायन में की जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यायन काल में हुआ था. इस उत्सव के दौरान विशेष पूजाएँ, धार्मिक कीर्तन और जाप का आयोजन किया जाता है.ganesh names विभिन्न मिठाइयाँ खासकर ‘मोदक’ बनाते है. गणपति देव को २१ लड्डूओं का भोग लगाने की विधि है. त्यौहार के अंतिम दिन मूर्तियों की रंगीन तथा संगीतात्मक शोभायात्रा निकालते हैं और इन्हें परंपरागत रूप से विसर्जित करते हैं. visarjan  visarjan1

गणेश चतुर्थी एक बहुत ही लोकप्रिय पर्व हैं. इसके अनेक कारण हैं. गणपति विश्वभर के जाने-माने भगवान हैं जो कला व विज्ञान के संरक्षक हैं तथा ज्ञान व बुद्धिमत्ता के देवता हैं और जिनकी पहचान उनके हाथी के मुख से होती है. भगवान विनायक को ‘विघ्न हर्ता’ और ‘बुद्धि प्रदायका’ मानते हैं. चूँकि भगवान गणेश सफलता के मार्ग के समस्त बाधायें दूर करते हैं, उनके आशीर्वाद का आह्वान प्रत्येक धार्मिक रस्मों में किया जाता है. विद्यार्थयों के लिए यह त्यौहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि भगवान गणेश ज्ञान व बुद्धिमत्ता के प्रतीक हैं.

गणेश के अनुरूप का तात्पर्य

 

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जब हम गणेश की मूर्ति को देखते हैं तो एक आकर्षक और मनमोहक हाथी के सिर वाले देवता को देखते हैं, जिसकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है. उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ और ‘बुद्धि प्रदायका’ कहते हैं. पर नज़दीक से देखने पर उनके अनुरूप का गूढ़ मतलब समझ में आएगा.

गणेश के हाथी का सिर पशुओं के सबसे उच्च रूप को दर्शाता है तथा चूहा सबसे निम्न रूप का प्रतीक है. उनके मनुष्य का शरीर बताता है कि गणेश सभी जीवों के देव हैं. उनके विराट कान व सिर इस बात का संकेत हैं कि उन्होंने बुद्धिमत्ता, वेदों के शाश्वत सत्य पर विचार कर तथा श्रवण से हासिल की है. उनका सिर व सूढ़ ‘ॐ’ के आकर में है- जो हमारा सबसे पवित्र चिन्ह है. हाथी की महत्ता इसलिए भी है क्योंकि वह शाकाहारी है- सात्विक खाना खाने वाला. वह एक शांत और सौम्य पशु है जो केवल आवश्यकता पड़ने पर ही अपनी अपार शक्ति का प्रयोग करता है.

गणेश के दाहिने हाथ में अंकुश तथा बायें हाथ में पाश है. इन उपकरणों का प्रयोग हाथी के प्रशिक्षकों द्वारा जंगली हाथियों को वश में करने के लिए किया जाता है. लाक्षणिक रूप से हमारा मन भी जंगली हाथी के समान है जो सदा यहाँ- वहाँ दौड़ता रहता है. अतः हमें अंकुश तथा पाश के माध्यम से अपने मन पर नियंत्रण करना चाहिए- तभी हम एकाग्रचित्त, विचार तथा तपस्या कर पायेंगें.

गणेश के हाथ में मोदक, सात्विक खाने के ओर संकेत करता है जोकि आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने के लिए आवश्यक है.

कहा जाता है कि गणेश की विशाल तोंद में सम्पूर्ण विश्व सम्मिलित है. हमें अच्छे तथा बुरे, सभी अनुभवों को स्वीकार करना चाहिए. हमें उत्तेजना तथा परेशानियों के दौरान समचित्त रहना चाहिए क्योंकि सभी अनुभव हमारे लिए सीख होते हैं और हमें ईश्वर के नज़दीक ले जाते हैं.

गणपति देव एक पैर उपर मोड़कर तथा दूसरा पैर ज़मीन पर रखकर बैठते हैं. ज़मीन पर रखा पैर यह बताता है कि हम अन्य जीवों की तरह संसार में रह सकते है परन्तु उपर की हुई टाँग इस बात का संकेत है कि हमारा ध्यान सदैव हमारे भीतर के भगवान पर केंद्रित रहना चाहिए.

मूषक, नन्हा चूहा, इच्छाओं का प्रतीक है. स्वभाव से चूहा एक अत्यंत लालची प्राणी है. वह यहाँ- वहाँ भागकर कुतरता रहता है और अपनी ज़रुरत से अधिक संचय करता है. ठीक इसी प्रकार से अगर हमारी इच्छाएँ ज़्यादा हैं तो हम अपना समस्त जीवन इन्हें पूरा करने में ही व्यर्थ कर देंगें. इसके बजाय हमें भगवान गणेश के समान होना चाहिए और अपनी इच्छाओं को दृढ़ता से नियंत्रण में रखना चाहिए. विनायक पुराण के अनुसार चूहा गजमुहासुर नामक असुर का भी प्रतीक है, जिसका विनाश भगवान गणेश ने किया था. दिलचस्प बात यह है कि पौराणिक कहानियों के अनुसार सभी देवी-देवताओं के वाहन किसी विशेष असुर का प्रतीक है, जिनका उन्होंने नाश किया है. ये सभी वाहन मनुष्य की अज्ञानता का प्रतीक है. इस अज्ञानता का विनाश कर, हमें ज्ञान की ओर केवल ईश्वर ही ले जा सकतें हैं.

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सभी को हमारी हार्दिक शुभकामनाएँ. आशा है कि गणेश के विभिन्न अंगों तथा उपकरणों का गूढ़ अर्थ समझकर हम इससे लाभान्वित होंगें और अपनी आध्यात्मिक यात्रा में सफल होंगें.

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          गणपति बापा मोरया !!

  source: ganeshchaturthi.com

                saibabaofindia.com

 

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