त्रुटियों को गले लगाना

आदर्श : शान्ति
उप आदर्श : सहनशीलता, धैर्य, समझ

जब मैं छोटी सी लड़की थी तो कभी- कभी मेरी माँ रात के भोजन के लिए सुबह का नाश्ता बनाना पसंद करतीं थीं. काफ़ी समय पहले की एक रात मुझे विशेषकर याद है जब उन्होंने काम पर लम्बे कठिन दिन के बाद नाश्ता बनाया था. उस दिन मेरी माँ ने पिताजी के सामने एक प्लेट में अंडे, कबाब और बहुत ही जले हुए टोस्ट रखे. toast

यह देखने के लिए कि यदि किसी ने जले हुए टोस्ट पर ध्यान दिया हो, मुझे अपना इंतज़ार करना याद है.

परन्तु मेरे पिताजी ने टोस्ट की तरफ हाथ बढ़ाया और माँ की ओर मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा कि स्कूल में मेरा दिन कैसा था. मुझे याद नहीं है कि उस रात मैंने उनसे क्या कहा था. पर उन्हें उस टोस्ट पर मक्खन और जैली लगाकर प्रत्येक कौर खाना, मुझे अवश्य याद है.

उस शाम जब मैं मेज़ पर से उठी तो मुझे अपनी माँ का टोस्ट जलाने के लिए, मेरे पिताजी से माफ़ी माँगना याद है. और मुझे कभी नहीं भूलेगा जो उन्होंने कहा था, “प्रिये, मुझे जला हुआ टोस्ट खाना अच्छा लगता है.”

बाद में उस रात मैं पिताजी को शुभ रात्रि बोलने गई और मैंने उनसे पूछा यदि उन्हें जला हुआ टोस्ट खाना वास्तव में अच्छा लगता है. उन्होंने मुझे गले लगाते हुए कहा, “डेब्बी, तुम्हारी माँ का आज काम पर कठिन दिन था और वह सचमुच थकी हुई थी. इसके अतिरिक्त थोड़ा सा जला हुआ टोस्ट किसी को तकलीफ नहीं पहुँचाएगा.”

       सीख:
ज़िन्दगी और रिश्ते बहुत कीमती हैं और इन्हें क्षुद्र चीज़ों के खातिर खोना नहीं चाहिए. सहनशीलता, धैर्य और समझ किसी भी रिश्ते को बनाए रखने में मदद करते हैं. जिनके लिए माता-पिता आदर्श हैं, ऐसे बच्चों को यह संस्कार बड़ों तथा माता-पिता द्वारा उदहारण बनकर दिया जा सकता है.

http://www.saibalsanskaar.com

translation:अर्चना

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