Archive | August 2014

राह दिखाना

horse

            आदर्श : प्रेम
       उप आदर्श : देख रेख, सहानुभूति

मेरे छज्जे के सामने की सड़क के पार एक मैदान है जहाँ अक्सर मैं दो घोड़ों को घास चरते देखता हूँ. दूर से दोनों घोड़े एक समान दिखते हैं पर अगर आप पास जायेंगें तो देखेंगें कि उनमें से एक अंधा है. उसके मालिक ने फिर भी उसे त्यागा नहीं बल्कि उसके रहने के लिए एक आरामदायक अस्तबल बनाया जो कि काफ़ी आश्चर्यजनक है.

अगर आप पास खड़े होकर सुनेंगें तो आप एक घोड़े से घंटियों की आवाज़ आती सुनेंगें. ये तांबे के रंग की नन्ही घंटियाँ उसकी लगाम से लगाई हुईं हैं. horse1 घंटियों की खनखनाहट उसके अंधे दोस्त को बतातीं हैं कि वह कहाँ है ताकि वह अंधा घोड़ा उसका पीछा कर सके. जैसे आप खड़े होकर दोनों दोस्तों को देखेंगें तो पायेंगें कि घंटी वाला घोड़ा अंधे घोड़े का हमेशा ध्यान रखता है. अंधा घोड़ा भी सदा सतर्क रहता है और इस विश्वास में कि उसका दोस्त उसको गुमराह नहीं करेगा, वह घंटी की आवाज़ की दिशा में ही जाता है. हर शाम जब घंटियों वाला घोड़ा अस्तबल की पनाह में लौटता है तो समय-समय पर पीछे मुड़कर देखता है कि उसका दोस्त घंटियों की आवाज़ सुनने के लिए बहुत दूर तो नहीं है!

इन घोड़ों के मालिक के समान, सिर्फ इसलिए कि हम सम्पूर्ण नहीं हैं, भगवान हमारा त्याग नहीं करते हैं. वह हमपर नज़र रखतें हैं और ज़रुरत पड़ने पर हमारी मदद के लिए दूसरों को हमारी ज़िन्दगी में भी लेकर आतें हैं. कभी-कभी हम अंधें घोड़े होते हैं और उन लोगों की घंटियों की खनखनाहट से प्रभावित होते हैं जो भगवान के अस्तित्व को समझते हैं. कई परिस्थितियों में हम मार्गदर्शक घोड़े के समान होते हैं, दूसरों को राह ढूँढ़ने में उनकी मदद करते हैं.

        सीख:

हम कभी अकेले नहीं होते हैं. भगवान सदा हमारा ध्यान रखते हैं. आवश्यकता के समय ईश्वर सही व्यक्ति को हमारी सहायता तथा मार्गदर्शन के लिए भेजते हैं. इसी प्रकार दूसरों की मदद के लिए, वह हमें अपने साधन के रूप में प्रयोग कर सकतें हैं. अतः हमें ज़रूरतमंद लोगों की सहायता करने के अवसरों की ताक में रहना चाहिए.

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translation by- अर्चना

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गणेश चतुर्थी

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 गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहते हैं. हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मॉस के शुक्ल चतुर्थी को हिंदूंओं का यह प्रमुख त्यौहार मनाया जाता है. गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न- बाधाओं को दूर करनेवाले, कृपा के सागर तथा भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश का जन्म हुआ था.

    भगवान विनायक के जन्मदिवस पर मनाया जानेवाला यह महापर्व महाराष्ट्र सहित भारत के सभी राज्यों में हर्षोउल्लास पूर्वक तथा भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है. उत्सव के पूर्व, कुशल शिल्पकार भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाते हैं. भक्तजन गणपति की मूर्ति घर पर लाकर उनकी प्रतिष्ठा और पूजा करने के लिए अपने घरों की सफाई करते हैं.GaneshChaturthiPoojaइस पर्व की अवधि जगह तथा परंपरा के अनुसार १-११ दिनों तक रहती है. गणेश पूजा प्रायः मध्यायन में की जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यायन काल में हुआ था. इस उत्सव के दौरान विशेष पूजाएँ, धार्मिक कीर्तन और जाप का आयोजन किया जाता है.ganesh names विभिन्न मिठाइयाँ खासकर ‘मोदक’ बनाते है. गणपति देव को २१ लड्डूओं का भोग लगाने की विधि है. त्यौहार के अंतिम दिन मूर्तियों की रंगीन तथा संगीतात्मक शोभायात्रा निकालते हैं और इन्हें परंपरागत रूप से विसर्जित करते हैं. visarjan  visarjan1

गणेश चतुर्थी एक बहुत ही लोकप्रिय पर्व हैं. इसके अनेक कारण हैं. गणपति विश्वभर के जाने-माने भगवान हैं जो कला व विज्ञान के संरक्षक हैं तथा ज्ञान व बुद्धिमत्ता के देवता हैं और जिनकी पहचान उनके हाथी के मुख से होती है. भगवान विनायक को ‘विघ्न हर्ता’ और ‘बुद्धि प्रदायका’ मानते हैं. चूँकि भगवान गणेश सफलता के मार्ग के समस्त बाधायें दूर करते हैं, उनके आशीर्वाद का आह्वान प्रत्येक धार्मिक रस्मों में किया जाता है. विद्यार्थयों के लिए यह त्यौहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि भगवान गणेश ज्ञान व बुद्धिमत्ता के प्रतीक हैं.

गणेश के अनुरूप का तात्पर्य

 

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जब हम गणेश की मूर्ति को देखते हैं तो एक आकर्षक और मनमोहक हाथी के सिर वाले देवता को देखते हैं, जिसकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है. उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ और ‘बुद्धि प्रदायका’ कहते हैं. पर नज़दीक से देखने पर उनके अनुरूप का गूढ़ मतलब समझ में आएगा.

गणेश के हाथी का सिर पशुओं के सबसे उच्च रूप को दर्शाता है तथा चूहा सबसे निम्न रूप का प्रतीक है. उनके मनुष्य का शरीर बताता है कि गणेश सभी जीवों के देव हैं. उनके विराट कान व सिर इस बात का संकेत हैं कि उन्होंने बुद्धिमत्ता, वेदों के शाश्वत सत्य पर विचार कर तथा श्रवण से हासिल की है. उनका सिर व सूढ़ ‘ॐ’ के आकर में है- जो हमारा सबसे पवित्र चिन्ह है. हाथी की महत्ता इसलिए भी है क्योंकि वह शाकाहारी है- सात्विक खाना खाने वाला. वह एक शांत और सौम्य पशु है जो केवल आवश्यकता पड़ने पर ही अपनी अपार शक्ति का प्रयोग करता है.

गणेश के दाहिने हाथ में अंकुश तथा बायें हाथ में पाश है. इन उपकरणों का प्रयोग हाथी के प्रशिक्षकों द्वारा जंगली हाथियों को वश में करने के लिए किया जाता है. लाक्षणिक रूप से हमारा मन भी जंगली हाथी के समान है जो सदा यहाँ- वहाँ दौड़ता रहता है. अतः हमें अंकुश तथा पाश के माध्यम से अपने मन पर नियंत्रण करना चाहिए- तभी हम एकाग्रचित्त, विचार तथा तपस्या कर पायेंगें.

गणेश के हाथ में मोदक, सात्विक खाने के ओर संकेत करता है जोकि आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने के लिए आवश्यक है.

कहा जाता है कि गणेश की विशाल तोंद में सम्पूर्ण विश्व सम्मिलित है. हमें अच्छे तथा बुरे, सभी अनुभवों को स्वीकार करना चाहिए. हमें उत्तेजना तथा परेशानियों के दौरान समचित्त रहना चाहिए क्योंकि सभी अनुभव हमारे लिए सीख होते हैं और हमें ईश्वर के नज़दीक ले जाते हैं.

गणपति देव एक पैर उपर मोड़कर तथा दूसरा पैर ज़मीन पर रखकर बैठते हैं. ज़मीन पर रखा पैर यह बताता है कि हम अन्य जीवों की तरह संसार में रह सकते है परन्तु उपर की हुई टाँग इस बात का संकेत है कि हमारा ध्यान सदैव हमारे भीतर के भगवान पर केंद्रित रहना चाहिए.

मूषक, नन्हा चूहा, इच्छाओं का प्रतीक है. स्वभाव से चूहा एक अत्यंत लालची प्राणी है. वह यहाँ- वहाँ भागकर कुतरता रहता है और अपनी ज़रुरत से अधिक संचय करता है. ठीक इसी प्रकार से अगर हमारी इच्छाएँ ज़्यादा हैं तो हम अपना समस्त जीवन इन्हें पूरा करने में ही व्यर्थ कर देंगें. इसके बजाय हमें भगवान गणेश के समान होना चाहिए और अपनी इच्छाओं को दृढ़ता से नियंत्रण में रखना चाहिए. विनायक पुराण के अनुसार चूहा गजमुहासुर नामक असुर का भी प्रतीक है, जिसका विनाश भगवान गणेश ने किया था. दिलचस्प बात यह है कि पौराणिक कहानियों के अनुसार सभी देवी-देवताओं के वाहन किसी विशेष असुर का प्रतीक है, जिनका उन्होंने नाश किया है. ये सभी वाहन मनुष्य की अज्ञानता का प्रतीक है. इस अज्ञानता का विनाश कर, हमें ज्ञान की ओर केवल ईश्वर ही ले जा सकतें हैं.

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सभी को हमारी हार्दिक शुभकामनाएँ. आशा है कि गणेश के विभिन्न अंगों तथा उपकरणों का गूढ़ अर्थ समझकर हम इससे लाभान्वित होंगें और अपनी आध्यात्मिक यात्रा में सफल होंगें.

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          गणपति बापा मोरया !!

  source: ganeshchaturthi.com

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नाई की दुकान

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आदर्श : सच्चाई
उप आदर्श : विश्वास, श्रद्धा

एक आदमी नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने और दाढ़ी छटवाने गया. जब नाई ने काम करना शुरू किया तो उन दोनों में अच्छी बातचीत छिड़ गई और उन्होंने विभिन्न विषयों पर बातें कीं. आखिरकार जब भगवान के विषय में बात चली तो नाई ने कहा, “मैं भगवान के अस्तित्व को नहीं मानता.”

“तुम ऐसा क्यों कहते हो ?”, ग्राहक ने पूछा.

“बाहर केवल सड़क पर जाने से ही तुम समझ जाओगे कि भगवान का अस्तित्व नहीं है. मुझे बताओ, अगर भगवान होते तो क्या इतने सारे बीमार लोग होते? क्या छोड़े हुए बच्चे होते? क्या कष्ट या पीड़ा होती? मैं ऐसे अनुरागी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति देंगें” , नाई ने उत्तर दिया.

ग्राहक ने क्षण भर के लिए सोचा पर चूँकि वह वाद विवाद शुरू नहीं करना चाहता था, वह चुप रहा. नाई ने अपना काम खत्म किया और ग्राहक दुकान से चला गया. वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर एक लम्बे, गंदे व जूट जैसे बालों वाले व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी. वह गंदा और मैला दिख रहा था. barber1 ग्राहक वापस मुड़कर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा, “तुम्हें पता है? नाइयों का अस्तित्व नहीं होता. ”

“तुम ऐसा कैसे कह सकते हो? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ. और मैंने अभी तुम्हारा कार्य किया है.” चकित नाई ने कहा.

“नहीं !” , ग्राहक ने कहा. “नाई नहीं होते हैं. अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी गंदे, लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता? ”

“आह! पर नाई अवश्य होते हैं. ऐसा ही होता है जब लोग मेरे पास नहीं आते हैं, ” नाई ने गहरी साँस लेते हुए उत्तर दिया.

“बिलकुल !” ग्राहक ने पुष्टि की. “यही बात है! चूँकि लोग मदद के लिए भगवान की ओर नहीं देखते हैं, इस संसार में कष्ट और पीड़ा रहती है. जब हम उन्हें देखना शुरू करेंगें, ख़ुशी सदा हमारी सहयोगी रहेगी. भगवान ज़रूर होते हैं.”

  सीख :

भगवान का अस्तित्व तभी होता है जब हम उन्हें ढूँढने का निर्णय करते हैं. वो कहाँ नहीं हैं? प्रत्येक सृष्टि जो हम देखते हैं, वह उनकी है. सूर्योदय से लेकर, वर्षा, वायु, समस्त प्रकृति तथा हमारे आस पास के लोग उनके द्वारा बनाए गए हैं. हमारे चेहरे की मुस्कान, पीड़ित लोगों के प्रति हमारी सहानुभूति, हमारे सगे-सम्बन्धियों के प्रति प्यार- सब उनके द्वारा प्रेरित हैं, जो हम सबमें हैं. हम उनकी सृष्टि का महत्व नहीं समझते. जब हम उन्हें अपने अंदर तथा बाहर ढूंढेंगे तो हम उन्हें सदा मुस्कुराते पायेंगें, सदैव हमें सुनने के इंतज़ार में.

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Translated by- अर्चना

त्रुटियों को गले लगाना

आदर्श : शान्ति
उप आदर्श : सहनशीलता, धैर्य, समझ

जब मैं छोटी सी लड़की थी तो कभी- कभी मेरी माँ रात के भोजन के लिए सुबह का नाश्ता बनाना पसंद करतीं थीं. काफ़ी समय पहले की एक रात मुझे विशेषकर याद है जब उन्होंने काम पर लम्बे कठिन दिन के बाद नाश्ता बनाया था. उस दिन मेरी माँ ने पिताजी के सामने एक प्लेट में अंडे, कबाब और बहुत ही जले हुए टोस्ट रखे. toast

यह देखने के लिए कि यदि किसी ने जले हुए टोस्ट पर ध्यान दिया हो, मुझे अपना इंतज़ार करना याद है.

परन्तु मेरे पिताजी ने टोस्ट की तरफ हाथ बढ़ाया और माँ की ओर मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा कि स्कूल में मेरा दिन कैसा था. मुझे याद नहीं है कि उस रात मैंने उनसे क्या कहा था. पर उन्हें उस टोस्ट पर मक्खन और जैली लगाकर प्रत्येक कौर खाना, मुझे अवश्य याद है.

उस शाम जब मैं मेज़ पर से उठी तो मुझे अपनी माँ का टोस्ट जलाने के लिए, मेरे पिताजी से माफ़ी माँगना याद है. और मुझे कभी नहीं भूलेगा जो उन्होंने कहा था, “प्रिये, मुझे जला हुआ टोस्ट खाना अच्छा लगता है.”

बाद में उस रात मैं पिताजी को शुभ रात्रि बोलने गई और मैंने उनसे पूछा यदि उन्हें जला हुआ टोस्ट खाना वास्तव में अच्छा लगता है. उन्होंने मुझे गले लगाते हुए कहा, “डेब्बी, तुम्हारी माँ का आज काम पर कठिन दिन था और वह सचमुच थकी हुई थी. इसके अतिरिक्त थोड़ा सा जला हुआ टोस्ट किसी को तकलीफ नहीं पहुँचाएगा.”

       सीख:
ज़िन्दगी और रिश्ते बहुत कीमती हैं और इन्हें क्षुद्र चीज़ों के खातिर खोना नहीं चाहिए. सहनशीलता, धैर्य और समझ किसी भी रिश्ते को बनाए रखने में मदद करते हैं. जिनके लिए माता-पिता आदर्श हैं, ऐसे बच्चों को यह संस्कार बड़ों तथा माता-पिता द्वारा उदहारण बनकर दिया जा सकता है.

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translation:अर्चना

रक्षा बंधन

rakhi1रक्षा बंधन हिंदूंओ का प्रसिद्ध त्यौहार है. इसे ‘राखी’ का त्यौहार भी कहते हैं. यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है.
रक्षा बंधन का पावन त्यौहार बहन-भाई के मधुर रिश्ते का उत्सव है. इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधतीं हैं और उनकी लम्बी उम्र, सफलता और खुशियों की ईश्वर से प्रार्थना करती हैं. भाई इस अवसर पर अपनी बहन को उपहार देते हैं एवं उसकी जीवन पर्यन्त सुरक्षा का वचन देते हैं.rakhi3

रक्षा बंधन केवल एक त्यौहार ही नहीं बल्कि हमारी परम्पराओं का प्रतीक है. भारत के इतिहास से रक्षा बंधन उत्सव के कुछ ऐतिहासिक प्रमाण निम्न हैं-
कर्मवती – हुमायूँ
मुगल काल के दौर में जब मुगल बादशाह हुमायूँ चितौड़ पर आक्रमण करने बढ़ा तो राणा सांगा की विधवा कर्मवती ने हुमायूँ को राखी भेजकर रक्षा वचन ले लिया।  हुमायूँ ने इसे स्वीकार करके चितौड़ पर आक्रमण का ख़्याल दिल से निकाल दिया और कालांतर में मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज निभाने के लिए चितौड़ की रक्षा हेतु  बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती और मेवाड़ राज्य की रक्षा की। 

सुभद्राकुमारी चौहान ने शायद इसी का उल्लेख अपनी कविता, ‘राखी’ में किया है:

मैंने पढ़ा, शत्रुओं को भी
जब-जब राखी भिजवाई
रक्षा करने दौड़ पड़े वे
राखी-बन्द शत्रु-भाई॥rakhi4

सिकंदर और पुरू
सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरूवास को राखी बांध कर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवदान दिया। 

ऐतिहासिक युग में भी सिंकदर व पोरस ने युद्ध से पूर्व रक्षा-सूत्र की अदला-बदली की थी। युद्ध के दौरान पोरस ने जब सिकंदर पर घातक प्रहार हेतु अपना हाथ उठाया तो रक्षा-सूत्र को देखकर उसके हाथ रूक गए और वह बंदी बना लिया गया। सिकंदर ने भी पोरस के रक्षा-सूत्र की लाज रखते हुए और एक योद्धा की तरह व्यवहार करते हुए उसका राज्य वापस लौटा दिया।

भगवान कृष्ण – द्रौपदी
लोक रक्षा हेतु भगवान कृष्ण ने दुष्ट राजा शिशुपाल की ह्त्या की थी. युद्ध के दौरान कृष्ण को चोट लगी और उनकी अंगुलियाँ लहू लुहान हो गईं थी. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा तुरंत फाड़कर कृष्ण की कलाई पर बाँधा था. अपने प्रति द्रौपदी का स्नेह और सहानुभूति देखकर कृष्ण उनके साथ बहन-भाई के प्रेम बंधन में बन्ध गए थे. और भविष्य में ज़रुरत पड़ने पर उन्होंने द्रौपदी को इस क़र्ज़ का भुगतान करने का वचन दिया था. कई वर्ष उपरान्त, जब शतरंज के खेल में पांडव द्रौपदी को हार गए थे तब चीर हरन के दौरान द्रौपदी की साड़ी की लम्बाई निरंतर बढ़ाकर उन्होंने द्रौपदी की मदद की थी.rakhi5

राजा बली व लक्ष्मी देवी

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असुरों का राजा महाबली, भगवान विष्णु का महान भक्त था. उसकी अमित भक्ति के कारण, बली के राज्य की रक्षा करने के लिए, विष्णु वैकुण्ठ छोड़कर उसके पास चले गए. इस कारण लक्ष्मीजी उदास थीं. विष्णु को वैकुण्ठ वापस लाने के लिए, वे बली के महल में ब्राह्मण स्त्री के भेष में गईं. श्रावण की पूर्णिमा पर उन्होंने बली की कलाई पर राखी बाँधी अपनी सही पहचान प्रत्यक्ष की. इसके बदले में बली ने विष्णु को वैकुण्ठ लौटने का आग्रह किया. भगवान विष्णु के प्रति राजा बली की भक्ति के कारण, राखी के त्यौहार को ‘बलेवा’ भी कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन के बाद से श्रावण पूर्णिमा पर राखी बाँधने के लिए भाइयों द्वारा बहनों को आमंत्रित करने की प्रथा चली.
चंद्रशेखर आजाद का प्रसंग
बात उन दिनों की है जब क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत थे और फिरंगी उनके पीछे लगे थे। 

फिरंगियों से  बचने के लिए शरण लेने हेतु आजाद एक  तूफानी रात को एक घर में जा पहुंचे जहां  एक विधवा अपनी बेटी के साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आजाद को डाकू समझ कर पहले तो वृद्धा ने शरण देने से इंकार कर दिया लेकिन जब आजाद ने अपना परिचय दिया तो उसने उन्हें ससम्मान अपने घर में शरण दे दी। बातचीत से आजाद को आभास हुआ कि गरीबी के कारण विधवा की बेटी की शादी में कठिनाई आ रही है। आजाद महिला को कहा, ‘मेरे सिर पर पांच हजार रुपए का इनाम है, आप फिरंगियों को मेरी सूचना देकर मेरी गिरफ़्तारी पर पांच हजार रुपए का इनाम पा सकती हैं जिससे आप अपनी बेटी का विवाह सम्पन्न करवा सकती हैं।
यह सुन विधवा रो पड़ी व कहा- “भैया! तुम देश की आजादी हेतु अपनी जान हथेली पर रखे घूमते हो और न जाने कितनी बहू-बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकती।” यह कहते हुए उसने एक रक्षा-सूत्र आजाद के हाथों में बाँध कर देश-सेवा का वचन लिया। सुबह जब विधवा की आँखें खुली तो आजाद जा चुके थे और तकिए के नीचे 5000 रूपये पड़े थे। उसके साथ एक पर्ची पर लिखा था- “अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट- आजाद।”

रक्षा बंधन का त्यौहार भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है.

दक्षिण भारत के ब्राह्मण समुदाय श्रावण पूर्णिमा के दिन “उपकर्म” या “अवनि अवित्तम” की विद्धि करते हैं जिसमें वे अपनी जनेऊ बदलते हैं.
भगववान कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम का जन्म श्रावण पूर्णिमा को हुआ था. अतः इसे बलराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाते हैं.
उत्तरी भारत में इसे ‘राखी पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है.
उड़ीसा में इसे ‘गमह पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सभी पालतू गायों तथा बैलों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है. परिवार में तथा सगे-सम्बन्धियों में मिठाई का आदान प्रदान होता है. उड़ीसा में शुक्ल पक्ष की एकादशी से आरम्भ होकर राखी पूर्णिमा तक ‘झूलन यात्रा’ का आयोजन होता है. राधा-कृष्ण की मूर्तियों को झूले पर बाखूबी सजाया जाता है.
पश्चिम भारत में तथा महाराष्ट्र, गुजरात व गोवा राज्यों में इसे ‘नारियल पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है. इस दिन समुद्रदेव वरुण को सम्मान देने के लिए, सागर को नारियल चढ़ाया जाता है. नारियल पूर्णिमा से मछली पकड़ने का समय भी शुरू होता है. सभी मछुआरे, जो समुद्र पर अपनी जीविका के लिए निर्भर करते हैं, भगवान वरुण को भेंट चढ़ाकर समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
मध्य भारत के राज्य जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड तथा बिहार में यह दिन ‘कजरी पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है. यह किसानों तथा पुत्रों वाली स्त्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है.
गुजरात राज्य के कुछ क्षेत्रों में यह दिन ‘पवित्रोपना’ के रूप में मनाते हैं. इस दिन भगवान शिव की शानदार पूजा-अर्चना की जाती है.
राखी के त्यौहार का उत्सव
राखी के त्यौहार का उत्सव सुबह से ही शुरू हो जाता है. सुबह जल्दी उठकर, नहाकर नूतन कपड़े पहनकर लोग पूजा के लिए एकत्रित होते हैं. ईश्वर की कृपा का आह्वान करके, बहनें भाइयों की आरती उतारतीं हैं, चावल व कुमकुम का टीका लगातीं हैं और मन्त्र उच्चारण के साथ भाइयों को राखी बाँधतीं हैं. बहनें प्रेम से भाइयों को मिठाई खिलातीं हैं और उनकी कुशलता की प्रार्थना करतीं हैं. बदले में, भाई बहनों को उपहार देते हैं, इस वचन के साथ की वे सदा उनकी सुरक्षा करेंगें.

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विश्वास के चमत्कार

          आदर्श : सत्य
     उप आदर्श : विश्वास

एक लड़की अपनी दोस्त के घर गई और वहाँ कुछ देर ज़्यादा ठहर गई. उसे घर अकेले आना था. हालाँकि रात का समय था पर वह भयभीत नहीं थी क्योंकि उसका घर छोटे से समुदाय में था और कुछ घर छोड़ कर ही था.

जैसे वह साइकिल के मार्ग पर चल रही थी, girl aloneडीएन ने भगवान से प्रार्थना की कि वे उसे हानि व संकट से सुरक्षित रखें. जब वह अंधकार युक्त व एकांत गली पर पहुँची तो उसने वहाँ से जाने का निश्चय किया क्योंकि वह उसके घर जाने का छोटा रास्ता था. परन्तु आधे रास्ते पहुँचने पर उसने गली के छोर पर एक आदमी को खड़े पाया, मानो वह उसका इंतज़ार कर रहा हो. वह बेचैन हो गई और ईश्वर से अपनी सुरक्षा की प्रार्थना करने लगी.girl alone1

उसी क्षण उसे अपने इर्द-गिर्द शान्ति व सुरक्षा का अहसास हुआ. उसे लगा जैसे कोई उसके साथ चल रहा है. जब वह गली के छोर पर पहुँची तो उस आदमी के आगे से गुज़र कर सुरक्षित घर पहुँच गई.

अगले दिन उसने अखबार में पढ़ा कि उस गली से उसके गुज़रने के २० मिनट बाद, वहाँ एक युवती का बलात्कार हुआ था. इस दुर्घटना से अभिभूत होकर वह रोने लगी, यह सोचकर कि ऐसा उसके साथ भी हो सकता था. अपनी सुरक्षा के लिए उसने प्रभु का धन्यवाद किया और उस युवती की मदद करने के लिए थाने जाने का निश्चय किया.

उसे लगा कि वह उस आदमी को पहचान सकती है अतः उसने पुलिस को अपनी कहानी बताई. पुलिस ने उससे पूछा यदि वह कतार में खड़े लोगों को देखकर, उस आदमी को पहचानने में उनकी मदद करना चाहेगी.

वह सहमत हो गई और उसने तुरंत उस आदमी को पहचान लिया. जब उस आदमी को बताया गया कि उसकी पहचान हो गई है, वह फौरन रो पड़ा और उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली.

अफसर ने डीएन को उसकी बहादुरी के लिए धन्यवाद दिया और पूछा यदि वे उसके लिए कुछ कर सकते हैं. डीएन ने पूछा अगर वे उस व्यक्ति से एक प्रश्न कर सकते हैं. डीएन यह जानने को उत्सुक थी कि उस व्यक्ति ने डीएन पर हमला क्यों नहीं किया था?

जब पुलिसवाले ने उससे पूछा, उसने उत्तर दिया, “क्योंकि वह अकेली नहीं थी. उसके दोनों ओर दो लम्बे आदमी चल रहे थे.”

सीख:

विश्वास पहाड़ों को भी हिला देता है. अगर हमे दृढ़ विश्वास है कि भगवान हमारे साथ हैं तो वे निश्चित ही हमारी रक्षा करेंगे. वे कभी हमें अकेला नहीं छोड़ेंगे. वे सदैव हममें हैं और हमें आतंरिक शक्ति देते हैं. हमें भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि जब भी जीवन में हमारा मुसीबत व आपत्ति से सामना हो तो वे हमें आतंरिक शक्ति दें. दृढ़ विश्वास तथा श्रद्धा हमें विभिन्न विपत्तियों से बचा सकते हैं.

Translation: अर्चना

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दुकानदार और लड़का

 

आदर्श : प्रेम

उप आदर्श : विश्वास

 

एक बार एक गरीब नन्हें बालक को अपनी भूख शांत करने के लिए खाने का एक टुकड़ा भी नहीं मिला. उसने पास की फल की दुकान से एक केला चुरा लिया.

भगवान का भक्त होने के नाते, उसने आधा केला ‘हुंडी” (दान पात्र) में डाल दिया और आधा केला खा लिया. दुकानदार ने लड़के को पकड़ लिया और उसपर चोरी का इलज़ाम लगाया. लड़के ने अपनी गलती मान ली. दुकानदार से इस मासूम बालक को दंड नहीं दिया गया पर उसे सबक सिखाने के लिए दुकानदार ने उसे मंदिर के चारों ओर चक्कर लगाने का आदेश दिया. दुकानदार भौचक्का रह गया जब उसने भगवान को मंदिर के चारों ओर बालक का अनुकरण करते हुए देखा. उस रात भगवान दुकानदार के सपने में आए और उसे समझाया, “चूँकि चुराए हुए केले में मेरा भी हिस्सा था, मैं सज़ा बाँटने के लिए बाध्य हूँ. इस लिए मैंने मंदिर के चारों ओर बालक का अनुकरण किया.”

 

सीख:

ईश्वर मासूम लोगों की सादगी और प्रेम को देखते हैं.