गुरु पूर्णिमा

gp

हिन्दू आध्यात्मिक गुरुओं को सर्वोच्च महत्व देते हैं. गुरु को प्रायः भगवान के बराबर माना जाता है- गुरु देवो नमः जीवन में गुरू के महत्व का वर्णन कबीर दास जी ने अपने दोहों में पूरी आत्मियता से किया है।

 गुरू गोविन्द दोऊ खङे का के लागु पाँव,
        बलिहारी गुरू आपने गोविन्द दियो बताय।

गुरु को सदा जीव तथा अनश्वर के बीच कड़ी माना जाता है. जिस प्रकार सूरज की रोशनी से चन्द्रमा दमकता है और उसे गौरवान्वित करता है, उसी प्रकार गुरु से लाभान्वित होकर सभी शिष्य चन्द्रमा के समान चमक सकते हैं. गुरु पूर्णिमा का दिन हमारे जीवन के सभी शैक्षिक तथा आध्यात्मिक गुरुओं को समर्पित है.
हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का दिवस महान ऋषि वेद व्यास को समर्पित है. इसीलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं.

 गुरु पूर्णिमा का अर्थ :

गुरु शब्द के दो अंश हैं: ‘गु’ व ‘रु’. ‘गु’ का अर्थ होता है- अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है- प्रकाश (ज्ञान). अतः गुरु हमें अज्ञान रुपी अन्धकार से ज्ञान रुपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं.

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, गुरु पूर्णिमा आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है. गुरु हमारे जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हम सब आजीवन नई चीज़ों के बारे में सीखते हैं और अपना ज्ञानोदय करते हैं. यह सब गुरु के कारण संभव होता है. सभी गुरुओं को भगवान का स्थान दिया जाता है. उनकी इच्छा, आदेश तथा उपदेश को मूलभूत माना जाता है. निम्न श्लोक इस कथन की उचित रूप से पुष्टि करता है-

       गुरुब्रह्मा गुरुविर्ष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
      गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।

गुरु को भगवान का दर्जा इसलिए दिया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गुरु के द्वारा हम सर्वोच्च ज्ञान हासिल करके परमात्मा तक पहुँच सकते हैं.

   वेद व्यास : त्रिकालिक सर्वोच्च गुरु

vyasa1

गुरु वेद व्यास अब तक के सबसे महान तथा सर्वाधिक ज्ञानी गुरु माने जाते हैं. गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा, गुरु वेद व्यास को समर्पित है और उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. वेद व्यास सर्वाधिक सम्मानित गुरुओं में से एक हैं. उन्होंने हमें सच्चे आदर्श सिखाये हैं और सही व गलत में भेद करने में हमारी सहायता की है. वेद व्यास द्वारा लिखित विराट महाकाव्य, महाभारत, इसका प्रमाण है. महाभारत से मिलीं शिक्षाएँ आज के युग में भी वैद्य हैं तथा आज के समाज में प्रचलित सभी अनैतिक परिस्तिथियों में हमारा मार्ग दर्शन करतीं हैं.

वेद व्यास वे गुरु हैं जिन्होंने वेदों को चार भागों में वर्गीकृत किया. हम उन्हें रिग वेद, यजुर वेद, साम वेद तथा अथर्व वेद के नामों से जानते हैं. वेद व्यास ने ‘श्रीमद भगवद गीता’ एवं १८ पुराण भी लिखें थे. vyasa इन महाग्रंथों की शिक्षाएँ मानवजाति को सबसे भव्य तथा सर्वोत्तम भेंट हैं. दत्तात्रेय, जिन्हें गुरुओं का गुरु माना जाता है, ने भी ऋषि व्यास से शिक्षा ग्रहण की थी.

 गुरु पूर्णिमा की महत्ता :

प्राचीन काल से, गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य अपने गुरु को विशेष पूजा व अभिनन्दन अर्पण करते हैं. अतः गुरु पूर्णिमा, गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण का पर्व है.
गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा केवल हिन्दूओं के लिए ही महत्त्वपूर्ण दिन नहीं है. दुनियाभर के बौद्धधर्मी तथा जैन भी इसे पूरी श्रद्धा तथा विश्वास के साथ मनाते हैं.
गुरु पूर्णिमा के दिन सभी बौद्धधर्मी भगवान गौतम बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पण करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दिन गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला धर्मोपदेश दिया था. बुद्ध का प्रथम धर्मोपदेश जिसे धर्म चक्र प्रवर्तन सूत्र कहते हैं, आषाढ़ की पूर्णिमा को दिया गया था.
जैन परंपरा के अनुसार, इस दिन २४वे तीर्थंकर महावीर ने इंद्रभूति गौतम को अपना पहला शिष्य बनाया था. इस प्रकार वे स्वयं गुरु बने थे.
अतः गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु तथा शिक्षकों को विशेष आदर दिया जाता है. हमारी आत्मिक शिक्षा शुरू करने का यह शुभ दिवस है. परंपरा के अनुसार, आत्मिक जिज्ञासु, गुरु पूर्णिमा के दिन, अपनी आध्यात्मिक साधना सशक्त करनी शुरू कर देते हैं.

गुरु पूर्णिमा के दिन से ‘चतुरमास’ की अवधि आरम्भ होती है. ‘चतुरमास’ आषाढ़ की देवशयानी एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी एकादशी तक ४ महीनों का पवित्र समय है. यह समय वर्षा ऋतु का काल है. पुराने समय में, विचरण करने वाले गुरु तथा उनके शिष्य एक स्थान पर ठहरकर अध्ययन करते थे और व्यास द्वारा कृत ब्रह्म सूत्र पर उपदेश देते थे. सन्यासी एक जगह पर रूककर जनता को प्रवचन देते थे.

गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाना :

इस पवित्र अवसर पर सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सशक्त जाप व ध्यान करना चाहिए. गुरु के रूप का ध्यान करना चाहिए, गुरु के चरणों की पूजा करनी चाहिए, उनके शब्दों को पावन मन्त्र मानना चाहिए क्योंकि गुरु कृपा से ही मोक्ष मिलता है.
विकल्प के रूप में हम मौन धारण कर अपने गुरु की पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं अथवा मानसिक रूप से गुरु की शिक्षाओं पर विचार कर सकते हैं.
इस पावन दिन पर नए संकल्प लेकर अपने गुरु के निर्देश के अनुसार हमें आध्यात्मिक पथ पर चलना चाहिए.
गुरु पूजा का सर्वोत्तम तरीका उनकी शिक्षाओं का पालन, उनकी महिमा व सन्देश का प्रचार करना तथा उनकी शिक्षायों को स्वयं में सम्मिलित कर दमकना है.

gp1

 

sources : experience-nepal.com/event/guru-purnima

hinduism.about.com

–  अर्चना द्वारा अनुवादित

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s