मेरा हाथ पकड़ो

hold hand

आदर्श : प्रेम
उप आदर्श: विश्वास, भरोसा

एक बार एक छोटी सी लड़की अपने पिता के साथ पुल पार कर रही थी. पिता कुछ डरे हुए थे कि उनकी बेटी कहीं गिर न जाए. अतः उन्होंने अपनी नन्ही बेटी से कहा, “बेटी, तुम मेरा हाथ पकड़ लो. वरना तुम नदी में गिर सकती हो.” hold hand2

छोटी लड़की ने कहा, “नहीं पिताजी. आप मेरा हाथ पकड़िए.”

hold hand1

हैरान पिता ने पूछा, “दोनों में क्या अंतर है?”

“बहुत अंतर है,” नन्ही बालिका ने उत्तर दिया.

“अगर मैं आपका हाथ पकड़ूंगी और मुझे कुछ हो गया तो संभवतः मैं आपका हाथ छोड़ दूँगी. पर अगर आप मेरा हाथ पकड़ेंगें तो मुझे निश्चित रूप से मालूम है कि चाहे कुछ भी हो, आप मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ेंगें.”

 सीख:

अगर हम ईश्वर को छोड़ना भी चाहे तो भी परम दयालु ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेंगें.  उन्हें प्रेम व श्रद्धा से बाँधकर, कसकर पकड़कर रखो.
Courtesy:http://www.islamicthinking.info/post/6530586668/father-and-daughter

http://saibalsanskaar.wordpress.com

अर्चना द्वारा अनुवादित

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