बुद्ध पूर्णिमा- तीन कारणों से पवित्र

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बुद्ध पूर्णिमा उत्सव या बुद्ध जयंती समारोह बौद्धधर्मी तालिका में सबसे पवित्र दिन है. यह बौद्धधर्मियों का सबसे महत्त्वपूर्ण त्यौहार है और इसे विभिन्न देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत, बांग्लादेश, भूटान, भारत, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार तथा इंडोनेशिया में बहुत उत्साह से मनाया जाता है. हालाँकि बौद्धधर्मी हर पूर्णिमा को पवित्र मानते हैं परन्तु वैसाख के महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है. इस दिन बुद्ध का जन्म, उनका ज्ञानोदय व उनको निर्वाण की प्राप्ति हुई थी. यह अद्भुत तिगुना संयोग बुद्ध पूर्णिमा को विशिष्ट महत्त्व देता है.

कहावत

बौद्धधर्मी कहावत के अनुसार, बुद्ध की पत्नी यशोधरा, बुद्ध का प्रथम अनुयायी आनंद, उनका सारथी चन्ना तथा घोड़ा कंटका जिसपर उन्होंने अपने साम्राज्य का त्याग किया था, सभी का जन्म बुद्ध जयंती के पवित्र दिन हुआ था.

उत्सव

बुद्ध के जन्मदिन पर बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव में शामिल होने के लिए दुनिया भर से बौद्ध तीर्थयात्री बोधगया, नेपाल, आते हैं. दिनभर प्रार्थना समारोह, गौतम बुद्ध की जीवनी पर उपदेश, धार्मिक प्रवचन, बौद्ध धर्मग्रंथों का निरंतर अनुवाचन, सामूहिक ध्यान, शोभायात्रा और बुद्ध की मूर्ति की अर्चना का आयोजन किया जाता है. बुद्ध पूर्णिमा के दिन, बौद्धधर्मी खीर खाते हैं और इसे गरीबों के साथ बाँटते हैं. वे सार्वजनिक जगहों पर स्टाल लगाकर जनता को स्वच्छ पीने का पानी देते हैं.

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रीति-रिवाज़ व संस्कार

– पक्षियों को पिंजरे से मुक्त करते हैं. बीमारों में फल व कपड़ों का वितरण और मांस खाने से परहेज करते हैं.

– बोधी वृक्ष की पूजा की जाती है. इसकी शाखाओं को माला तथा रंगीन झंडों से सजाया जाता है. वृक्ष के इर्द-गिर्द दीये जलाये जातें हैं और दूध व सुगन्धित पानी इसकी जड़ों पर छिड़का जाता है.

– भक्तजन अगरबत्ती, फूल, मोमबत्ती तथा फलों का चढ़ावा चढ़ाते हैं और मूर्ति के समक्ष अनेकों बार दंडवत करते हैं.

– इस पवित्र दिन बौद्धधर्मी स्नान के बाद सिर्फ श्वेत वस्त्र ही पहनते हैं . पूजा के लिए सभी लोग विहारों में एकत्रित होकर भिक्षुओं को दान देते हैं.

– बौद्धधर्मी पांच सिद्धांतों, पंचशील, में अपने विश्वास की पुनः पुष्टि करते हैं-
जान न लेना
चोरी न करना
झूठ न बोलना
शराब का सेवन न करना
परस्त्रीगमन न करना .

‘ओम मणि पद्मे हूं’ – बौद्धधर्मियों का सबसे लोकप्रिय मन्त्र है. यह छह अक्षरों का मन्त्र छह अवगुणों- अहम, ईर्ष्या, इच्छा, अज्ञानता, लालच व घृणा- से शुद्धिकरण का प्रतीक है. ऐसा माना जाता है कि इस मन्त्र के सच्चे व नियमित उच्चारण से हम स्वयं में बदलाव ला सकते हैं और बुद्ध के समान निर्मल व महान बन सकते हैं.     bp2

 

http://www.nepal.saarctourism.org/buddha-purnima.html

 

 

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