ईसाह मसीह की तरह बनने की कोशिश करना- एक बड़े भाई का उपहार

christmas season

आदर्श : उचित आचरण
उप आदर्श : कर्त्तव्य, सहानुभूति

क्रिसमस का मौसम था. नौ वर्षीय जरोन एवं उसका छह वर्षीय भाई, पार्कर, उत्साहित थे. उन्होंने अपने शहर के किराने की दूकान द्वारा प्रायोजक पढ़ने की एक प्रतियोगिता में भाग लिया था. सबसे अधिक किताबें पढ़ने वाले दो विद्यार्थी एक-एक नई साइकिल जीतने वाले थे. सभी विद्यार्थियों को प्रत्येक पुस्तक पढ़ने के बाद अपने माता-पिता तथा अध्यापकों से हस्ताक्षर करवाने थे. इनाम में दो साइकिलें थीं- एक पहली से तीसरी कक्षा स्तर के बच्चों के लिए और एक चौथी से छठी कक्षा स्तर के बच्चों के लिए.

पार्कर विशेष रूप से उत्साहित था क्योंकि उसके लिए यह साइकिल जीतने का एक माध्यम था. उसे साइकिल की सचमुच इच्छा थी. उसके बड़े भाई ने बाज़ार बिक्री में काम करके एक दस-गति वाली साइकिल हासिल की थी. और पार्कर अपने बड़े भाई को उसकी नई बैंगनी साइकिल हर जगह चलाते देख थक चुका था. पार्कर ने सोचा कि अगर किताबें पढ़कर वह अपनी साइकिल स्वयं हासिल कर सकता है तो यह बहुत ही अच्छा होगा. अतः उसने जल्दी-जल्दी किताबें पढ़नी शुरू कर दीं. लेकिन वह चाहे कितनी भी किताबें पढ़ता, उसके स्तर का कोई और छात्र उससे अधिक किताबें पढ़ लेता था.

इसी दौरान, जरोन प्रतियोगिता को लेकर अधिक उत्सुक नहीं था. जब वह किराने की दूकान पर गया और उसने सभी पाठकों के नाम व हर पाठक द्वारा पढ़ी किताबों की संख्या लेखाचित्र पर देखी तब उसने पाया कि उसके छोटे भाई की प्रतोयोगिता जीतने की संभावना बहुत कम थी.

क्रिसमस के सही तात्पर्य, देने की ख़ुशी, से प्रभावित होकर उसने निश्चय किया कि वह जो अपने लिए नहीं कर सकता था, पार्कर के लिए करेगा. अतः जरोन ने अपनी साइकिल अलग रखी और हाथ में पुस्तकालय का कार्ड लेकर, पुस्तकालय की ओर चल पड़ा. उसने पढ़ा और पढ़ता गया. वह एक दिन में ८ घंटे तक पढ़ता था. इतना अद्भुत उपहार दे पाने की ख़ुशी ने संभवतः उसे प्रगति के मार्ग पर जारी रखा.

आखिर वह दिन आ गया जब अंतिम सूचियाँ समर्पित करनीं थीं. जरोन की माँ उसे दूकान पर ले गयीं और उसने अपनी सूची जमा कर दी और प्रदर्शन पर रखी पुरस्कार-विजेताओं की साइकिलों को सराहने लगा.bicycle

दूकान का प्रबंधक उसे २०” की लाल चमकदार साइकिल को सराहते हुए देख रहा था. प्रबंधक ने कहा, “मुझे लगता है कि अगर तुम मुकाबला जीत जाओगे तो तुम बड़ी वाली साइकिल लेना चाहोगे?”

जरोन ने प्रबंधक के मुस्कुराते हुए चेहरे की ओर देखा और बहुत गंभीरता से कहा, “नहीं महाशय! मैं ठीक इसी कद की साइकिल लेना पसंद करूंगा.”

“लेकिन यह साइकिल तुम्हारे लिए बहुत छोटी नहीं है?”

“नहीं महाशय- मैं इसे अपने छोटे भाई के लिए जीतना चाहता हूँ?”

वह आदमी अचंभित था. वह जरोन की माँ की तरफ मुड़कर बोला, “पूरे साल की मैंने यह सबसे अच्छी कहानी सुनी है!”

जरोन की माँ को पता नहीं था कि उसने अपने छोटे भाई के लिए इतना कठिन परिश्रम किया था. उन्होंने जरोन को अत्यधिक गर्व और ख़ुशी से देखा और प्रतियोगिता के परिणामों की प्रतीक्षा करने घर चले गए.

अंततः टेलीफोन की घंटी बजी. २८० किताबें पढ़कर जरोन जीत गया था. अपने माता-पिता की सहायता से उसने क्रिसमस की पूर्वसंध्या तक साइकिल को अपनी दादी के घर के तहखाने में छुपा दिया. वह पार्कर को उसका उपहार देने के लिए मुश्किल से इंतज़ार कर पा रहा था.

क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर सारा कुटुंब दादी के घर पर एक विशेष पारिवारिक शाम के लिए एकत्रित हुआ. माँ ने दुनिया को अलौकिक पितामह के उपहार- उनके पुत्र ईसाह मसीह की कहानी सबको सुनाई. फिर उन्होंने एक अन्य बड़े भाई के प्यार की कहानी सुनाई. उन्होंने कहा कि हालाँकि यह उतना महान बलिदान नहीं था जोकि उद्धारक ने हम सब के लिए किया है पर फिर भी यह एक त्याग है. यह बलिदान एक बड़े भाई का अपने छोटे भाई के प्रति प्रेम को दर्शाता है. पार्कर और उसके परिवार ने एक भाई की कहानी सुनी, जिसने अपने छोटे भाई को साइकिल जितवाने के लिए २८० किताबें पढ़ीं थीं.

पार्कर ने कहा, ” मेरा बड़ा भाई मेरे लिए कुछ इस प्रकार ही करेगा.”

इस पर जरोन भाग कर दूसरे कमरे में गया जहाँ दादी ने साइकिल रखी थी. जब वह दो पहिये का खज़ाना, जो उसने अपने छोटे भाई के लिए जीता था, बाहर लेकर आया, परिवार के सभी सदस्य गर्व से मुस्कुरा रहे थे. पार्कर साइकिल की ओर दौड़ा और दोनों भाइयों ने एक दूसरे को सीने से लगा लिया.two bros

   सीख :

हममें सबसे प्रेम और सबकी परवाह करनी चाहिए. यह हमारे परिवार, माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी से शुरू होता है और फिर पड़ोसियों तथा अन्य सभी जो आपत्ति में हैं, उन तक विस्तृत होता है. ज्येष्ठ सहोदर का अपने अनुजों का ध्यान रखना और मदद करना कर्त्तव्य बनता है. छोटों को इसका प्रतिदान प्रेम और आदर से करना चाहिए.

वसुंधरा व अर्चना द्वारा अनुवादित

http://saibalsanskaar.wordpress.com

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