अक्षय तृतीया

akshaya-tritiya

 

अक्षय तृतीया एक बहुत ही लोकप्रिय त्यौहार है जो हिन्दू और जैन हर साल अति प्रेम और श्रद्धा से मनाते हैं. हिन्दू संप्रदाय के लोगों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण त्यौहार है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. अतः इसे ‘परशुराम तृतीया’ भी कहते हैं.

इसे ‘आखा तीज’ भी कहते हैं. यह पर्व वैसाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाते हैं. कहा जाता हैं कि इस दिन ज्ञान और बुद्धि के महा प्रभु गणेश ने वेद व्यास की आज्ञा से महाकाव्य “महाभारत” लिखना शुरू किया था.

अक्षय तृतीया को वर्ष का सर्वाधिक सुनहरा दिन माना जाता है क्योंकि ‘अक्षय’ का अर्थ है शाश्वत अर्थात जो कभी काम न हो. ऐसा माना जाता है कि जब पांडव वनवास में थे तब भगवान कृष्ण ने उन्हें ‘अक्षय तृतीया’ नामक कलश दिया था. वह कलश कभी खाली नहीं रहता था और आवश्यकता पड़ने पर असीमित मात्रा में खाना पेश करता था.

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन त्रेता युग का आरम्भ हुआ था तथा भारत की सबसे पवित्र नदी, गंगा, स्वर्ग से धरती पर उतरीं थीं.

अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य करना बहुत लाभदायक माना जाता है. नया व्यापार या कार्य शुरू करने के लिए यह बहुत ही भाग्यशाली दिन माना जाता है. बहुत लोग आज के दिन सोना व जायदाद खरीदते हैं.

 

स्त्रोत: Calendarlabs.com, wikipedia.com

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