एक जुट होकर कार्य करना

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उप आदर्श : एकता

आदर्श : उचित आचरण

यह टीम का दूसरा मैच था. हम UWC ईस्ट, सिंगापुर से खेल रहे थे. यह एक महत्वपूर्ण मैच था और हमारी टीम को जीतना था. हमारे प्रशिक्षक ने बताया कि टीम के अधिकतम विद्यार्थियों की संख्या पर प्रतिबन्ध होने के कारण, हममें से कोई एक मैच नहीं खेल सकता.

मैंने स्वेच्छा से स्थानापन्न होने की  पहल की क्योंकि मैं अपने साथियों को खेल में भाग लेने का अवसर देना चाहता था. मैच अच्छे से हो गया और मैंने अपने साथियों का प्रोत्साहन किया.

अंत में जीत हमारी हुई और हमने ख़ुशी का उत्सव मनाया. टीम की मदद कर और उनके साथ कार्य कर के मुझे प्रसन्नता हुई.
इस अनुभव से मैंने यह सीखा है कि हमें केवल अपने बारे में नहीं बल्कि संगठित समूह के दृष्टिकोण से भी सोचना चाहिए.

विवेक- ११ वर्षीय – प्रेमार्पण आदर्श एवं प्रार्थना कक्षा समूह २

वसुंधरा एवं अर्चना  द्वारा अनुवादित

http://premaarpan.wordpress.com

 

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