प्रार्थना के द्वारा अपने प्रिय ईश्वर से संपर्क बनाना- उप आदर्श: विश्वास, निष्ठा-आदर्श: प्रेम

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एक बार एक बहुत ही गरीब महिला थी. उसके चार बेटे और दो बेटियाँ थीं. उसके पति की तबियत ठीक नहीं रहती थी और वे बिस्तर पर पड़े रहते थे. इस कारण उनके घर में कमाई का कोई साघन नहीं था. जब रसोईघर में फल और सब्ज़ियों की मात्रा घटने लगी तो उसे चिंता होने लगी कि भविष्य में, वह इन चीज़ों की व्यवस्था कैसे कर पाएगी.  उसने नज़दीक के दुकानदार से कुछ दालें और सब्ज़ियाँ उधार लेने का सोचा.

वह नम्रतापूर्वक उस दुकानदार के पास पहुँची और उसने अपने परिवार की  परिस्थिति  समझाई. उसे आशा थी कि दुकानदार उसकी मदद करेगा और उसे खाद्य सामग्री देगा. परन्तु दुकानदार ने उसकी सहायता करने से इंकार कर दिया और उसे मदद के लिए कहीं और जाने को कहा. उसकी अवस्था देखकर पास खड़े एक व्यक्ति ने उसकी मदद करनी चाही और दुकानदार से कहा कि वह उसकी खाद्य पदर्थों का मूल्य चुका देगा.

दुकानदार ने अनिच्छापूर्वक महिला से कहा कि वह अपनी खरीदारी कि सूची तराज़ू पर रख दे और सूची के वज़न के अनुसार वह उसे सामग्री देगा. यह सुनकर महिला ने सर झुका लिया. फिर उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और कुछ क्षण उपरान्त, कागज़ का एक टुकड़ा निकालकर उसपर कुछ लिखा. फिर  उसने नमन करते हुए, उस कागज़ के टुकड़े को सावधानी से तराज़ू के पलड़े पर रख दिया.

जैसे ही महिला ने कागज़ के टुकड़े को तराज़ू पर रखा, वह बैठ गया मानो कागज़ ने तौल की जगह ले ली हो.कागज़ के वज़न से तराज़ू की स्थिति  देख, दुकानदार और वह अन्य व्यक्ति हक्के-बक्के रह गए. चकित दुकानदार ने दूसरे पलड़े पर खाद्य सामग्री रखनी शुरू कर दी. तराज़ू को असंतुलित देख, दुकानदार ने और अधिक खाद्य पदार्थ रखना ज़ारी रखा, जब तक कि तराज़ू का काँटा सामान  हो जाता. दुकानदार को आश्चर्य हुआ कि तभी भी तराज़ू के पलड़े बराबर नहीं हुए.

अंततः उसने झपटकर पलड़े से कागज़ का टुकड़ा लिया तथा उसे और भी अधिक आश्चर्य से देखा. वह खाद्य पदार्थों की सूची नहीं थी. बल्कि वह प्रार्थना थी : “प्रिय प्रभु, आप मेरी ज़रूरतें जानते हैं. मैं आप पर छोड़ती हूँ कि आप मुझे कितना देते हैं. ”

यह चमत्कार देखकर, दुकानदार ने महिला को तराज़ू पर रखी सभी सामग्री निःशुल्क दे दी. महिला ने दुकानदार को उसके इस नेक भाव के लिए धन्यवाद दिया. दुकानदार को बाद में पता चला कि उस रहस्यमय कागज़ के टुकड़े के वज़न से तराज़ू के काँटे टूट गए थे. इसलिए, एक प्रार्थना का भार केवल ईश्वर ही जानते हैं.

सीख

प्रार्थना के द्वारा एक व्यक्ति प्रभु को अपना मन और अपने भाव व्यक्त कर सकता है. प्रार्थना, हमारे प्यारे ईश्वर से व्यक्तिगत अनुभूति और घनिष्ट सम्बन्ध बनाने का, माध्यम है. वह हर पल तुम्हें सुनने को इच्छुक रहते हैं और प्रेम और सहानुभूति से प्रत्यत्तुर देते हैं.

अपने विधाता को इस प्रकार पुकारने की पद्धति को प्रार्थना कहते हैं. जिन्हें भगवान्  में विश्वास होता है, वे साधारणतः उन्हें पूजते हैं.  प्रार्थना, उपासना के दौरान या हमारे मन में चुपचाप भी, की जा सकती है. अगर हम ईमानदारी से प्रभु का अर्चन करेंगे तो वो तुरंत हमारी प्रार्थना का उत्तर देंगें.

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